बाप रे बाप! जब्त हुई ढ़ाई लाख किलो मिलावटी मिठाई, खाते तो हो सकती थी मौत

अभियान के दौरान कुल 6430 निरीक्षण, 2553 छापे, 3008 नमूने संग्रहीत किये गये। जब्त व नष्ट की गयी सामग्री की मात्रा 2.48 लाख किलो है और उसका अनुमानित मूल्य 3 करोड़ 29 लाख रूपये है। उन्होंने बताया कि जब्त किये गये सामान में मुख्यतः खाद्य तेल व मिठाईयां थी।

लखनऊ: दीपावली का त्यौहार तो बीत गया और इस दौरान आपने जमकर पकवान और मिठाई भी खाई लेकिन क्या आप जानते है कि इस दीपावली में यूपी में महज 10 दिनों में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने ढ़ाई लाख किलों की मिलावटी मिठाई, मिल्क प्रोडेक्ट और खाद्य पदार्थ जब्त व नष्ट किए गये है।

जब्त की गयी इस खाद्य सामाग्री का अनुमानित मूल्य तीन करोड़ 29 लाख रुपये बताया जा रहा है। खास बात यह है विभाग द्वारा लिए गये खाद्य पदार्थो के नमूनों में केवल 35 प्रतिशत ही मानकों पर खरे उतर पाए।

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दीपावली से 10 दिन पूर्व बीती 17 अक्टूबर से विस्तृत अभियान शुरू किया गया

अपर मुख्य सचिव, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग डा. अनिता भटनागर जैन ने सोमवार को बताया कि दीपावली के पर्व में दुग्ध उत्पाद, मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थो की मांग में अत्याधिक बढ़ोत्तरी होने के कारण उनमें मिलावट की सम्भावना को देखते हुए दीपावली से 10 दिन पूर्व बीती 17 अक्टूबर से विस्तृत अभियान शुरू किया गया, जो 26 अक्टूबर तक चलाया गया। अभियान में खोया, दूध एवं दुग्ध पदार्थ से निर्मित मिठाईयाँ एवं सोनपापड़ी, खाद्य तेल, वनस्पति एवं घी, रंगीन चीनी के खिलौने तथा नमकीन समेत सात श्रेणी में जिलेवार दैनिक समीक्षा शासन स्तर पर की गयी।

अभियान के दौरान कुल 6430 निरीक्षण, 2553 छापे, 3008 नमूने संग्रहीत किये गये। जब्त व नष्ट की गयी सामग्री की मात्रा 2.48 लाख किलो है और उसका अनुमानित मूल्य 3 करोड़ 29 लाख रूपये है। उन्होंने बताया कि जब्त किये गये सामान में मुख्यतः खाद्य तेल व मिठाईयां थी।

एकत्रित किये गये नमूने  गोपनीय रूप से आवंटित प्रयोगशालाओं को भेजे गये

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डा. भटनागर ने बताया कि अभियान के दौरान विभिन्न खाद्य पदार्थो के एकत्रित किये गये नमूने हर दिन विशेष वाहक के जरिए गोपनीय रूप से आवंटित प्रयोगशालाओं को भेजे गये। लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर, झांसी, वाराणसी व आगरा, समस्त प्रयोगशालाओं की दैनिक विश्लेषण की समीक्षा भी शासन स्तर पर की जाती है।

अब तक विश्लेषित सैम्पल के आधार पर 7.5 प्रतिशत असुरक्षित, 40.5 प्रतिशत अधोमानक, 17 प्रतिशत मिसब्राण्डेड व 35 प्रतिशत मानकानुसार पाये गये हैं। विश्लेषित खाद्य पदार्थो में सर्वाधिक मानकानुसार तेल 49.5 प्रतिशत, दूध 48.7 प्रतिशत तथा मिठाईयाँ 41 प्रतिशत पाये गये हैं।

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विभिन्न खाद्य पदार्थो में मिसब्राडिंग में बैच नम्बर का न होना, पैकेजिंग तिथि का न होना, निर्माता का पूरा पता न होना और किस अवधि तक खाद्य पदार्थ का उपयोग किया जा सकता है यह इंगित न होना आदि कारण रहे जो कि सर्वाधिक 77.8 प्रतिशत विश्लेषित नमकीन के नमूनों में रहे जबकि दुग्ध व दुग्ध पदार्थ में मिसब्राडिंग नहीं थी।

अधोमानक में 72 प्रतिशत में दुग्ध पदार्थ व 48.7 प्रतिशत में दूध के नमूने रहे। असुरक्षित श्रेणी में 18 प्रतिशत अन्य खाद्य पदार्थ, 10 प्रतिशत मिठाई में रहा जबकि अन्य खाद्य पदार्थो में यह 2 से 4 प्रतिशत के मध्य रहा।

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दुग्ध पदार्थो में दूध फैट के अलावा अन्य स्रोत का फैट होना या डिटरजेन्ट होना

उन्होंने बताया कि विश्लेषित खाद्य पदार्थो के असुरक्षित होने का कारण दुग्ध पदार्थो में दूध फैट के अलावा अन्य स्रोत का फैट होना या डिटरजेन्ट होना, मिठाइयों में दुग्ध स्रोत के अलावा अन्य फैट होना व अनुमन्य रंग न होना। नमकीन में मुख्यतः अन्य रंग का न होना या अत्यधिक रंग का उपयोग होना।

तेल, वनस्पति, घी आदि में सिन्थेटिक रंग होना अथवा अनुमन्य रंग का न होना मुख्य कारण थे। डा. जैन ने कहा कि जो भी विश्लेषित खाद्य पदार्थ मानकानुसार नहीं पाये गये उनमें सभी सम्बन्धित के विरूद्व खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कठोर कार्यवाही की जायेगी।