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भूकंप के 8.0 तीव्रता का झटका झेल सकती हैं नोएडा में बन रही ये परियोजनाएं

शुक्रवार रात 1० बजकर 34 मिनट पर शहर में दो बार तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता काफी ज्यादा थी। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। बल्कि इससे पहले भी कई बार शहर में भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं।

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MonikaBy Monika

Published on 14 Feb 2021 1:56 PM GMT

भूकंप के 8.0 तीव्रता का झटका झेल सकती हैं नोएडा में बन रही ये परियोजनाएं
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भूकंप के 8.0 तीव्रता का झटका झेल सकती है शहर में बन रही परियोजनाएं
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नोएडा: शुक्रवार रात 1० बजकर 34 मिनट पर शहर में दो बार तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता काफी ज्यादा थी। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। बल्कि इससे पहले भी कई बार शहर में भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। ऐसे में यहा की परियोजनाएं भूकंप का कितना बड़ा झटका झेल सकती है यह भी महत्वपूर्ण है। हम आपको बता दे नोएडा भूकंप की दृष्टि से भले ही सिसमिक जोन-4 में आता हो। लेकिन यहा की परियोजनाओं का निर्माण सिसमिक जोन-5 के अनुसार किया जा रहा है।

एलिवेटड का निर्माण

यह 8.0 तक का झटका झेल सकती है। यह भी बता दे 7.० का झटका की ताकत 6.० से करीब 1० गुना और 8.० की ताकत 6.० से 1०० गुना ज्यादा होती है। वर्तमान में शहर में भंगेल, चिल्ला में एलिवेटड का निर्माण किया जा रहा है। पर्थला में तारों के कसे जाने वाला सिग्नेचर ब्रिज बनाया जा रहा है। इसके बाद हैबीटेट कंवेशन सेंटर का निर्माण भी जल्द शुरू होने जा रहा है। मास्टर प्लान-2०31 के अनुसार यहा की आबादी भी 3० लाख के आसपास हो जाएगी। यह वह परियोजना है जिन पर सर्वाधिक यातायात का भार होगा।

ऐसे में निर्माण के बाद यह कितना तेज भूकंप का झटका झेल सकते है इसकी जानकारी होना जरूरी है। प्राधिकरण ने दावा किया कि सिसमिक जोन-5 यानी बेहद संवेदशील या बहुत तेज झटका (7.० से 8.०) तक आने पर भी इन फ्लाईओवर व एलिवेटड पर असर नहीं होगा। हालांकि आशिंक नुकसान हो सकता है।

सिसमिक जोन-5 के अनुसार तैयार किया गया डिजाइन

प्राधिकरण ने बताया कि यहा परियोजनाओं का निर्माण में महत्वपूर्ण स्ट्रक्चर (डिजाइन) होता है। इसका बेस वाइब्रेशन झेलने के लिए तैयार किए जाते है। उसी आधार पर फाउंडेशन तैयार किया जाते है। जिन पर खंभो को खड़ा किया जाता है। इसे एडिशनल डिजाइन भी कहा जा सकता है। ताकि मूवमेंट होने पर इसके ऊपरी ढांचे पर असर न हो। इसमे स्टील का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में झटके आने के बाद भी इन परियोजनाओं पर असर नहीं दिखेगा।

आईआईटी रूढ़की से कराई जाती है जांच

विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होने के बाद इससे आईआईटी रूढ़की भेजा जाता है। यहा तमाम परिक्षण के बाद एक रिपोर्ट पर फाइनल मुहर लगाई जाती है। प्राधिकरण इस रिपोर्ट को आधार बनाकर ही शहर में तमाम परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है।

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कैसे आते है भूकंप कैसे जाता है मापा

मौसम विभाग के अनुसार बताया कि धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथो स्फेयर कहते हैं। ये 5० किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आना संभव है। ये प्लेट्स क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे आ जाती है। भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है।

-यहा बनाई जा रही परियोजनाएं सिसमिक जोन-5 के अनुसार बनाई जा रही है। यह भूकंप का तेज झटका (8.०) तक झेल सकता है।

राजीव त्यागी, मुख्य महाप्रबंधक नोएडा प्राधिकरण

-यह बन रही परियोजनाओं को एडिशनल डिजाइन के आधार पर तैयार किया जा रहा है, जो तेज बाइब्रेशन को झेल सकता है।

मुकेश वैश्य , वरिष्ठ प्रबंधक नोएडा प्राधिकरण

रिपोर्ट- दीपांकर जैन

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