सिद्धार्थनगर शोहरतगढ़ के विधायक चौधरी अमर सिंहः राजनीति में न आते तो खेती करते

मैं कहना चाहूंगा कि निचले स्तर पर अगर ज़िला पंचायत ओर क्षेत्र पंचायत में भ्रष्टाचार है तो ये चुनाव सीधे जनता से ही करा दिये जाएं ताकि भ्रष्टाचार खत्म हो जाये। ताकि भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा के तहत चुनकर आने वाला निर्भीक हो कर अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करें।

अपना दल विधायक अमर सिंह का इंटरव्यू (फोटो सोशल मीडिया)

इंतेजार हैदर

सिद्धार्थनगरः विधायक चौधरी अमर सिंह अपना दल (एस) से 2017 में शोहरतगढ़ विधानसभा से चुनाव लड़े ओर जीते 2015 तक लगातार तीन बार प्रधानी में जीत कर हैट्रिक मारी ओर फिर 2017 में पहली बार विधायक बने  गोरखपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक की शिक्षा ली।

राजनीति में कैसे आये ?

इस सवाल के जवाब में विधायक ने कहा कि हमारे अपने लोगों ने कहा कि आप इतनी मेहनत करते हैं नौकरी नहीं किये हैं तो कम से कम पॉलिटिकल लाइन में आ जाइये ग्राम सभा से प्रधानी का चुनाव लड़िए लोगों ने प्रपोज किया तो उन लोगों के कहने से मैं आया ग्राम पंचायत में हैट्रिक मारी 2015 तक प्रधान था।

तो खेती बिजनेस करते

राजनीति मे नही आते तो दूसरा काम क्या करते सवाल पर अमर सिंह कहते हैं राजनीति में नहीं आते तो बिजनेस, व्यापार, खेती, जीविकोपार्जन के लिए करना पड़ता।

लगातार महंगे होते जा रहे चुनाव पर वह कहते हैं देखिये चुनाव हर विधान सभा में, हर पार्लियामेंट में लोग अपने अपने तरह से लड़ते हैं और संसाधन की आवश्यकता तो पड़ती ही है किसी भी काम में।

वह कहते हैं खेती किसानी करो, तो उसमें भी संसाधन की आवश्यकता है। व्यापार करेंगे, तो उसमें भी पूंजी चाहिए। राजनीति में भी संसाधन की आवश्यकता है। चूंकि वर्क इतने बढ़ गए हैं, पहले की तरह नहीं रह गया।

पहले तो विधायक लोग बस से यात्रा कर लेते थे। मोबाइल थी नहीं था। इतना पापुलेशन नहीं था। इतना काम नही था। लोग काम चला लेते थे।

अब तो सैकड़ों समस्याएं हैं। सुबह से 12 बजे तक उसका समाधान करने के लिए टेलीफोन करना, आना-जाना, शादी, सुख-दुख, ब्लॉक तहसील तो भागमभाग की ज़िंदगी में साधन नहीं रहेगा तो कवर कैसे करेंगे, कैसे किसी के सुख दुख में पहुँच पाएंगे। कैसे किसी की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी, इसलिए संसाधन तो आवश्यक है।

चुनाव सुधार के लिए राय

देखिये चुनाव जो पार्लियामेंट का या असेम्बली का है ये तो अपनी जगह आम जनता से होता है लेकिन त्रिस्तरीय  पंचायत में जो विकास खंडवार प्रमुखों का चुनाव होता है और ज़िला पंचायत की जो सबसे बड़ी कुर्सी है ज़िला पंचायत अध्यक्ष की, यहां भ्रष्टाचार है, ये खुली किताब की तरह स्पष्ट है।

सब लोग जानते हैं। ये पैसे का चुनाव बन गया है। अगर किसी तरह से एक मर्तबा आदमी जीतता है, तो दोबारा उसके खिलाफ अविश्वास लाने के लिए पैसा खर्च करके अविश्वास ले आते हैं, जब चाहते हैं तब हटाते हैं। फिर दूसरा कोई आता है, वो पैसा खर्च करता है फिर बनता है।

Apna Dal MLA Amar Singh

ओर ये भी मैं कहना चाहूंगा कि निचले स्तर पर अगर ज़िला पंचायत ओर क्षेत्र पंचायत में इस तरह का भ्रष्टाचार है तो ये चुनाव सीधे जनता से ही करा दिये जाएं ताकि भ्रष्टाचार खत्म हो जाये। ताकि भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा के तहत वो भी निर्भीक हो कर अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करें।

जनता की अपेक्षाएं

देश तरक्की कर रहा है समाज तरक्की कर रहा है, पढ़ लिख रहा है, तो अपेक्षाएं तो वही हैं। कोई नेता बनना चाहता है, कोई बिज़नेस मैन बनना चाहता है, कोई नौकरी के लिए चाहता है, कोई कहता है महँगाई ज़्यादा हो गयी है, कोई कहता है सड़क चाहिए बिजली चाहिए पानी चाहिए, शिक्षा चाहिए तो जनसंख्या अगर निरंतर बढ़ रही है ओर आवश्यकताएं बढ़ रही है तो हम सब से अपेक्षाये तो होंगी ही, हमें भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि समस्याएं असीमित हैं, और संसाधन सीमित हैं।

एक सवाल के जवाब में विधायक ने कहा कि हम लोग जनता से अपेक्षा करते हैं कि हम ही जीतें, अच्छा काम करें, उनकी सेवा में रहें, उनकी सोच मुताबिक काम किया जाए।

