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पर्सनल लॉ बोर्ड ने दिखाए तेवर तो मोहसिन रजा ने बैठक पर ही उठा दिए सवाल

लखनऊ । ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लखनऊ में आयोजित बैठक में शनिवार को साफ किया गया है कि अब बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद का समाधान बातचीत के रास्ते निकालने का दरवाजा बंद हो गया है। बोर्ड ने कहा है कि नवम्बर में इस विवाद का फैसला सुप्रीम कोर्ट से आने की उम्मीद है और बोर्ड ने वकीलों के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में जो दस्तावेज मुहैया कराए हैं, उसके आधार पर फैसला मुस्लिमों के पक्ष में आने की उम्मीद है। 

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 12 Oct 2019 3:31 PM GMT

पर्सनल लॉ बोर्ड ने दिखाए तेवर तो मोहसिन रजा ने बैठक पर ही उठा दिए सवाल
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लखनऊ । ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लखनऊ में आयोजित बैठक में शनिवार को साफ किया गया है कि अब बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद का समाधान बातचीत के रास्ते निकालने का दरवाजा बंद हो गया है। बोर्ड ने कहा है कि नवम्बर में इस विवाद का फैसला सुप्रीम कोर्ट से आने की उम्मीद है और बोर्ड ने वकीलों के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में जो दस्तावेज मुहैया कराए हैं, उसके आधार पर फैसला मुस्लिमों के पक्ष में आने की उम्मीद है। बोर्ड की बैठक में समान नागरिक संहिता का विरोध करने और तीन तलाक विधेयक के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का भी फैसला लिया गया है।

मदरसा नदवातुल उलेमा में हुई बैठक

लखनऊ स्थित मदरसा नदवातुल-उलेमा में आयोजित बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता मौलाना राबे हसनी नदवी ने की जबकि बैठक में महासचिव मौलाना वली रहमानी के साथ कार्यकारिणी के अधिकांश सदस्य भी मौजूद थे।बोर्ड की बैठक में सुप्रीम कोर्ट में चल रही बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद पर सुनवाई के सम्बंध में विस्तार से चर्चा की गई।

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विस्तार से पेश हुई रिपोर्ट

बैठक में पर्सनल लॉ बोर्ड की लीगल कमेटी ने अदालत में चल रहे मुकदमे के बारे में विस्तार से रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया है कि जो सबूत और दलीलें अदालत में पेश की गई हैं उसके मद्देनजर अदालत से इंसाफ की उम्मीद है। बोर्ड ने साफ किया कि अब बातचीत के जरिए इस मामले के हल का सारा रास्ता बंद हो चुका है। बोर्ड का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। ऐसी स्थिति में अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

बोर्ड का मत है कयामत तक मस्जिद ही रहती है जगह

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत में वकीलों के माध्यम से जो दस्तावेज और दलीलें पेश की गई है उसके मद्देनजर अदालत से इंसाफ की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में बोर्ड बाबरी मस्जिद की जगह को किसी भी हालत में हिंदू पक्ष को सौंपने के बारे में सोच भी नहीं सकता है। बोर्ड का यह भी स्पष्ट मत है कि जिस जगह एक बार मस्जिद बन जाती है वह जगह कयामत तक मस्जिद ही मानी जाती है।

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समान नागरिक संहिता से टकराव बढ़ेगा

पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में समान नागरिक संहिता पर भी बातचीत की गई। बैठक में कहा गया है कि समान नागरिक संहिता बनाने से संविधान में दिए गए धार्मिक आजादी के मौलिक अधिकार का हनन होता है। हमारे देश में बहुत सारे धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं और उनके अपने अपने पर्सनल लॉ हैं। ऐसी स्थिति में समान नागरिक संहिता बनाने से आपस में टकराव बढ़ेगा। बैठक में तीन तलाक विधेयक को अदालत में चैलेंज करने का भी फैसला लिया गया है।

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मोहसिन रजा ने बैठक पर उठाये सवाल, कहा- इनको कौन कर रहा फंडिंग

योगी सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने नदवा कॉलेज में चल रही ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक का विरोध किया है। उन्होंने यह कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मुद्दे पर सुनवाई हो रही है और जल्द ही फैसला आने वाला है। अब इस विषय पर यह बैठक का क्या औचित्य है। इसका जवाब आयोजन स्थल नदवा कॉलेज और लॉ बोर्ड को देना चाहिए। यह एनजीओ हमेशा देश के खिलाफ रहा है।

बोर्ड असंवैधानिक एनजीओ

मोहसिन रजा ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक असंवैधानिक एनजीओ है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा एनजीओ है, जो हमेशा से देश के खिलाफ काम करता और बोलता रहता है। इसने मुसलमानों को गुमराह करने का काम किया है। यह एनजीओ हमेशा से आतंकवाद का समर्थक रहा है। इसकी जांच करवाई जायेगी कि आखिरकार इसे फंडिंग कौन कर रहा है।

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