नगर निगम के इस फरमान से पंडों और पुरोहितों में बढ़ी बेचैनी, जानें पूरा मामला

नगर निगम घाटों पर होने वाली गंगा आरती और पंडों से भी शुल्क वसूलने का फरमान सुनाया है। यही नहीं गंगा किनारे होने वाले सामाजिक कार्यों पर भी शुल्क लगेगा।

वाराणसी: घाट और घाटिया काशी की पहचान है। लेकिन नगर निगम के एक फैसले ने इस पहचान पर ग्रहण लगा दिया है। लॉकडाउन में पहले ही काशी के गंगा घाटों की रौनक फीकी पड़ी थी। अब नगर निगम एक फैसले ने घाट किनारे रोजगार चलाने वालों की कमर तोड़ दी है।

दरअसल नगर निगम घाटों पर होने वाली गंगा आरती और पंडों से भी शुल्क वसूलने का फरमान सुनाया है। यही नहीं गंगा किनारे होने वाले सामाजिक कार्यों पर भी शुल्क लगेगा। अब इसे लेकर शहर में विरोध प्रदर्शन का दौर शुरु हो चुका है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए आंदोलन की धमकी दी है।

क्या है नगर निगम का फैसला

नगर निगम ने नदी किनारे रखरखाव, संरक्षण एवं नियंत्रण के लिए उपविधि 2020 की घोषणा करते हुए शुल्क प्रभावी कर दिया है। इसके तहत सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रतिदिन चार हजार रुपए, धार्मिक आयोजन के लिए 500 रुपये प्रतिदिन और सामाजिक कार्य के लिए 200 रुपए प्रतिदिन लेगा। यह शुल्क एक से 15 दिनों तक चलने वाले आयोजनों के लिए लगेंगे।

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इसके अलावा 15 दिन से लेकर एक साल तक चलने वाले आयोजनों पर वार्षिक शुल्क के रूप में पांच हजार रुपए लगेंगे। राजस्व प्रभारी अधिकारी विनय राय के अनुसार घाटों पर साफ-सफाई और उसके संरक्षण को और बेहतर करने के लिए शुल्क की व्यवस्था की गई है। पुरोहितों से बहुत मामूली शुल्क लिये जाएंगे। साथ ही गंगा घाटों पर होने वाले धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों पर शुल्क का निर्धारण किया गया है।

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यही नहीं नगर निगम गंगा और वरुणा किनारे कपड़े धोने, साबुन लगाकर नहाने पर 500 रुपए, कूड़ा कचरा फेंकने पर 2100 रुपए, घरों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से नदी में जल निकासी पर पहली बार 50 हजार रुपये व दूसरी बार 20 हजार रुपये जुर्माना वसूलेगा। नगर निगम के इस नए नियम का विरोध भी शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के पार्षदों के एक दल ने नगर निगम के फैसले का विरोध का विरोध करते हुए टैक्स को वापस लेने की मांग की है।

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समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया है। कांग्रेस नेता संजीव सिंह ने कहा कि पुरोहितों से भी अब नगर निगम शुल्क लेने जा रहा है। हर जगह नगर निगम राजस्व बढ़ाने की तरकीबें निकलाता है, जबकि सुविधाओं के नाम पर आम लोगों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

रिपोर्ट-  आशुतोष सिंह

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