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यूपी के इस प्रसिद्द संगीतकार का निधन, अनूप जलोटा भी छूते थे पैर

मंडली महराज ढोलक और हारमोनियम के जादूगर वादक थे। वह साधारण परिवार से होते हुए भी असाधारण प्रतिभावान थे और देश प्रदेश में अपनी कला से विख्यात थे।

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 3 May 2020 1:53 PM GMT

यूपी के इस प्रसिद्द संगीतकार का निधन, अनूप जलोटा भी छूते थे पैर
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गोंडा। देश प्रदेश में भारतीय संगीत के अमिट हस्ताक्षर और सादगी के प्रतिमूर्ति हारमोनियम के जादूगर मण्डली महाराज का निधन 80 वर्ष की अवस्था में रविवार को हो गया। वह काफी दिनों से लीवर और गठिया की बीमारी से पीड़ित थे। उनके निधन से मंडल का संगीत स्तब्घ और काफी आहत है। वह ढोलक और हारमोनियम के जादूगर वादक थे। वह साधारण परिवार से होते हुए भी असाधारण प्रतिभावान थे और देवी पाटन मंडल ही नहीं, देश प्रदेश में अपनी कला से विख्यात थे। लाकडाउन के बीच मुख्यालय के करीब उनके पैतृक गांव में तमाम संगीत प्रेमियों के मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

गूदड़ महाराज ने बनाया ढोलक और हारमोनियम का उस्ताद

जिला मुख्यालय से मात्र पांच किमी दूरी पर गोंडा-बहराइच र्मा पर स्थित पंडरी शंकर गांव में मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्मे मण्डली प्रसाद पाण्डेय उर्फ मण्डली महाराज की शिक्षा महज प्राइमरी तक ही हुई थी। वे जब आठ साल के थे तभी उनके पिता भगवती प्रसाद पाण्डेय जो बलरामपुर रियासत से जुड़े थे, का निधन हो गया था।

बचपन में ही मंडली महाराज बन गए संगीत जगत का चमकता सितारा

पिता भगवती प्रसाद भी ढोलक और हारमोनियम वादन के अपने समय में उस्ताद थे। उन्हीं के शिष्य और मण्डली महाराज के मौसेरे भाई गूदड़ महाराज भी ढोलक और हारमोनियम के जाने माने उस्ताद ने पिता की मृत्यु के बाद मंडली महराज को अपने शागिर्दी में लेकर बाल्यकाल में ही मंडली महाराज को संगीत जगत का चमकता हुआ ध्रुव तारा बना दिया।

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उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी, दो विवाहित बेटियां और दो बेटे हनुमान प्रसाद और ओम प्रकाश पाण्डेय भी ढोलक, हारमोनियम, बैंजो, कीपैड, आर्गन आदि वाद्ययंत्रों को वादन में सिद्धहस्त हैं। दोनों बेटे उनके ही पदचिन्हों पर चलते हुए अत्यंत सरल एवं संस्कारवान हैं।

जब अनूप जलोटा ने मंडली महाराज के चरण छू लिए

देश प्रदेश में प्रख्यात गायक, संगीतकार एवं अलंकार क्रियेशन मुंबई एवं अलंकार संगीत कला संस्थान के प्रोपराटर मुकेश सिंह ने बताया कि साल 2001 में मंडली महाराज असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रफुल्ल मोहंती के विशेष बुलावे पर राजकीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। जहां नामचीन हस्तियों के साथ भजन सम्राट अनूप जलोटा भी उपस्थित थे। उनके हुनर को देखकर अनूप जलोटा स्वयं अपने स्थान से उठकर मंडली महाराज के चरण छू लिए थे और उनके गुणों के कायल हो गये थे।

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संगीत अकादमी लखनऊ में रिकार्ड हुआ कार्यक्रम

जनपद के वरिष्ठ गायक एवं संगीतकार मुकेश सिंह ने उनके जीवन से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए बताया कि मुकेश सिंह के साथ ही वह बंगाली क्लब द्वारा वर्ष 2003 में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देने पहुंचे थे। जहां उन्हे अवार्ड्स से सम्मानित किया गया था। मुंबई में आयोजित अलंकार क्रिएशन कार्यक्रम में जहां बड़ी-बड़ी हस्तियां उपस्थिति थी। वहां भी उन्होंने भरपूर सम्मान प्राप्त करते हुए अलंकार क्रिएशन अवार्ड ग्रहण किया था। अयोध्या के सावन मेले में जहां पटना, ग्वालियर सहित प्रदेश के तमाम घरानों का जमावड़ा लगता था। वहां मण्डली महाराज का अपना एक अलग स्थान था। उनकी विलक्षण प्रतिभा का अच्छे अच्छे संगीतकार लोहा मानते थे। वर्ष 2007 में मण्डली महाराज का कार्यक्रम संगीत अकादमी लखनऊ में रिकार्ड हुआ है। जो धरोहर के रुप में आडियो-वीडियो हमेशा के लिए सुरक्षित है।

जब कलेक्टर ने छुए पांव तो लोग वाह-वाह कर उठे

फातिमा कालेज के वरिष्ठ संगीत शिक्षक राजेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि वह मंडल के नहीं सुदूर प्रदेशों में भी अपनी कला से विख्यात थे। वह साधारण परिवार से जरुर थे। लेकिन असाधारण प्रतिभावान थे। वर्ष 2019 में अलंकार संगीत कला संस्थान के तत्वाधान में स्व. मो. रफी की याद में गायक मुकेश सिंह की टीम ने टाउन हाल में एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें मण्डली महाराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड डीएम डा. नितिन बंसल द्वारा दिया गया।

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मंडली महराज की प्रतिभा को पहचान कर जब डीएम डा. नितिन बंसल ने उनके पैर छुए तो हाल में मौजूद दर्शकों ने करतल ध्वनि से जोरदार स्वागत किया। इससे पहले देवी पाटन मंडल के पूर्व कमिश्नर व संगीत प्रेमी चन्द्र प्रकाश ने मण्डली महाराज को अपने बंगले पर संगीत शिक्षा ग्रहण करने हेतु बुलवाया था और उनका खूब आदर सत्कार किया था।

अमर रहेगी यश कीर्ति

वरिष्ठ पत्रकार एसपी मिश्र ने कहा कि मंडली महराज के निधन से देवी पाटन मण्डल ही नहीं भारतीय कला और संगीत जगत को अपूर्णीय क्षति हुई है। लेकिन उनकी यश कीर्ति सदा-सदा के लिए हम सबके बीच विद्यमान है और रहेगी। लाॅकडाउन के बीच तमाम संगीत प्रेमियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उनके अंतिम संस्कार में पहुंचकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया।

अंतिम यात्रा में शामिल हुए ये लोग

अंतिम यात्रा में पहुंचने वालों में भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य महेन्द्र सिंह, वांसुरी वादक राजेश मिश्र, मुकेश सिंह, राजेन्द्र श्रीवास्तव, शंकर चौधरी, देवेन्द्र, अजय कुमार मिक्की, विजय कश्यप, सोमेश, रोहित मिश्र, गीतेश, विनय, मयूर, वैभव सकसेना, शीतलदास आदि संगीत प्रेमी शामिल रहे।

तेज प्रताप सिंह

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