योगी सरकार में बिना जूट के बोरे के रहने को मजबूर हैं गोवंश

गोवंश केन्द्रों पर गोवंशो की हो रही मौत

अंबेडकरनगर । गोवंश आश्रय स्थलों पर गोवंशो के रहन- सहन, खान- पान व अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिलाधिकारी द्वारा अधिकारियों को कितने भी निर्देश दिये जाते रहे हों लेकिन यह निर्देश हकीकत में नही बदल पा रहे हैं।

गोवंश केन्द्रों पर गोवंशो की हो रही मौतों से गोवंशों की सुरक्षा को लेकर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। पहले जलालपुर विकास खण्ड के रतना, अकबरपुर विकास खण्ड के सिसवा गोवंश आश्रय स्थलों पर गोवंशो की मौत से प्रशासन निपट ही रहा था, इसी बीच कटेहरी विकास खण्ड के गोवंश आश्रय स्थल टीकमपारा से भी जिला प्रशासन के लिए बुरी खबर है।

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दो गोवंशो की फिर हुई मौत

इस अत्याधुनिक व लाखों की लागत से बने गोवंश आश्रय स्थल पर हो रही गोवंशो की मौत से प्रशासन कटघरे में आ गया है। गुरूवार को यहां पर दो गोवंशो की फिर मौत हो गई। जिलाधिकारी ने सभी गोवंश आश्रय स्थलों पर जूट के बोरे भेजने का निर्देश दिया था जिससे गायों को ठंड से बचाया जा सके लेकिन टीकमपारा में अभी भी गोवंश बिना बोरे के देखे जा सकते हैं।

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गोवंशो के अवशेष इस केन्द्र की हकीकत को बयां कर रहे हैं

यहां आस-पास बिखरे गोवंशो के अवशेष इस केन्द्र की हकीकत को बयां कर रहे हैं। जिस गड्ढे में गोवंशो को दफनाया गया है, वह खुले हुए थे। साफ है कि यहां पर अव्यवस्थाओं के बीच गोवंशो को रखा जा रहा है। गोवंशो की हो रही मौतों के पीछे ठंड को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। पशुधन प्रसार अधिकारी गुलाब सिंह ने स्वीकार किया कि दो गोवंशो की मौत हुई है।

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उन्होनें कहा कि किसी की शिकायत के बाद ही पोस्टमार्टम कराये जाने का प्रावधान है। वहीं दूसरी तरफ इस गौशाला में गोवंशो की चिकित्सा व्यवस्था के लिए सम्बद्ध किये गये डॅा. एसके तिवारी को भी गोवंशो की मौत की कोई जानकारी नही थी।