सुनें किसानों का दर्द, नहीं है इनको सरकार की इन योजनाओं की जानकारी

किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने मीडिया के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। जिसमे उन्होंने पहले तो साफ कर दिया कि वह पीएम मोदी और सीएम योगी से बहुत उम्मीदे लगाएं है। उनकी योजनाएं भी काफी लोभकारी है। लेकिन ऐसी योजनाओं का क्या फायदा जिनके बारे मे गरीब किसान जानता ही नही है।

Published by SK Gautam Published: July 18, 2019 | 5:38 pm
Modified: July 18, 2019 | 5:39 pm

शाहजहांपुर: यूपी के शाहजहांपुर किसानों की समस्याओं को लेकर क्षेत्रीय किसान यूनियन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गरीब और परेशान किसानों के दर्द के बारे में बताया। उनका कहना है कि पीएम 2022 तक किसानों की आये दोगुनी कर देंगे। लेकिन जब तक किसानों की समस्याओं को दूर नही किया जाएगा तब तक आये दोगुनी और खुशहाल किसान नही हो सकता है। इसलिए किसानों ने पीएम मोदी से काफी उम्मीदें लगाई है।

उन उम्मीदों तोड़ा तो किसान खुद को बहुत ठगा महसूस करेगा। उन्होंने पीएम और सीएम से गुहार लगाई है कि हमारी मांगो पर जल्द विचार करें।

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किसानों ने पीएम मोदी और सीएम योगी से बहुत उम्मीदे लगाएं है

दरअसल क्षेत्र किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने मीडिया के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। जिसमे उन्होंने पहले तो साफ कर दिया कि वह पीएम मोदी और सीएम योगी से बहुत उम्मीदे लगाएं है। उनकी योजनाएं भी काफी लोभकारी है। लेकिन ऐसी योजनाओं का क्या फायदा जिनके बारे मे गरीब किसान जानता ही नही है।

किसान को अगर फसल तैयार करने के लिए खेती के लिए कुछ सामान चाहिए होता है तो पहले किसान अपनी जेब से पैसा खर्च करें उसके बाद सरकार पैसा देती है। इसलिए किसान पिछड़ता जा रहा है।

गरीब किसान के पास इतना पैसा नही है कि वह फसल को तैयार कर सरकार को उनके दामों पर बेच सके। यही कारण है कि किसानों को बिचौलियों के बीच जाकर कम दामों मे नगद फसल को बेचना पङता है। जब तक ये परेशानी सरकार दूर नही करेगी तब तक किसान खुशहाल नही हो सकता है।

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वर्ष 2018-19 की धान क्रय नीती के अंतर्गत धान क्रय मे अनुबंध की 100 कुंटल की छूट दी गई थी

किसान मुकेश सिंह का कहना है कि छोटे गरीब किसान पटके पर जमीन लेते है। और जब मेहनत करके फसल को तैयार करके क्रय केंद्रों पर लेकर जाते है। तब वहां पर लिया नही जाता है। इसलिए दलालों से संपर्क करना पङता है। इस पर सरकार ध्यान दें। वर्ष 2018-19 की धान क्रय नीती के अंतर्गत धान क्रय मे अनुबंध की 100 कुंटल की छूट दी गई थी। उसको बढ़ाकर 200 कुंटल करने की व्यवस्था भी क्रय नीती मे शामिल किया जाए।

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