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त्रिवेंद्र रावत बने रहेंगे CM: उत्तराखंड नेतृत्व में परिवर्तन नहीं, BJP की बैठक में फैसला

सोमवार को दिन भर इस मुद्दे पर गहराई से मंथन करने के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने रावत को फिलहाल बनाए रखने का अंतिम फैसला लिया।

Roshni Khan

Roshni KhanBy Roshni Khan

Published on 9 March 2021 3:32 AM GMT

त्रिवेंद्र रावत बने रहेंगे CM: उत्तराखंड नेतृत्व में परिवर्तन नहीं, BJP की बैठक में फैसला
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उत्तराखंड में फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, लंबी बैठक के बाद शीर्ष नेतृत्व का फैसला (PC: social media)
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नई दिल्ली: उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर चल रही उठापटक फिलहाल थमती नजर आ रही है। सियासी जानकारों के मुताबिक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को फिलहाल हटाने की मांग को खारिज कर दिया है। आज होने वाली विधायक दल की बैठक भी अब नहीं होगी।

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सोमवार को दिन भर इस मुद्दे पर गहराई से मंथन करने के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने रावत को फिलहाल बनाए रखने का अंतिम फैसला लिया। वैसे पार्टी नेतृत्व ने राज्य के विधायकों की नाराजगी को गंभीरता से लिया है और माना जा रहा है कि इन विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है।

राज्य के सियासी संकट पर गहराई से मंथन

राज्य के कई मंत्रियों और विधायकों के दिल्ली में डेरा डालने के बाद रावत को हटाए जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। केंद्रीय नेतृत्व के तलब करने पर मुख्यमंत्री रावत भी गैरसैण जाने का अपना कार्यक्रम रद्द कर अचानक दिल्ली पहुंच गए थे। सोमवार को पार्टी नेतृत्व उत्तराखंड के सियासी संकट पर गहराई से मंथन करने में जुटा रहा।

पार्टी नेतृत्व की ओर से राज्य के सियासी हालात का जायजा लेने के लिए भेजे गए दो पर्यवेक्षकों डॉ रमन सिंह और उत्तराखंड के प्रभारी दुष्यंत गौतम की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर भी गहराई से चर्चा की गई। पार्टी के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के संगठन मंत्री बीएल संतोष की बैठक में इस रिपोर्ट पर गहराई से मंथन किया गया। संसद भवन में मौजूद पीएम नरेंद्र मोदी से भी इस बाबत दिशा निर्देश लिए जाने की चर्चा है।

नड्डा के साथ रावत की लंबी बैठक

इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पार्टी के राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी के घर पहुंचे और उनसे करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री रावत की देर शाम पार्टी अध्यक्ष नड्डा के साथ लंबी बैठक चली।

करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में राज्य के सियासी संकट पर एक बार फिर गहराई से चर्चा की गई। इस बैठक के बाद रावत का तनाव खत्म हुआ। हालांकि इसके बावजूद उन्होंने खुद मीडिया से बातचीत न करके पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और अपने करीबी विधायक मुन्ना सिंह चौहान को मीडिया से बातचीत के लिए भेजा।

BJP BJP (PC : social media)

नहीं होगी विधायक दल की बैठक

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने मीडिया से बातचीत में राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रावत के प्रति किसी प्रकार का कोई असंतोष नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार को विधायक दल की कोई बैठक नहीं होने वाली है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नीतिगत मामलों पर फैसला लेने का हक केवल संसदीय बोर्ड के पास ही है और संसदीय बोर्ड के फैसलों की हमें कोई जानकारी नहीं है।

राज्य के सियासी संकट से नेतृत्व चिंतित

कई अन्य राज्यों के साथ उत्तराखंड में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इस कारण पार्टी नेतृत्व उत्तराखंड के सियासी संकट को लेकर चिंतित बताया जा रहा है। भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उत्तराखंड के सियासी संकट का अभी स्थायी समाधान नहीं ढूंढा जा सका है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी हड़बड़ी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती। इसलिए पार्टी गहराई से मंथन करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगी।

सारे विकल्पों पर चर्चा करेगा शीर्ष नेतृत्व

राज्य के संबंध में कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले पार्टी नेतृत्व राज्य के जातीय समीकरण पर भी गहराई से मंथन कर लेना चाहता है। जानकारों का कहना है कि असंतुष्टों की नाराजगी दूर करने के लिए मंत्रिमंडल का विस्तार भी किया जा सकता है। रावत को हटाए जाने पर संगठन में भी बदलाव जरूरी हो जाएगा और यही कारण है कि नेतृत्व सारे विकल्पों पर विचार करने के बाद ही कोई स्थायी फैसला लेगा।

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वैसे सियासी जानकारों का मानना है कि रावत को कुछ समय के लिए अभयदान जरूर मिल गया है मगर उत्तराखंड मैं निकट भविष्य में फिर सियासी उठापटक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जल्द ही उत्तराखंड पर फिर गहराई से मंथन करेगा और उसके बाद ही इस राज्य के बारे में अंतिम फैसला लिया जाएगा।

रिपोर्ट- अंशुमान तिवारी

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