शाहगंज के विधायक शैलेंद्र यादव ललई: राजनीति में न आते, तो सेना में देश सेवा करते

नौकर शाह सत्ता धारी दल के जन प्रतिनिधि का पिछलग्गू होकर अपनी कुर्सी बचाने में लगा रहता है। यह सत्य है कि नौकर शाह किसी के खास नहीं है अवसर वादी होते हैं। आज के नौकर शाह सत्ता धारी दल के कार्यकर्ता बनने में जरा भी देर नहीं करते है। देश के लोकतांत्रिक स्वरूप को बचाये रखने के लिए जन प्रतिनिधि को सर्वोच्च अधिकार मिलना चाहिए।

Published by शैलेंद्र यादव ललई Published: August 21, 2020 | 9:12 pm
Modified: August 24, 2020 | 3:12 pm
शाहगंज के विधायक शैलेंद्र यादव ललई: राजनीति में न आते, तो सेना में देश सेवा करते

शाहगंज के विधायक शैलेंद्र यादव ललई: राजनीति में न आते, तो सेना में देश सेवा करते

कपिलदेव मौर्य

जौनपुरः जनपद के शाहगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व मंत्री सपा नेता शैलेन्द्र यादव ललई से राजनैतिक मुद्दों सहित अन्य तमाम बिन्दुओं पर “न्यूजट्रैक” ने बातचीत की। श्री यादव ने बड़ी बेबाकी के साथ सभी सवालों का जवाब देते हुए सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया।

राजनैतिक जीवन की शुरुआत की चर्चा करते हुए श्री यादव ने कहा, चूंकि हमारा परिवार राजनैतिक है, हमारे परिवार के लोग किसानी के साथ विधानसभा का चुनाव लड़ चुके थे और पंचायत की राजनीति में ब्लाक प्रमुख आदि पदों पर रहे हैं।

छात्र जीवन से राजनीति

विधायक बताते हैं अपने शैक्षिक जीवन में हमारा सम्पर्क केन्द्र की राजनीति करने वाले राजनैतिक स्व. चन्द्रजीत यादव से हो गया। सन् 1985 में युवा लोकदल की प्रदेश कार्यकारिणी में रखा गया, सन् 1991 में प्रदेश महासचिव बना दिया गया, पहला विधानसभा का चुनाव सन् 1993 में खुटहन विधानसभा क्षेत्र से लड़ा, हार गया।

इसके बाद 2002 में बसपा के टिकट पर खुटहन विधानसभा से चुनाव मैदान में आया और जनता ने विधानसभा का सदस्य बनाते हुए विधानसभा में पहुंचा दिया।

शाहगंज के विधायक शैलेंद्र यादव ललई: राजनीति में न आते, तो सेना में देश सेवा करते

2003 में दो तिहाई विधायकों के साथ बसपा से अलग हुए और बाद में सपा मे शामिल हो गये। आज तक सपा के बैनर तले राजनीति कर रहे हैं और क्षेत्र की जनता हमें लगातार विधानसभा भेज रही है। वर्तमान समय में चौथी बार बतौर विधायक जनता की सेवा में लगा हूँ।

राजनीति में न आने की दशा में जवाब देते हुए श्री यादव ने कहा कि हम किसान के पुत्र हैं। शिक्षा काल से इच्छा थी, राजनीति में न आते तो देश की सेवा के लिए सेना में चले जाते।

इसी को लक्ष्य बना कर हमने विद्यार्थी जीवन काल में एनसीसी की शिक्षा ग्रहण की थी।

सबकुछ महंगा हो रहा है, चुनाव भी

चुनाव को महंगा होने के सन्दर्भ में शैलेंद्र यादव ललई ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए जिन चीजों का उपयोग जैसे ईंधन, किराया आदि महंगा होता जा रहा है इसका असर चुनाव पर पड़ता है। हालांकि हमारे कार्यकर्ता गण अपने खर्चे से हमारा चुनाव लड़ते हैं इसका मुझे गर्व है।

चुनाव सुधार के सवाल पर कहा कि आज भी सुधार की बड़ी गुन्जाइश है। आयोग को बैलेट पेपर से चुनाव करना चाहिए ताकि मतदाता जान सके वह किसे अपना मत दे रहा है। साथ ही यह भी कहा कि जब पंचायत का चुनाव बैलेट पेपर पर हो सकता है तो लोकसभा, विधानसभा का क्यों नहीं।

जनता की अपेक्षाओं के सवाल पर खुल कर कहा कि जनता अपना जन प्रतिनिधि जिसे चुनती है उससे अपेक्षा रखना चाहिए। जन प्रतिनिधि को भी अपने क्षेत्र को अपना परिवार समझ कर जनता के साथ रहना चाहिए।

शाहगंज के विधायक शैलेंद्र यादव ललई: राजनीति में न आते, तो सेना में देश सेवा करते

सरकार को भी चाहिए कि वह सभी जन प्रतिनिधियों के साथ एक समान कार्य करे ताकि जनता का हित जन प्रतिनिधि करा सके।

