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Climate Change and Environment : जानिए क्लाइमेट कैसे बदल रहा है जानवरों का शरीर

Climate Change and Environment : एक नई रिसर्च में पता चला है कि ग्लोबल वार्मिंग से पशु-पक्षी अपने अपने तरीके से निपट रहे हैं। कुछ पशु अधिक ठंडे स्थानों की तरफ चले गए हैं।

Neel Mani Lal

Neel Mani LalWritten By Neel Mani LalVidushi MishraPublished By Vidushi Mishra

Published on 12 Sep 2021 4:26 AM GMT

climate change animals birds
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विलुप्त होते पक्षी (फोटो- सोशल मीडिया)

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Climate Change and Environment : ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) और क्लाइमेट चेंज (Climate Change) का असर पर्यावरण (Environment) के साथ साथ पशु पक्षियों पर भी दिखाई दे रहा है। इसे कुदरत का करिश्मा कहें या रहस्य। लेकिन सच्चाई है कि ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए पशु-पक्षियों की शारीरिक संरचना में बदलाव आ रहा है।

दरअसल, गर्म खून वाले पशुओं को लगातार अपना आंतरिक तापमान एक सामान स्तर पर बनाए रखना होता है। जिस तरह लू लगने पर इंसान मुश्किल में पड़ जाते हैं ठीक वैसे ही पशु-पक्षी भी ज्यादा गर्मी में दिक्कत में पड़ जाते हैं।

बदल रहा पशुओं का शारीरिक आकार

एक नई रिसर्च में पता चला है कि ग्लोबल वार्मिंग से पशु-पक्षी अपने अपने तरीके से निपट रहे हैं। कुछ पशु अधिक ठंडे स्थानों की तरफ चले गए हैं। कुछ ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों जैसे कि प्रजनन और अप्रवास की टाइमिंग को बदल दिया है। अब वे अपेक्षाकृत ठंडे समय में एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं या प्रजनन करते हैं। कुछ पशु पक्षियों ने अपनी शारीरिक बनावट ही बदल दी है।

फोटो- सोशल मीडिया

ऑस्ट्रेलिया की डाकिन यूनिवर्सिटी में सारा रीडिंग और मैथ्यू साइमंड्स की टीम द्वारा की गयी रिसर्च के अनुसार, पशुओं की कुछ प्रजातियों के कान, पूँछ और चोंच की लम्बाई-चौड़ाई बदल गयी है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि पशु अपने शरीर के भीतर का तापमान रेगुलेट करने के लिए अपने बाहरी अंगों का इस्तेमाल करते हैं। मिसाल के तौर पर अफ्रीकी हाथी के शरीर का गर्म खून उनके कानों में पम्प होता है। इसीलिए ये हाथी अपने कानों को बार-बार हिला कर खून की गर्मी को कम करते हैं। पक्षियों की चोंच भी यही काम करती है। जब पक्षी का तापमान बढ़ जाता है तो खून का प्रवाह चोंच की ओर चला जाता है वहां खून की गर्मी कम हो जाती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्म वातावरण वाली जगहों पर पाए जाने वाले पशुओं के कान, पूँछ और चोंच जैसे अंग ज्यादा बड़े होते हैं। 1870 के दशक में अमेरिकी पशु विज्ञानी जोएल एलेन ने पता लगाया था कि एक ही प्रजाति के जो पशु ठंडे वातावरण में रहते हैं उनके अंग अपेक्षाकृत छोटे होते हैं। इस जानकारी को 'एलेन का नियम' कहा जाता है। इसी नियम को आधार बना कर की शोध किये गए हैं और पशु-पक्षियों की बनावट में बदलावों को दर्ज किया गया है।

अब क्या हो रहा है

जैसे-जैसे धरती और वातावरण का तापमान बढ़ता जा रहा, वैसे ही पशु पक्षियों के आकार भी बदल रहे हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि विशेषकर पक्षियों की चोंच अब बढ़ गयी हैं। रिसर्च के अनुसार, कुछ पक्षियों की चोंच का आकार 4 से 10 फीसदी तक बढ़ चुका है।

पक्षियों पर वातावरण का प्रभाव (फोटो- सोशल मीडिया)

इसी तरह चमगादड़ की कुछ प्रजाति के पंखों का आकार 1.64 फीसदी बढ़ गया है। अलास्का में पाए जाने वाले 'मास्क्ड श्रू' पशु के पैरों और पूँछ के आकार भी बढ़ गए हैं। शोधकर्ताओं ने कहा है कि इस स्टडी को और अधिक व्यापक क्षेत्र में किये जाने की जरूरत है।

पशु-पक्षियों की बनावट में बदलाव का एक कारण पर्यावरण में ग्लोबल वार्मिंग के इतर अन्य बदलाव आना भी माना जा रहा है। ख़ास किस्म की वनस्पतियों का ख़त्म हो जाना, पानी के स्रोतों में बदलाव, मौसम चक्र, खासकर बरसात के चक्र में बदलाव का असर भी जीव जंतुओं पर पड़ रहा है।

पक्षियों की बहुत सी प्रजातियाँ इसलिए ख़त्म हो रही हैं क्योंकि वे चोंच की ख़ास बनावट के कारण विशेष तरह की डाइट ही खा सकती हैं। ऐसे में अगर उनके भोजन के स्रोत ख़त्म हो जाते हैं तो वे पक्षी भी ख़त्म हो जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने एक चेतावनी भी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते बहुत से कीट पतंगे भी विलुप्त हो गए हैं। अगर ऐसा व्यापक रूप से होता रहेगा, तो इसका बहुत गंभीर असर कृषि पर पड़ेगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि वन्य जीवन को बचाने के लिए ग्रीन हाउस उत्सर्जन को काफी कम करना होगा तथा ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति से गंभीरता से निपटना होगा।

Vidushi Mishra

Vidushi Mishra

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