भिड़े दो डीएम: एक शव पर हुआ घमासान, बड़ी मुश्किल से लिया फैसला

देश में हर तरफ कोरोना फैला हुआ हैं। ऐसा कोई राज्य नहीं है जहां पर इस महामारी ने अपने पैर न पसारे होंगे। इस महामारी से बहुत लोगों की जान भी जा चुकी है।

रामपुर: देश में हर तरफ कोरोना फैला हुआ हैं। ऐसा कोई राज्य नहीं है जहां पर इस महामारी ने अपने पैर न पसारे होंगे। इस महामारी से बहुत लोगों की जान भी जा चुकी है। लेकिन अब मामला यहां फंस रहा है कि मरने वालों के शव को कहा ले जाया जाएगा। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर टांडा का सामने आ रहा है जहां निवासी 75 वर्षीय कारोबारी का शव नियमों को लेकर दो जिलों को डीएम के आमने-सामने आने पर लगभग 20 घंटे तक टीएमयू अस्पताल में पड़ा रहा। उस कारोबारी की मौत कोरोना के चपेट में आने से हुई है।

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20 अप्रैल सोमवार को रात में आई रिपोर्ट में उसे पता चला उसे कोरोना हो गया है। वहीं इस पर रामपुर के जिला अधिकारी का कहना था कि कारोबारी की मौत मुरादाबाद में हुई है। स्वास्थ मंत्रालाए की गाइडलाइंस के मुताबिक वहां के प्रशासन को शव को भिजवाने का इंतजाम करना चाहिए।

वहीं इस पर मुरादाबाद के डीएम राकेश कुमार सिंह ने कहा कि, गाइडलाइंस के मुताबिक जिस जिले का शव होगा वहां के अधिकारी द्वारा गृह जनपद तक ले जाने के लिए अधिकारी नामित किया जाना था। रामपुर से शव ले जाने के लिए किसी भी अधिकारी को अधिकृत नहीं किया गया था।

अंतिम संस्कार में सावधानियां बरतने का निर्देश हैं जिसकी जिम्मेदारी संबंधित मजिस्ट्रेट और पुलिस की होती है। दोनों डीएम के आमने-सामने आने की वजह से शव अस्पताल में ही पड़ा रहा। रात लगभग साढ़े सात बजे बनी सहमति बनी और मुरादाबाद प्रशासन ने शव को रामपुर की सीमा तक पुलिस सुरक्षा में भिजवाया।

ये था मामला

उसके बाद वहां से रामपुर पुलिस की सुरक्षा में शव को टांडा लाकर सुबह दफनाया गया। टांडा के एक बुजुर्ग कारोबारी को सांस संबंधी पुरानी परेशानी थी। कुछ दिन पहले उसकी ये परेशानी काफी बढ़ गई थी तो उनके परिवारवालों ने उन्हें मुरादाबाद के एक निजी डॉक्टर के पास दिखाया था। डॉक्टर ने उनको टीएमयू मेडिकल कॉलेज जाने की सलाह दी।

जैसे ही कारोबारी वहां पहुंचे तो उन्हें डॉक्टरों ने वहां शुक्रवार को ऐड्मिट कर लिया था। कोरोना जैसे लक्षण लेकर उनके सैंपल भी जांच को भेज दिए थे। तो वहीं इलाज के समय उनकी रविवार की रात मौत हो गई। उस समय उनकी कोरोना की रिपोर्ट नहीं आई थी, फिर भी उनके परिवार वालों को शव नहीं सौंपा गया। लेकिन सोमवार की रात जब उनकी रिपोर्ट आई तो उसमें वो कोरोना पॉजिटिव पाए गए।

रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद से ही कारोबारी के शव को स्वास्थ मंत्रालाए के गाइड लाइन के मुताबिक उनके घर नगर भेजे जाने की कवायद शुरू की गई। स्वास्थ मंत्रालाए की गाइड लाइन के मुताबिक एंबुलेंस मंगा ली गई, दूसरी व्यवस्था भी कर ली गई।

सीमा विवाद पर उलझा रहा प्रशासन

उसके बाद में मुरादाबाद के अधिकारियों ने यह कहना शुरू कर दिया कि, रामपुर की पुलिस आई एंबुलेंस को अपनी सुरक्षा में ले जाए। रामपुर की पुलिस कहने लगी कि हम वहां पर क्यों आएं, आप हमारे जिले की सीमा तक एंबुलेंस को छोड़कर जाइए, इसके बाद हमारी जिम्मेदारी। इस बात को लेकर दिन भर विवाद चलता ही रहा है। मंगलवार को इसी बात पर सहमति भी बनी। जिसके बाद मुरादाबाद की पुलिस रामपुर की सीमा तक एंबुलेंस को छोड़ कर गई और इसके बाद रामपुर की पुलिस उसे टांडा तक लेकर आई।

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आंजनेय कुमार सिंह, जिला अधिकारी, रामपुर

इस मामले में लिखा-पढ़ी और सीमा विवाद का तो मतलब ही नहीं बनता है। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस तो यही कहती है कि जिस जनपद के अंदर जो मामला मिलेगा, जिम्मेदारी उसी की होगी। चाहे व्यक्ति कहीं का भी रहने वाला हो। सबको इसी गाइडलाइन पर अमल करना चाहिए।-

राकेश कुमार सिंह, जिला अधिकारी, मुरादाबाद

मुरादाबाद से शव वाहन से शव भेजा गया है। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार कारोबारी की मौत मुरादाबाद जिले से जुड़ेगी। जिस जिले का मृतक होगा वहां के अधिकारी को नामित किया जाना था।  गाइडलाइन का पालन करते हुए अपनी एंबुलेंस से शव को रामपुर सीमा तक भिजवाया। मृतक के बेटों को भी एंबुलेंस मुहैया कराई गई।

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