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Corona virus: क्या कभी नहीं जाएगा इस दुनिया से कोरोना? हुए चौकानें वाले खुलासे

Corona virus: वायरस को विज्ञान में सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी माना गया है. वायरस कभी मरता नहीं वहीं समय-समय पर वायरस में होने वाले बदलाव की वजह से वह नए और खतरनाक रूप में आता रहता है.

Ashish Lata
Report Ashish LataPublished By Yogi Yogesh Mishra
Updated on: 2021-08-13T11:24:04+05:30
corona virus will never leave this world
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corona virus: कही नहीं जायेगा कोरोना वायरस इस संसार से

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Corona virus: हमारी आंखों से दिखने वाली दुनिया के अलावा एक और छिपा हुआ संसार होता है. जिसे हम सूक्ष्म जीवों का छिपा संसार कहते हैं. जहां अनगिनत प्रजाति के सूक्ष्मजीव वास करते हैं। सूक्ष्मजीवों की अगर बात की जाए तो वह एकल कोशिका (Single Cell) के होते हैं जिन्हें हम अपनी आंखों से नहीं देख सकते हैं. यह सूक्ष्मजीव का संसार हमारे इर्द-गिर्द ही मौजूद होता है। सूक्ष्म जीवों हमें फायदा भी पहुंचाते हैं तो वहीं बहुत से ऐसे सूक्ष्मजीव हैं जो हमारे लिए घातक साबित होते हैं। अगर वायरस की बात की जाए तो वह सदैव हमारे लिए घातक परिणाम ही देता है। विज्ञान में वायरस को सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी माना गया है इसका मतलब यह होता है कि वायरस जैसे ही किसी जीवित कोशिका के संपर्क में आता है तो वह एक्टिव हो जाता है यानी अपना असर दिखाना शुरू कर देता है। वायरस कभी मरता नहीं विज्ञान में उसे अजर और अमर कहा गया है, शोधकर्ताओं के अनुसार किसी नए वायरस की उत्पत्ति के बाद वह ज्यादा खतरनाक होता है। लेकिन समय के साथ-साथ उसका असर धीरे-धीरे कम पड़ने लगता है। ठीक ऐसा ही कोरोनावायरस के साथ भी होगा ब्योर्नस्टैड के अनुसार यह दावा किया गया है कि आने वाले समय में कोरोनावायरस मात्र एक सामान्य फ्लू बन कर रह जाएगा, जिसका असर सिर्फ बच्चो में ही देखने को मिलेगा।


पहले भी दुनिया ने वायरस का प्रहार झेला है

कोरोनावायरस कोई एकमात्र ऐसा वायरस नहीं है जिसने पूरी दुनिया में अपना घातक प्रभाव दिखाया है पहले भी दुनिया अलग अलग वायरस की चपेट में आ चुकी है। सन 1720, 1820, 1920 और 2020 शायद इसे इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि हर 100 साल में वायरस अपना घातक प्रभाव पिछले 400 साल से दिखाता आ रहा है जिसने पूरी दुनिया को तबाही का मंजर देखने पर मजबूर किया है। सन 1720 में "द ग्रेट प्लेग ऑफ मार्सेल" ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी थी। वहीं 1820 में एशियाई देशों में "हैजा फैला" उसमें भी लाखों लोगों की जान चली गई उसके बाद सन् 1918 से लेकर 1920 में दुनिया ने "स्पेनिश फ्लू" का कहर इस दुनिया ने झेला जिसकी वजह से लगभग 5 करोड़ से अधिक लोगों की जान चली गई थी, वहीं अब वर्तमान समय में कोरोनावायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है। लेकिन एक्सपर्ट्स की माने तो आने वाले वाले समय में कोरोना वायरस का भी असर धीरे धीरे काम हो जाएगा।



क्यों कोरोना वायरस बदल लेता है अपना रूप ?

वायरस को बहरूपिया भी कहा गया है क्योंकि वह समय-समय पर अपने नए रूप दिखाता रहता है जिस वजह से वायरस की दवा नहीं बन पाई सिर्फ इसे वैक्सीन के ज़रिए ही रोकने का प्रयास किया जाता है। आखिर वायरस में इतनी जल्दी बदलाव कैसे और क्यों आ जाते हैं? वायरस जब किसी इंसान या जीवित कोशिका के संपर्क में आता है तो वह उस कोशिका पर अपना नियंत्रण पा लेता है और अपने जेनेटिक मैटेरियल राइबोस न्यूक्लिक एसिड (RNA) की कॉपी कर नए वायरस को जन्म देता है, महज कुछ ही मिनट में देखते ही देखते हैं वायरस की संख्या में वृद्धि होने लगती है। वायरस के इस तरह से अपने जेनेटिक मैटेरियल को कॉपी करने के समय उसके जेनेटिक मैटेरियल में कुछ रासायनिक बदलाव भी होते हैं जिसकी वजह से बनने वाला नया वायरस मूल वायरस से अलग होता है। इसे ही वायरस का नया स्ट्रेन या वैरिएंट कहते हैं यही कारण है कि वायरस की कोई दवा नहीं बन पाती और हमें वैक्सीन का सहारा लेकर वायरस पर अपना नियंत्रण पाना होता है।


Yogi Yogesh Mishra

Yogi Yogesh Mishra

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