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इस मुस्लिम देश से बढ़ी अमेरिका की दोस्ती, 80 साल बाद ट्रंप से आए मिलने... नई मित्रता पर टिकी निगाहें
Trump Syria meeting: 80 साल बाद किसी सीरियाई राष्ट्रपति का अमेरिका दौरा हुआ है। आतंकी ब्लैकलिस्ट से हटने के बाद शारा की यह यात्रा अमेरिका-सीरिया रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत दे रही है।
Trump Syria meeting: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती अब एक मुस्लिम देश से होती दिखाई दे रही है। यह देश है सीरिया क्योंकि यहां के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा अमेरिका आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मच गई। आज उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने जा रही है। एक ऐसी मुलाकात जिसका असर सिर्फ अमेरिका या सीरिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा मिडल ईस्ट इसका असर महसूस करेगा। यह मौका इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि 1946 के बाद पहली बार कोई सीरियाई राष्ट्रपति अमेरिका पहुंचा है। लगभग 80 साल के बाद दोनों देशों के बीच यह राजनयिक पुल बनने जा रहा है।
आतंकी ब्लैकलिस्ट से हटने के बाद नई राह
अहमद अल-शारा का यह दौरा उस वक्त हुआ है जब अमेरिका ने उन्हें आतंकी ब्लैकलिस्ट से हटाया है। इस राहत के कुछ ही घंटे बाद शारा वॉशिंगटन पहुंच गए और कई शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों से उनकी गुप्त व अहम बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया। इन मुलाकातों के बाद आज की ट्रंप-शारा मीटिंग को ‘टर्निंग पॉइंट’ माना जा रहा है।अमेरिका द्वारा सीरिया से सभी आर्थिक और राजनीतिक पाबंदियां हटाने के फैसले ने दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघला दिया है। सीरिया की सड़कों पर इसका जश्न मनाया गया और लोगों ने इसे नई शुरुआत के रूप में देखा।
ट्रंप की रणनीति, मिडल ईस्ट में नई चाल
विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की इस अचानक बदलती नीति के पीछे मिडल ईस्ट को नए सिरे से आकार देने की योजना छिपी है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि सीरिया अब इजरायल के साथ बेहतर रिश्ते बनाए और धीरे-धीरे अमेरिका के नजदीक आए। दरअसल, अमेरिका सीरिया को मिडल ईस्ट में अपनी एक नई चौकी के रूप में देख रहा है, जैसे उसने रियाद और तेल अवीव में किया था। मई में रियाद में ट्रंप और शारा की मुलाकात ने इसी दिशा में नींव रखी थी।
दमिश्क में अमेरिकी बेस की तैयारी
सीरिया में अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने उम्मीद जताई है कि ट्रंप और शारा की मीटिंग से आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा करार हो सकता है। इसके तहत अमेरिका दमिश्क में एक मिलिट्री बेस बनाने की योजना पर काम कर सकता है। यह कदम अमेरिका की मिडल ईस्ट में पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि शारा सरकार के आने के बाद हालात बेहतर हुए हैं। 50 साल के असद शासन की समाप्ति के बाद अब सीरिया नई दिशा में बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र से लेकर वॉशिंगटन तक शारा का प्रभाव
शारा सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी शामिल हुए थे, जहां उन्होंने दशकों बाद सीरिया का प्रतिनिधित्व किया था। अब उनकी यह अमेरिका यात्रा उस भाषण की कूटनीतिक निरंतरता मानी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी हाल ही में सीरिया पर से पाबंदियां हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया था, जो अमेरिकी नीति में आए बड़े बदलाव का संकेत है।
नई दोस्ती पर दुनिया की नजरें
अब पूरी दुनिया की निगाहें इस मुलाकात पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या यह नई दोस्ती मिडल ईस्ट में शांति लाएगी या आने वाले समय में एक नया शक्ति-संतुलन बनाएगी?इतना तय है कि 80 साल बाद सीरिया और अमेरिका का यह मिलन वैश्विक राजनीति के पन्नों में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।


