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यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री ने बताया, इतने करोड़ बच्चे अभी भी नहीं जाते स्कूल

उन्होंने बताया कि फोरम में दुनिया भर से आये शिक्षा मंत्रियों ने अपने-अपने देशों की शिक्षा व्यवस्था विशेषकर स्कूली शिक्षा की वर्तमान स्थिति और शिक्षा में आने वाली चुनौतियां तथा उन चुनौतियों के समाधान के लिए प्रयासों पर चर्चा की गयी।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 27 Jan 2020 4:06 PM GMT

यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री ने बताया, इतने करोड़ बच्चे अभी भी नहीं जाते स्कूल
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लखनऊ: लंदन में क्वीन एलीजाबेथ सेन्टर ब्रिटिश काउंसिल द्वारा आयोजित एजूकेशन वर्ड फोरम मे शामिल होकर वापस लौटे यूपी के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार डा. सतीश चन्द्र द्विवेदी ने बताया कि ब्रिटिश काउंसिल और ओईसीडी सहित विश्व की कई संस्थाओं और, माइक्रोंसाफ्ट तथा गूगल जैसी बड़ी कम्पनियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की है।

विधान भवन में सोमवार को अपने अनुभव को साझा करते हुए बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि विश्व के निम्न व माध्यम वर्ग आय वाले देशों में दस वर्ष की आयु के 53 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो पढ़ने-लिखने और समझने में पूरी तरह समर्थ नहीं हैं। इसी तरह पूरे विश्व में लगभग 26 करोड़ बच्चे और किशोर अभी भी स्कूल नहीं जाते हैं।

उन्होंने कहा कि संम्मेलन में विश्व के 150 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। फोरम में चर्चा का केन्द्र बिन्दु संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्य का चौथा बिन्दु था, जिसमें कहां गया है कि सन् 2030 तक सम्पूर्ण विश्व में सभी बालक एवं बालिकाओं को निःशुल्क समान और गुणवत्ता पूर्ण प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध करायी जायेगी।

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स्कूल में स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं में किया जाए विस्तार

उन्होंने बताया कि फोरम में दुनिया भर से आये शिक्षा मंत्रियों ने अपने-अपने देशों की शिक्षा व्यवस्था विशेषकर स्कूली शिक्षा की वर्तमान स्थिति और शिक्षा में आने वाली चुनौतियां तथा उन चुनौतियों के समाधान के लिए प्रयासों पर चर्चा की गयी। सभी इस बात पर सहमत थे, कि जो बच्चे अभी भी स्कूल से बाहर हैं उनकों स्कूल तक लाने का प्रयास किया जाए।

शिक्षण के स्तर में सुधार की आवश्यकता है। स्कूल में स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं में विस्तार किया जाय और शिक्षा के स्तर को गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ ही साथ रूचिकर बनाया जाय।

एजूकेशन वर्ल्ड फोरम में उन्होंने भारत में शिक्षा क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी, जिसमें कायाकल्प योजना, निशुल्क शिक्षा, शिक्षकों की ट्रेनिंग, स्कूलों में इंगलिश मीडियम की शिक्षा प्रदान करने, बालिकाओं की शिक्षा के लिये कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय सहित शिक्षा के क्षेत्र में उप्र. सरकार द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डा. द्विवेदी ने बताया कि सम्मेलन मेें आये विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश में करोड़ों बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये किये जा रहे प्रयासों की सराहना की गयी।

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