सोनभद्र कांड: जमीन में फर्जीवाड़ा की जांच करने एसआईटी पहुंची उम्भा गांव

उम्भा गांव में 17 जुलाई को जमीन के एक पुराने विवाद में 10 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस घटना में 28 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में अब तक 38 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 61 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है।

Published by SK Gautam Published: August 6, 2019 | 7:36 pm
Modified: August 6, 2019 | 7:38 pm

लखनऊ: सोनभद्र के उम्भा गांव में हुए नरसंहार और जमीन की फर्जीवाड़ा की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एसआईटी मंगलवार को गांव पहुंचकर जांच शुरू कर दी। डीआईजी जे. रविन्दर गौड़ की अध्यक्षता में एसआईटी की पांच सदस्यों वाली टीम बनाई गई है। इस टीम में डीआईजी के अलावा एएसपी, एक इंस्पेक्टर और दो सहायक विवेचक हैं।

61 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है

उम्भा गांव में 17 जुलाई को जमीन के एक पुराने विवाद में 10 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस घटना में 28 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में अब तक 38 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 61 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है।

विवादित जमीन आदर्श सोसाइटी से आरोपी ग्राम प्रधान यज्ञदत्त ने कुछ ज़मीन खरीदी थी। इस पर कब्ज़े के लिए उसके तीन सौ समर्थक हथियार लेकर 17 जुलाई को उम्भा गांव पहुंचे थे। जब गांव वालों ने विरोध किया तो प्रधान के समर्थकों ने फ़ायरिंग कर दी।

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जमीन की खरोद-परोख्त सहित पूरे घटना के कारणों की जांच के लिए बनी कमिटी ने अपनी रिपोर्ट शनिवार को मुख्यमंत्री को सौंप दी थी। कमेटी को बड़े पैमाने पर अनियमितता मिली है। इस कारण उसने पूरे मामले की एसआईटी जांच की सिफारिश की। इसके बाद ही सीएम ने डीआईजी जे रविदर गौड़ के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी।

कमेटी को तीन माह में अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश

मंगलवार को कमेटी के सदस्य गांव में पहुंचकर लोगों से बातचीत की। यह कमेटी वहां जमीन के खरीद-फरोख्त में अनियमितताओं की जांच पूरा विस्तार से करेगी। इस कमेटी को तीन माह में अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। सीएम ने कहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर जमीन में अनियमितता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

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इससे पूर्व बनाई गयी कमेटी ने सीएम को 1000 पन्नों की रिपोर्ट शनिवार को सौंपी थी। रिपोर्ट के अनुसार जमीन के पट्टे से लेकर रजिस्ट्री तक गड़बड़ियां की गई हैं। इसमें वन, पुलिस, राजस्व, सहकारिता व प्रशासन के 15 से अधिक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। इन लोगों ने या तो अपनी जिम्मेदारी का पालन नहीं किया या कई जगह खुद अनियमितता में शामिल रहे।

कमेटी को जांच में कई राजनीतिक रसूखदारों की भूमिका संदिग्ध मिली है और इनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। गलतियों व मिलीभगत का सिलसिला केवल जमीन आवंटन तक नहीं रहा। इस मामले में स्थानीय ग्रामीणों की ओर से बार- बार की गई शिकायतों को जानबूझकर नजरंदाज किया गया।

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