अयोध्या पर फैसले को लेकर आरएसएस अभी से गंभीर

देश के सबसे बड़े अयोध्या विवाद को लेकर आ रहे सुप्रीम कोर्ट के आ रहे फैसले को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अभी से बेहद गंभीर हो गया है।

Published by Roshni Khan Published: November 8, 2019 | 9:20 pm
Modified: November 8, 2019 | 10:32 pm
RSS के गढ़ में कांग्रेस का धमाल, बीजेपी का हुआ बहुत बुरा हाल

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श्रीधर अग्निहोत्री

लखनऊ: देश के सबसे बड़े अयोध्या विवाद को लेकर आ रहे सुप्रीम कोर्ट के आ रहे फैसले को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अभी से बेहद गंभीर हो गया है। संघ का मानना है कि कोर्ट का जो भी फैसला आए उसे समाज के सभी वर्गो को स्वीकार करना होगा। संघ चाहता है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद देश और प्रदेश का माहौल बेहतर बना रहे जिससे विश्व में भारत की एकता और अखण्डता की मिसाल दी जा सके। इसलिए इन दिनों संघ अपने आनुषागिंक संगठनों के साथ लगातार बैठके कर रहा है।

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बैठक में बुलाया गया अलग-अलग संगठनों को

इन बैठकों में संघ के स्वयंसेवकों के साथ-साथ भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि संगठनों के पदाधिकारियों को भी बुलाया जा रहा है। इन बैठकों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद न तो जुलूस निकाला जाए और न ही कही 2. कहीं भी नारेबाजी न हो। संगठन के पदाधिकारियों से कहा जा रहा है कि संगठनों के कार्यकर्ता फैसले के बाद कहीं भी मिष्ठान वितरण या आतिशबाजी न करें जिससे माहौल बिगडने की संभावना बने।

संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि इस विवाद पर आ रहे फैसले को लेकर हम सभी को संयम रखने की जरूरत है। किसी भी दशा में देश के माहौल का खराब नहीं होना चाहिए। इसलिए कार्यकर्ताओं को चेताया गया है कि किसी भी क्रिया की तुरंत प्रतिक्रिया करने से बचा जाए तथा .माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों पर नजर रखें। संघठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं और जनता को भी समझाएं।

केंद्र और प्रदेश में हैं भाजपा की सरकार

कार्यकर्ताओं से कहा गया कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। इस लिहाज से हमारी जिम्मेदारी अधिक बनती है। किसी भी दशा में कोई अप्रिय घटना नहीं होने देनी हैं। माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों से सावधान रहना है।

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संघ सूत्रों ने बताया कि आनुषागिंक संगठनों के सभी कार्यकर्ता अपना व्यवहार सामान्य रखकर देश की एकता और अखण्डता का पाठ पढाए जिससे लोग भ्रमित न हों और 5. फैसले को लेकर किसी तरह की बयानबाजी भी न की जाए। मोहल्ला स्तर पर बैठक करके कार्यकर्ताओं के साथ आम जनता को भी समझाएं कि किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं देनी है फिर चाहे फैसला मंदिर के हक में हो या न हो। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि जुलूस, आतिशबाजी या मिष्ठान वितरण जैसे आयोजन नहीं करने हैं। ऐसे किसी आयोजन का लाभ माहौल बिगाड़ने वाले भी ले सकते हैं। इसलिए हर स्थिति में धैर्य बनाए रखना है।