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चीन के खतरनाक मंसूबे, सेना को अत्याधुनिक बनाने के लिए रक्षा बजट में की बढ़ोतरी

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raghvendraBy raghvendra

Published on 9 March 2018 8:25 AM GMT

चीन के खतरनाक मंसूबे, सेना को अत्याधुनिक बनाने के लिए रक्षा बजट में की बढ़ोतरी
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चीन ऐसा देश है जो चुपचाप तरीके से अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देता रहता है। वैश्विक स्तर पर अपना दबदबा कायम रखने के लिए वह अपनी सैन्य योजनाओं पर विशेष रूप से फोकस करता है। इसी के मद्देनजर चीन ने इस साल का रक्षा बजट 11 खरब युआन से ज्यादा अर्थात 175 अरब डॉलर यानी 1139887 करोड़ रुपये घोषित किया है।

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पिछले वर्ष की तुलना में चीन ने अपने बजट में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि की है। यदि चीन के रक्षा बजट की भारत से तुलना की जाए तो यह भारत के रक्षा बजट से साढ़े तीन गुना ज्यादा है। चीन अब अमेरिका के बाद रक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाला दूसरा देश बन गया है। माना जा रहा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना को अत्याधुनिक बनाने के लिए रक्षा बजट में यह बढ़ोतरी की है।

बजट में बढ़ोतरी का किया बचाव

चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री ली कछयांग ने कहा कि चीन अपनी सेना के प्रशिक्षण और युद्ध की तैयारी के सभी पहलुओं को बढ़ाएगा। उन्होंने रक्षा बजट में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि चीन रक्षा क्षेत्र में जो खर्च कर रहा है वह तमाम अन्य बड़े देशों की तुलना में काफी कम है।

दक्षिण चीन सागर में बढ़ते विवाद एवं अमेरिका से तनातनी के बीच चीन ने पिछले वर्ष अपना रक्षा बजट सात प्रतिशत बढ़ाया था। चीन ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद वर्ष 2016 में रक्षा बजट को 7.6 प्रतिशत बढ़ाकर 146 अरब डॉलर यानी कि 9771 अरब रुपये किया था। इससे पहले वर्ष 2015 में चीन का रक्षा बजट 145 अरब डॉलर यानी कि 974762 करोड़ रुपये था। चीन ने वर्ष 2011 से 2015 तक रक्षा बजट में सालाना वृद्धि औसतन 13 फीसदी की थी।

सैन्यीकरण में आएगी तेजी

खराब आॢथक स्थिति के बावजूद चीन ने रक्षा बजट में वृद्धि सैन्यीकरण के प्रयासों को तेजी देने के लिए ही की है। इसलिए माना जा रहा है कि चीन अपनी सामरिक क्षमता बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। चीन का कहना है कि अमेरिका की नीतियों को देखते हुए चीन के रक्षा बजट में बढ़ोतरी जरूरी हो गयी थी। अब यह तय है कि रक्षा बजट में बढ़ोतरी करके चीन अपनी सैन्य योजनाओं को अंजाम देगा।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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