सपा के शासन काल में ऐसा होता रहा लेकिन वर्तमान सरकार के शासन काल में सत्ता धारी दल के जन प्रतिनिधि के प्रस्ताव पर धन दिया जा रहा है। विपक्ष के जन प्रतिनिधि के प्रस्ताव पर कोई बजट नहीं ऐसे भेद भाव से जनता का अहित हो रहा है।

बेबस की मदद से खुशी

राजनीति में खुशी तब अधिक मिलती है जब मै किसी गरीब लाचार बेबस की मदद करता हूँ दूसरा जब विधानसभा क्षेत्र की गम्भीर समस्या का निराकरण कर लेता हूँ तो खुशी मिलती है। विधानसभा क्षेत्र हमारा परिवार है उसकी खुशहाली से खुशी मिलती है।

राजनीति करने से जो समय मिलता है उसमें आध्यात्मिक पुस्तकें पढ़ने का शौक है। राजनीति में जिस तरह के बदलाव की चर्चा कर रहे हैं वह जनता के साथ धोखा है।

गांधी लोहिया का जो सपना था जनता के मौलिक अधिकारों के प्रति आज उसके साथ वर्तमान सरकार अन्याय कर रही है।

श्री यादव का मानना है कि आन्तरिक लोकतंत्र केवल सपा में है यहाँ पर हर कार्यकर्ता अपने राष्ट्रीय नेता से अपनी बात कर सकता है वहीं अन्य दूसरे दलों में यह संभव नहीं है।

विकास की चर्चा

विधायक ने कहा कि अपने राजनैतिक जीवन के शुरूआत में जब पहली बार खुटहन से विधायक बना तो बदलापुर में बिजली की घोर समस्या थी।

132 के बी ए का विद्युत सब स्टेशन बनवा कर समस्या का निराकरण किया था। सड़कों का जाल बिछा दिया था।

2012 से 2017तक सपा की सरकार थी और हम बिजली राज्य मंत्री बने थे तब हमने शाहगंज ही नहीं पूरे जनपद की विद्युत समस्या को दूर करने का काम किया।

शाहगंज के विधायक शैलेंद्र यादव ललई: राजनीति में न आते, तो सेना में देश सेवा करते

सपा शासन काल में हमारे द्वारा स्वीकृत 175करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले 400 केवीए  का विद्युत स्टेशन मछली शहर तहसील क्षेत्र के कटाहित खास गांव में बन रहा है इसे बन जाने से जिले की बिजली की समस्या दूर हो जायेगी।

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हमने 35 करोड़ रुपए की लागत से अन्डर ग्राउंड विद्युत वायर बिछवाये है। अपने शाहगंज विधानसभा क्षेत्र में भी विद्युत सुधार का बड़ा काम किया है।

इसके अलावा सड़क पुल पुलिया आदि का जाल बिछा दिया है। लगातार क्षेत्र के गरीबों के इलाज हेतु विधायक निधि से 25 लाख रुपये प्रति वर्ष दे रहा हूँ।

शाहगंज से होकर इलाहाबाद जाने वाले मार्ग को 115 करोड़ रुपए की लागत से बनवाया है इससे कई विधानसभा को लाभ हुआ है। लुम्बिनी-दुद्धी मार्ग पर धन देकर बनवाने का काम किया है। शाहगंज के तमाम गांव लोहिया और जनेश्वर मिश्र गांव घोषित कर विकसित करा दिये हैं।

भाजपा ने काम नहीं कराया नाम बदल दिया

उन्होंने कहा कि शाहगंज चार जनपदों की सीमा पर स्थित है यहाँ पर एक पुरुष एवं एक महिला बड़े अस्पताल की आवश्यकता है ताकि क्षेत्र सहित आस पास जिलों के मरीजों को उपचार में सुविधा मिल सके। सपा की सरकार बनी तो यह काम जरूर किया जायेगा।

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जिले में सपा शासन काल में शिलान्यास किये गये राजकीय मेडिकल कॉलेज की चर्चा करते हुए कहा कि यह कालेज सपा ने बनाने का निर्णय लिया और बजट देकर शिलान्यास कर दिया संयोग था कि 2017 में प्रदेश के अन्दर भाजपा की सरकार बन गयी।

भाजपा सरकार ने बदले की भावना से मेडिकल कॉलेज में एक ईट तक रखने का काम नहीं किया। अगर मेडिकल कॉलेज बन गया होता तो कोरोना संक्रमण काल में मरीजों के उपचार में बड़ा सहायक साबित होता। भाजपा सरकार ने काम तो नहीं कराया लेकिन नाम जरूर बदल दिया वह भी जातिवाद से ग्रसित हो कर, कहा कि सपा की सरकार बनने पर पहली कैबिनेट की बैठक इसका नाम बदलते हुए प्राथमिकता के आधार पर मेडिकल कॉलेज बनाने का काम किया जायेगा।

नौकरशाह अवसरवादी

पूर्व मंत्री ने कहा कि आज के नौकर शाह संविधान निर्माताओं की सोच को दफ़न कर खुद को राजा समझने लगे हैं उन्हें यह जानना चाहिए कि उनको जो वेतन मिलता वह जनता के टैक्स की धनराशि से मिलता है।

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