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गया जमाना पेट्रोल-डीजल कारों का...

अगर आप डीजल या पेट्रोल वाली कार, एसयूवी या अन्य कोई वाहन खरीदने की सोच रहे हैं तो इस पहलू को भी ध्यान में रखिएगा कि आपकी नई गाड़ी आपका साथ चंद बरस ही दे पाएगी।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 25 July 2019 1:11 PM GMT

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लखनऊ: अगर आप डीजल या पेट्रोल वाली कार, एसयूवी या अन्य कोई वाहन खरीदने की सोच रहे हैं तो इस पहलू को भी ध्यान में रखिएगा कि आपकी नई गाड़ी आपका साथ चंद बरस ही दे पाएगी।

कारण ये है कि देश में पेट्रोल-डीजल वाहनों का जमाना अब लदने वाला है। नया जमाना ‘ईवी’ यानी इलेक्ट्रिक वाहनों का है। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में यही होने वाला है।

मोदी सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में अपने गंभीर इरादे स्पष्टï कर चुकी है। इस बजट में तमाम रियायतों का एलान किया गया है और इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने का रोडमैप भी तैयार है।

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इलेक्ट्रिक वाहनों का हब बनाने में जुटी कम्पनियां

सरकार की मंशा को देखते हुए भारत की ऑटोमोबाइल व इस सेक्टर की अन्य कंपनियां अब देश को इलेक्ट्रिक वाहनों का हब बनाने में जुट गई हैं।

देश की दूसरी सबसे बड़ी कार कंपनी हुंडई मोटर की योजना भारतीय बाजार के लिए सस्ते इलेक्ट्रिक वाहन बनाने की है। इस योजना के तहत कंपनी लीथियम आयन बैटरी बनाने का प्लांट भी लगाने जा रही है।

ईवी की सप्लाई चेन बनाने के लिए हुंडई ने कई वेंडरों से बातचीत शुरू कर दी है। इसी तरह टाटा ग्रुप भी तैयारी कर कर रहा है। टाटा ग्रुप की टाटा मोटर्स, टाटा पावर और टाटा केमिकल ईवी के विभिन्न पहुलओं पर निवेश कर रहे हैं।

हाल ही में टाटा केमिकल लिमिटेड को गुजरात सरकार ने लीथियम आयन बैटरी बनाने का प्लांट लगाने के लिए जमीन एलॉट की है। टाटा पावर लिमिटेड ईवी चार्जिंग के क्षेत्र में उतरने की योजना बना रही है। जबकि टाटा मोटर्स ईवी के निर्माण के लिए अपनी जैगुआर लैंड रोवर यूनिट के साथ मिल कर काम कर रही है।

एमजी मोटर इंडिया जल्द उतारेगी इलेक्ट्रिक एसयूवी

देश के कार बाजार में नव आगंतुक ‘एमजी मोटर इंडिया लिमिटेड’ इसी साल इलेक्ट्रिक एसयूवी लॉंच करने जा रहा है। चीन की एसएआईसी मोटर कार्पोरेशन भारत में अपनी ईजेडएस एसयूवी बनाएगी।

इसके अलावा इस कंपनी ने देश के पांच शहरों में ५० किलोवाट के फास्ट चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए फिनलैंड की कंपनी ‘फोर्टम’ से करार किया है।

हीरो इलेक्ट्रिक कंपनी अपनी ईवी निर्माण क्षमता बढ़ा कर ५ लाख यूनिट प्रति वर्ष करने जा रही है। कंपनी ने भांप लिया है कि आने वाले समय में ईवी की मांग बहुत तेजी से बढऩे वाली है।

फिलहाल भारत में इलेक्ट्रिक वाहन के क्षेत्र में सबसे आगे महिन्द्रा एंड महिन्द्रा है। कंपनी ने ईवी बनाने के लिए 1 हजार करोड़ रुपए लगाए हैं। इसकी यूनिटें महाराष्ट्र व कर्नाटक में लग रही हैं।

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केंद्र ने राज्यों से कहा - ईवी को बढ़ावा दें

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बजट में ढेरों रियायतें देने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए अपने यहां ईको-फ्रेंडली वाहनों को बढ़ावा दें। सडक़ परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित राज्यों से कहा है कि वे ईवी को इन्सेंटिव प्रदान करें।

राज्यों से कहा गया है कि वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अधिक से अधिक ईवी शामिल करें। इस बारे में उठाए गए कदमों की रिपोर्ट राज्यों से 31 अगस्त तक मांगी गई है।

मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि ईवी के खरीदारों को फायदा पहुंचाने के लिए तभी बढ़ेंगे जब राज्यों को उन्हें सहूलियतें देनीं चाहिए। जैसे कि टोल टैक्स से छूट, मुफ्त पार्किंग, पार्किंग में प्राथमिकता, शहरों के भीड़ भाड़ वाले इलाकों में सिर्फ ईवी को ही जाने की अनुमति आदि उपाय।

राज्यों से कहा गया है कि वे ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए प्राथमिकता के आधार पर जमीनें दें। मॉल, हाउसिंग सोसायटी, ऑफिस कांप्लेक्स और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने की अनिवार्यता की जाए।

एक समस्या आदेशों के क्रियान्वयन की है। सडक़ परिवहन मंत्रालय ने अक्टूबर 2018 में इलेक्ट्रिक वाहनों को सवारी परिवहन परमिट से मुक्त कर दिया था लेकिन अधिकांश राज्यों ने यह आदेश लागू ही नहीं किया है।

मंत्रालय ने राज्यों से यह भी कहा है कि वे ईवी पर रोड टैक्स माफ करें या कम करें लेकिन कई राज्यों ने यह नियम भी लागू नहीं किया।

सब्सिडी की शर्त

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी सिर्फ कमर्शियल उपयोग के वाहनों पर दी जाएगी। व्यक्तिगत उपयोग के वाहनों पर कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी।

भारी उद्योग व लोक उपक्रम राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि पेरिस समझौते के तहत कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए भारत में समस्त वाहनों का इलेक्ट्रिफिकेशन जरूरी है।

सरकार का इरादा है कि वर्ष 2025-26 तक ४० फीसदी कमर्शियल चार पहिया वाहन इलेक्ट्रिक हो जाएं। इसी तरह 2026 तक 30 फीसदी इंटर सिटी बसें भी इलेक्ट्रिक हो जानी हैं।

ईवी चार्जिंग स्टेशन

मुम्बई स्थित कंपनी ‘वक्रांगी’ अपने ‘नेक्स्ट जेन वक्रांगी के जरिए देश भर में ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधा प्रदान करने जा रही है। देश में इस कंपनी के 3504 वक्रांगी केन्द्र हैं जिनमें ज्यादातर टियर टू व थ्री शहरों में हैं। कंपनी की योजना 2020-21 तक 75 हजार केंद्र स्थापित करने की है।

चीन को पीछे छोड़ा

भारत भले ही इलेक्ट्रिक कारों में दूसरे देशों से पीछे हो, लेकिन बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा की बदौलत उसने चीन को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक मौजूदा समय में भारत में करीब 15 लाख ई-रिक्शा चल रहे हैं, जो चीन में साल 2011 से अब तक बेची गई इलेक्ट्रिक कारों की संख्या से ज्यादा हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि हर महीने भारत में करीब 11,000 नए ई-रिक्शा सडक़ों पर उतारे जा रहे हैं।

समस्या बिजली की

एसोचैम और ‘अन्सर्ट्स एंड यंग’ के संयुक्त अध्ययन में कहा गया है कि साल 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से बिजली की मांग 69.6 अरब यूनिट पहुंचने का अनुमान है। आलोचकों का तर्क है कि भारत में 90 प्रतिशत बिजली का उत्पादन कोयले से होता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक कारों से प्रदूषण कम करने की बात बेईमानी लगती है।

नॉर्वे के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से कराए गए एक शोध के मुताबिक बिजली से चलने वाले वाहन पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से कहीं ज्यादा प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

अध्ययन में कहा गया है कि यदि बिजली उत्पादन के लिए कोयले का इस्तेमाल होता है, तो इससे निकलने वाली ग्रीन हाउस गैसें डीजल और पेट्रोल वाहनों की तुलना में कहीं ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं।

क्या होने वाला है

ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनेंस के विश्लेषण के अनुसार बीस साल के भीतर दुनिया में आधी कारें इलेक्ट्रिक होंगी।

वर्ष 2035 तक इलेक्ट्रिक कारों की सालाना बिक्री 4 करोड़ यूनिट हो जाने की संभावना है। ऑटो इंडस्ट्री का मानना है कि पारंपरिक कारों की वैश्विक बिक्री उच्चतम स्तर को छू चुकी है और अब इसे नीचे ही जाना है।

भारत में वर्ष 2023 तक सभी दुपहिया व तिपहिया वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन की योजना है। हुंडई मोटर ने ‘कोना’ मॉडल लांच किया है। ये कार एक बार की चार्जिंग में 452 किलोमीटर तक चलती है।

भारत में अभी इलेक्ट्रिक गाडिय़ों को चार्ज करने के लिए कुल 425 प्वाइंट बनाए गए हैं। सरकार 2022 तक इन प्वाइंट्स को 2,800 करने वाली है।

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