चीन की घेराबंदी तेज: आठ देशों के सांसदों ने बनाया गठबंधन, लगाया ये बड़ा आरोप

जिन देशों के सांसदों ने चीन के खिलाफ यह गठबंधन बनाया है, उनमें से कई को चीन की महत्वाकांक्षाओं के कारण राजनीतिक और आर्थिक नुकसान झेलने पड़े हैं।

Published by Rahul Joy Published: June 7, 2020 | 11:09 am
Modified: June 7, 2020 | 12:12 pm
china president

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नई दिल्ली। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के कहर के बाद चीन कई बड़े देशों के निशाने पर आ गया है। अमेरिका सहित तमाम देशों का आरोप है कि चीन के वुहान शहर से ही पूरी दुनिया में इस वायरस का संक्रमण फैला और अब यह वायरस इतनी ज्यादा संख्या में लोगों की जानें ले रहा है। कोरोना संकट के बाद दुनिया के तमाम देशों ने चीन की घेरेबंदी तेज कर दी है। अब आठ देशों के वरिष्ठ सांसदों ने चीन की घेरेबंदी के लिए यह गठबंधन बनाया है।

गठबंधन में शामिल हैं इन देशों के नेता

चीन के खिलाफ बनाए गए इस गठबंधन में अमेरिका, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, कनाडा, स्वीडन और नार्वे आदि ताकतवर देशों के नेता शामिल हैं। इस गठबंधन में अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रूबियो, डेमोक्रेट बॉब मेनेन्डेज, यूरोपीय संसद में विदेशी मामलों की कमेटी के मेंबर मिरयम लेक्समैन, जापान के पूर्व विदेश मंत्री जेन नाकातानी और ब्रिटेन में कंजरवेटिव पार्टी के सांसद इयान डंकन स्मिथ शामिल हैं।

चीन को दुनिया के लिए बड़ा खतरा बताया

गठबंधन में शामिल नेताओं ने चीन पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि वह मानवाधिकारों, ग्लोबल ट्रेड और सुरक्षा के लिए खतरा बनता जा रहा है। इन नेताओं ने कहा कि हमारा मकसद चीन से जुड़े मुद्दों पर एक राय बनाना है और सक्रिय होकर रणनीतिक तैयारी करना है। उन्होंने कहा कि चीन के मंसूबों को नाकाम करने के लिए एकजुट होना जरूरी है। सभी देशों को एकजुट होकर चीन के खिलाफ मुहिम छेड़नी होगी ताकि उसके मंसूबों पर पानी फेरा जा सके।

चीन के खिलाफ अमेरिका का बड़ा कदम

जिन देशों के सांसदों ने चीन के खिलाफ यह गठबंधन बनाया है, उनमें से कई को चीन की महत्वाकांक्षाओं के कारण राजनीतिक और आर्थिक नुकसान झेलने पड़े हैं। अमेरिका तो विभिन्न मुद्दों को लेकर अब खुलकर चीन की खिलाफत कर रहा है। अमेरिका में तमाम चीनी कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड करने के साथ ही उन पर शिकंजा कस दिया गया है।

गठबंधन में शामिल कनाडा के खिलाफ चीन ने एक ऐसा कदम उठाया था जिससे काफी नाराजगी फली थी। चीन की हुवेई टेक्नोलॉजी कंपनी कंपनी के एक एग्जीक्यूटिव की गिरफ्तारी के बाद चीन ने बिना किसी ट्रायल के दो कनाडाई नागरिकों को हिरासत में ले लिया था।

नार्वे के साथ चीन का ट्रेड खत्म

नार्वे के साथ चीन के कारोबारी रिश्ते पिछले कई सालों से खराब चल रहे हैं। चीनी सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने के बाद दोनों देशों के कारोबारी रिश्तो में काफी खटास आ गई है। चीन ने नार्वे के साथ अपने कारोबारी दोस्तों को धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म कर लिया है।

ऑस्ट्रेलिया से बिगड़े चीन के रिश्ते

ऑस्ट्रेलिया और चीन के रिश्ते भी हाल के दिनों में काफी खराब हुए हैं। अमेरिका की तरह आस्ट्रेलिया ने भी चीन को कोरोना वायरस फैलाने का जिम्मेदार बताया है। ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि चीन की लापरवाही के चलते आज पूरी दुनिया संकट का सामना कर रही है। अमेरिका का खुलकर साथ देने के कारण चीन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी कई कदम उठाए हैं। चीन ने ऑस्ट्रेलिया पर नए टैरिफ लगाने के साथ ही वहां से कई सामानों के आयात पर भी रोक लगा दी है।