CAA पर बड़ा फैसला: एक्शन में राष्ट्रपति, मोदी-शाह हो गए भौचक्के!

नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है, वहीं अब प्रदर्शन की आग असम, पश्चिम बंगाल के साथ अब देश के कई राज्यों में इस कानून के खिलाफ उबाल देखने को मिल रहा है।

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है, वहीं अब प्रदर्शन की आग असम, पश्चिम बंगाल के साथ अब देश के कई राज्यों में इस कानून के खिलाफ उबाल देखने को मिल रहा है।

देश में बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है

दरअसल, नागरिकता विधेयक गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 9 दिसंबर, 2019 को लोकसभा में पेश किया गया और लोकसभा में 311 बनाम 80 वोटों से यह विधेयक पारित हो गया। 11 दिसंबर को इसे राज्यसभा में पेश किया गया जहां बिल के पक्ष में 125 और खिलाफ में 99 वोट पड़े। इस तरह से बिल पास हो गया। बिल को 12 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून बन गया है। जिसका देश में बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है।

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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक अब कानून बन गया है। लेकिन उसके बाद से देशभर बबाल मच गया है और साथ ही जगह जगह में इसका विरोध किया जा रहा है, इसके पहले वाले के कानून के मुताबिक किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल यहां रहना अनिवार्य था। इस नए कानून में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए इसे घटाकर छह साल कर दिया है।

राष्ट्रपति का बड़ा फैसला 

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर कांग्रेस की ओर से काफी आपत्ति जताई जा रही है। राहुल गांधी व पार्टी के अन्य सीनियर नेता इसे संविधान के साथ छेड़छाड़ करार दे रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ इस बिल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह ने जनता के हित के लिए उठाया गया कदम बताया है। वहीं, केंद्र सरकार राष्ट्रपति के इस कानून पर मुहर लगाने के फैसले को बड़ा फैसला बताया है।

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CAA को लेकर हुई हिंसा पर मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाला प्रतिनिधिनमंडल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने पहुंचा। सोनिया के अलावा इस डेलिगेशन में सीनियर कांग्रेसी नेता अहमद पटेल, एके एंटनी, पी चिदंबरम, टीआर बालू, SP नेता रामगोपाल यादव भी थे। इस दौरान नागरिकता कानून पर चर्चा भी हुई वहीं अब कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति अब इस मामले पर जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।