यूपी: एक्शन में योगी सरकार, घोटालों पर हो रही है सबसे बड़ी कार्रवाई

बैठक में 17 मार्च को हुए निवेश पर सवाल उठाने के बजाय बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक में यह भी प्रस्ताव पास हुआ कि सचिव, ट्रस्ट केस-टू-केस बेसिस मामले में निदेशक वित्त से अनुमोदन लेंगे।

यूपी: एक्शन में योगी सरकार, घोटालों पर हो रही है सबसे बड़ी कार्रवाई

यूपी: एक्शन में योगी सरकार, घोटालों पर हो रही है सबसे बड़ी कार्रवाई

लखनऊ: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पत्र पर कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। बता दें, एलडीए के भ्रष्टाचार पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी थी। डिप्टी सीएम के पत्र में एलडीए में गंभीर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का खुलासा किया था।

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ऐसे में उनकी चिट्ठी को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 11 कॉन्ट्रेक्टर के फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। एलडीए वीसी ने 11 फर्मो का परफॉर्मेंस ठीक न होने पर ये कार्रवाई की है। मालूम हो, एलडीए में लंबे समय से काम कर रहे कॉन्ट्रेक्टर की लापरवाही पर ब्लैक लिस्ट किया गया है।

एमएस कॉन्ट्रैक्टर, इंदु प्रोजेक्ट, सिंटैक्स, एशिया कंस्ट्रक्सन, प्रताप ट्रेडिंग कंपनी, पवनसुत कंस्ट्रक्सन, रूपेश कुमार सिंह, नरेश इंटरप्राइजेज, पूनम इंटरप्राइजेज, एसआर इंफोटेक को किया बैन, कंपनियों पर 6 महीने से 1 साल के लिए एलडीए में रोक लग गयी है। एलडीए के तमाम योजनाओं में मानक अनुरूप काम न करने पर कार्रवाई हुई है।

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बता दें कि उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक कई घोटाले सामने आ रहे हैं। घोटालों को सामने आने का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में घोटालों की सूची का था। इसी मामले में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था।

जानिए अन्य घोटाले

होम गार्डों के वेतन निकासी में फर्जीवाड़ा

उत्तर प्रदेश में होम गार्डों के वेतन निकासी का ऑडिट होगा। होमगार्ड के वेतन निकासी में फर्जीवाड़े के मामले पर मंत्री चेतन चौहान ने ऑडिट से पहले एरियर भुगतान नहीं करने के आदेश दिए हैं। नोएडा में होमगार्डों के वेतन भुगतान में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद होमगार्ड विभाग ने पूरे प्रदेश में वेतन निकासी का ऑडिट करने का फैसला किया है।

UPPCL PF घोटाला

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन (यूपीपीसीएल) में करीब 2600 करोड़ रुपए का पीएफ घोटाला सामने आया है। दरअसल साल 2014 में फैसला हुआ कि उन कंपनियों में उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर एंप्लॉइज ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन अंशदायी भविष्य निधि ट्रस्ट के पैसे का निवेश किया जाए, जहां से ज्यादा ब्याज मिले। इसके बाद दिसंबर, 2016 से हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में निवेश शुरू कर दिया गया है।

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मार्च, 2017 में पावर सेक्टर एंप्लॉइज ट्रस्ट ने करीब 4,121 करोड़ रुपये का निवेश हाउसिंग फाइनेंस कंपनी DHFL में किया। यह निवेश दो एफडी के रूप में किया गया। एक एफडी एक साल के लिए और दूसरी एफडी तीन साल के लिए की गई। एक साल की एफडी में करीब 1,854 करोड़ और तीन साल की एफडी में करीब 2,268 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।

पैसा ट्रस्ट को वापस मिल गया

एक साल की FD दिसंबर, 2018 में मेच्योर हो गई, जिसका पैसा ट्रस्ट को वापस मिल गया। वहीं, तीन साल की एफडी मार्च, 2020 में पूरी होगी। अब यही पैसा कंपनी में फंस गया है। यहा पैसा इसलिए फंसा है, क्योंकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने कई संदिग्ध कंपनियों और सौदों से जुड़े होने की सूचना के बाद DHFL के भुगतान पर बैन लगा दिया है। अब यही डर है कि कहीं कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई फंस न जाए।

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ईओडब्ल्यू ने शुरुआती जांच में पाया है कि पीएफ के निवेश के लिए कोई टेंडर जारी नहीं हुआ था। सिर्फ कोटेशन के जरिए DHFL में 2,268 करोड़ रुपये निवेश कर दिए गए। बताया जाता है कि कर्मचारियों के 2268 करोड़ रुपये न फंसते। DHFL में पहला निवेश 17 मार्च, 2017 को हुआ। इसके बाद 24 मार्च, 2017 को जब बोर्ड ऑफ ट्रस्ट की बैठक हुई तब कंपनी में निवेश हुआ।

बैठक में 17 मार्च को हुए निवेश पर सवाल उठाने के बजाय बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक में यह भी प्रस्ताव पास हुआ कि सचिव, ट्रस्ट केस-टू-केस बेसिस मामले में निदेशक वित्त से अनुमोदन लेंगे। अगर 24 मार्च, 2017 को ही बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर सवाल खड़ा कर दिया जाता तो शायद बिजली कर्मचारियों का 2268 करोड़ रुपये नहीं फंसता।