बीएचयू के इस परिसर में लगता है पक्षियों का मेला, 40 से ज्यादा प्रजातियां है मौजूद

विंध्यपर्वत एक सिद्धपीठ अनेकों रहस्यों को समेटे हुए है। विंध्यपर्वत रहस्य के साथ साथ प्रकृति की अलौकिक छटा का दृश्य अनोखी पहाड़ियो के बीच स्थित राजीव…

Published by Deepak Raj Published: February 21, 2020 | 8:45 pm
Modified: February 21, 2020 | 9:23 pm

बृजेन्द्र दुबे

मिर्जापुर। विंध्यपर्वत एक सिद्धपीठ अनेकों रहस्यों को समेटे हुए है। विंध्यपर्वत रहस्य के साथ साथ प्रकृति की अलौकिक छटा का दृश्य अनोखी पहाड़ियो के बीच स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर जिसे बीएचयू कहा जाता है। इस परिसर में प्रकृति की अद्भुत सुंदरता के नजारे देखने को मिलती है।

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यह परिसर बरकच्छा की पहाड़ियों पर स्थित है। यह परिसर पहाड़ियों के ऊपर बना है जहाँ पहले पानी का मिलना मुश्किल ही नही नामुमकिन था लेकिन राजीव गांधी दक्षिणी परिसर ने पहाड़ो के ऊपर पानी सोध कर खोज निकाला।

40 पक्षियों की प्रजातियों ने परिसर मे अपना डेरा जमा लिया है

पानी का लेवल हमेशा बनाये रखे इसके लिए परिसर के अंदर छोटे-छोटे चेक डैम बनाकर इसकी सुंदरता में चार चांद लगा दिए है। आज यही चेक डैम छोटे छोटे झील का रूप ले चुके है। इसलिए यहां 40 पक्षियों की प्रजातियों ने परिसर मे अपना डेरा जमा लिया है।

 

पक्षियों के बारे में जनसंचार के छात्र राहुल सिंह कुशवाहा की एक खोज

राहुल सिंह कुशवाहा अपने सर्वेक्षण में करीब 40 से अधिक पक्षियों के बारे में जानकारी इकट्ठा किये है। जिनमे करीब 10 से ज्यादा जलीय पक्षी शामिल है जो इस परिसर के अंदर बने झील के किनारे देखे गए है। राहुल देशबन्धु कालेज दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राणी विज्ञान के स्नातक के छात्र रह चुके है। इसलिए इनको पक्षियों से काफी लगाव है।

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राहुल फोटोग्राफी का भी शौक रखते हैं। राहुल बताते है कि वह इस परिसर में पत्रकारिता के छात्र बनकर आये लेकिन जब उनकी नजर इस प्रकृति की छटाओं में वन्य जीवोँ पर पड़ी तो वह चुपके से बिना किसी को बताए उन अलौकिक जो अपने आप मे एक रहस्य और अद्भुत पक्षियों के रूप में उनकी तस्वीरों को अपने कैमरे में कैद करते और उन पक्षियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करते गए।

इस परिसर में मिली किंगफिशर की दो अद्भुत प्रजातीयाँ जो पेड़ो पर रहती है

जब उन्होंने अध्यन किया इन पक्षियों के बारे में तो बताया कि व्हाइट थ्रोटेड किंगफिशर,पाईड किंगफिशर यह झील के किनारे पायी जाती है इनका मुख्य भोजन मछलियां होती है इनकी कुल आयु पांच साल की है। कोयल की भी दो प्रजातियां मिली है जिनमे ग्रेटर कोयल, एशियन कोयल मौजूद है।

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परिसर में काफी संख्या में रेड वेंटेड बुलबुल,पर्पल सनबर्ड, बया, लाल मुनिया, इंडियन रॉबिन ,रफोस ट्रीपाई , इंडियन पीफाउल ,धनेश ग्रे हॉर्नबिल जैसी पक्षियां डूबते सूरज की लाल रोशनी में इंद्रधनुष की मनमोहक दृश्य के साथ पक्षियों का चहचहाना उड़ते हुए जाना फिर किसी पेड़ की डाली पर बैठ कर उसके बीज और फल से अपने पेट भरना बेजुबान पक्षी इस परिसर के मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

जलीय पक्षियों की सुंदरता ने परिसर को बनाया आकर्षण का केंद्र

प्राकृतिक छटाओं के बीच राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में मनमोहक पक्षियों के झुंड जो झील के अंदर बैठ कर मछलियों को अपने चोंच से चुगते है यह दृश्य बहुत मनमोहक लगता है राहुल ने बताया कि इस परिसर में जलीय पक्षी भी आकर्षण का केंद्र है जिसमें रेड वॉटल्ड लापविंग, ओरिएंटल दार्टर पनवा, इंडियन कॉर्मोरांट, पाइड स्टिल्ट, प्लोवर्स, लिटल स्टिंट ,विसलिंग डक ,पोंड हेरोंन ,एगरेट के अलावा इस परिसर में हाउस स्पैरो भी काफी संख्या में मौजूद है।

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जानकारी के लिए बतादु कि इनका नाम आईयूसीएन की रेड लिस्ट में आ गया है। लेकिन यहां पर इन पक्षियों के प्रजातियों की संख्या में कमी नहीं दिखती है जो ये दर्शाती है कि ये परिसर पक्षियों के लिए कितना उपयुक्त है।

पक्षियों की विलुप्त होती प्रजातियों को बचाने के लिए बनाया जाय पार्क

राहुल का कहना है कि पक्षियों के प्रजातियों को बचाने के लिए एक बायो डायवर्सिटी पार्क बनना चाहिए जहां पर विलुप्त होती प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

वन्य प्राणियों की तरफ काफी झुकाव खासकर के पक्षियों की तरफ राहुल का मानना है कि अगर इस परिसर के अंदर एक बायो डायवर्सिटी पार्क बना दिया जाए तो पक्षियों की ही नहीं और भी वन्य जीवो की संख्या में काफी इजाफा होगा जो यहां की प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ावा देगा।

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