वह कहते हैं कि हंड्रेड परसेंट काम करके हम ही उनकी अपेक्षाओं पर खरे उतर जाएंगे कोशिश यही होती है। हम लोग का काम है कोशिश करना, जनता की बातों को, जनता की समस्याओं को प्रदेश की पंचायत में उठाना, कहना तो समस्या का सामना तो करना ही पड़ता है।

जीवन का सबसे खुशी का पल

जब कोई काम क्षेत्र में हो जाता है। जैसे क्षेत्र जवार के लिए पानी की व्यवस्था हो गई, सड़क की व्यवस्था हो गई, बिजली की व्यवस्था हो गयी या सरकार की जन कल्याणकारी योजना उन तक पहुंच गई तो बड़ा सुख महसूस होता है। अच्छा लगता है उनसे मिलने पर कि हमने कुछ अच्छा किया और अगले को भी लगता है कि हाँ अगले ने  प्रयास किया हम लोग का काम हुआ तो वो क्षण बहुत अच्छा होता है, बड़ा सुखद महसूस होता है, दोनों पक्षों के लिए।

अपनी उपलब्धियां बताएं

चौधरी अमर सिंह ने कहा कि देखिये जमीन से जुड़ा हुआ मैं व्यक्ति हूं और जनता जो गांव में हमारी 70 फ़ीसदी आबादी है उसके अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास कर रहा हूं। उसके चेहरे पर मुस्कुराहट लाना चाहता हूं और उस से सीधा बात करना चाहता हूं। वह सीधा मुझसे बात करे। मेरी पहचान बने अपना काम कह ले।

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जागरूकता पैदा कर रहा हूं कि लोग समझें जानें कि लोकतंत्र में आपने हमें 5 साल के लिए जो अधिकार दिया है, प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत का गठन आपके कर कमलों से होता है, तो कोई ऐसा अच्छा व्यक्ति रहे जो आप को जाने सुने समझे ओर अच्छी योजनाओं को लाये।

हमने 2017 से अपने विधानसभा क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी ओर भी कई काम कराए हैं और ये अवाम के बीच मे है। अगल बगल के विधान के लोग आते हैं और कहते है कि साहब आप जैसा हर आदमी मिल जाये तब तो ठीक है। तो ये मेरे लिए गर्व की बात है कि लोग मुझे चाहते हैं, मुझे मानते हैं तो विकास के मामले में शोहरतगढ़ में कहीं कोई दिक्कत नहीं है।

दल बदल के बारे में क्या राय है

देखिये दल बदल में ये तो राजनीति की परंपरा है, लोग चाहते हैं आज किसका वेव है, किस पार्टी का वेव है, उसमें रास्ता बनाओ लेकिन सैद्धांतिक राजनीति यही है कि आप जिस दल के साथ है उस दल का, उस दल की नीतियों का आगे प्रचार प्रसार करते रहें, बने रहें और मुझे लगता है जो सैद्धांतिक लड़ाई एक दल में होती है, दल बदल नही करता है। जो एक दल में रहता है उसका वजूद राजनीति में अच्छा होता है, जनता में उसकी छवि अच्छी होती है।

राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र

विधायक ने कहा देखिये बड़ा अच्छा सवाल किया आपने, दिन ब दिन जनता का विश्वास राजनीति में ओर राजनीति करने वाले लोग के लिए घटता जा रहा है, क्यूंकि पहले क्या होता था लोग चावल भी देते थे, पैसा भी देते थे, साथ में चलकर प्रचार भी करते थे और अपने नेता को पैदा करते थे। तो नेता उनके मुताबिक काम करता था। अगर कोई सभा लगती थी, तो जनता खुद आती थी।

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आज तो कुल उल्टा हो रहा है जनता को बुलाने के लिए गाड़ी लगाओ, संसाधन लगाओ, लालच दो। तमाम ये काम करो, ये मिलेगा, वो मिलेगा, मतलब बुलाना पड़ रहा है। लोगों से साथ में चलने के लिए सिफारिश करनी पड़ रही है तो मुझे लगता है कि पहले की मुकाबले में आज के दौर में राजनीति में काफी कुछ विसंगतिया भी हैं और बदलाव भी हो गया है।

क्षेत्र की मुख्य समस्या

हमारे यहां सड़क की समस्या ज्यादा थी। केशव प्रसाद मौर्य डिप्टी सीएम ने एक अच्छी दिशा दी है और अब हम चाहते हैं बिजली विभाग से रोशनी के लिए, बिजली आपूर्ति के लिए, क्योंकि शोहरतगढ़ में 1 लाख 32 हज़ार केवी का ट्रांसफार्मर स्वीकृत है लेकिन जमीन नहीं मिल पा रहा है, लोकेशन सही नहीं मिल पा रही है क्योंकि चकबंदी बहुत साल से नहीं हुआ है। जी एस लैंड बचा नहीं है, तो उसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है। 7, 8 पावर हाउस हमारे विधानसभा मे बने हुए हैं। कुछ नए हमने अपने कार्यकाल में बनवाये हैं।

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विधायक कहते हैं कि रही बात स्वास्थ्य की तो भारत नेपाल सीमा पर स्तिथ है कृष्णा नगर बढ़नी में phc है उसको हम chc में कन्वर्ट कराना चाहते हैं लेकिन वह ज़मीन थोड़ा कंजस्टेड है, ज़मीन थोड़ा बढ़ जाए तो कराया जाए उसके लिए लगे हैं। दो तीन सड़कें बननी हैं मुझे लगता है कि कोरोना की स्थिति थोड़ा नार्मल हो जाएगी, तब सरकार दोबारा शुरू करेगी अपना काम तो हम लोग निपटा लेंगे इतना मेरा प्रयास है।

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