पाकिस्तान में भीड़ ने ननकाना साहिब पर किया बड़ा हमला, जान बचाकर भागे सिख

पाकिस्तान के ननकाना साहिब में शुक्रवार को सैकड़ों की भीड़ ने सिखों के सबसे पवित्र धर्मस्थलों में से एक ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर पत्थरबाजी की। दोपहर से ही भीड़ ने गुरुद्वारे को घेर लिया है।

Published by Aditya Mishra Published: January 3, 2020 | 7:36 pm
Modified: January 3, 2020 | 7:43 pm

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के ननकाना साहिब में शुक्रवार को सैकड़ों की भीड़ ने सिखों के सबसे पवित्र धर्मस्थलों में से एक ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर पत्थरबाजी की। दोपहर से ही भीड़ ने गुरुद्वारे को घेर लिया है।

घटना से जुड़े विडियो में एक स्थानीय कट्टरपंथी सिखों को ननकाना साहिब से भगाने और इस पवित्र शहर का नाम बदलकर गुलाम अली मुस्तफा करने की धमकी देते दिख रहा है।

भीड़ का नेतृत्व पिछले साल ननकाना साहिब की एक सिख लड़की जगजीत कौर को अगवा करने और जबरन धर्मांतरण कर निकाह करने के आरोपी मोहम्मद हसन का परिवार कर रहा है। उनका आरोप है कि ‘अपनी मर्जी से इस्लाम कबूलने’ और ‘शादी करने वाली’ लड़कियों को लेकर सिख समुदाय बेवजह हंगामा खड़ा करता है।

पाकिस्तान के ननकाना साहिब में यह वाकया ऐसे वक्त हुआ है जब भारत में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। संशोधित कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक आधार पर प्रताड़ना का शिकार हो भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

 

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सिखों के दो पवित्र स्थल

पाकिस्तान में सिखों के दो पवित्र तीर्थ स्थल है। एक ननकाना साहिब जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर से लगभग 75 किलोमीटर दूर है जबकि दूसरा तीर्थ स्थल करतारपुर है जो लाहौर से लगभग 117 किलोमीटर स्थित है।

भारत के तीर्थ यात्री पहले करतारपुर साहिब फिर ननकाना साहिब जाते हैं। करतारपुर साहिब, पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह जगह भारतीय सीमा से महज 3 किमी. दूर स्थित है।

सिख इतिहास के अनुसार, गुरुनानक देवजी ने अपनी 4 प्रसिद्ध यात्राओं को पूरा करने के बाद 1522 में करतारपुर साहिब में रहने लगे थे। नानक साहिब ने अपने जीवन काल के अंतिम 17 वर्ष यहीं बिताए थे।

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गुरुनानक अवरतरण

भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व आदिकाल से ही रहा है। सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानक। कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन 1469 को राएभोए के तलवंडी नामक स्थान में, कल्याणचंद (मेहता कालू) नाम के एक किसान के घर गुरु नानक का जन्म हुआ। उनकी माता का नाम तृप्ता था। तलवंडी को ही अब नानक के नाम पर ननकाना साहब कहा जाता है, जो पाकिस्तान में है।

माना जाता है कि 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह हुआ। श्रीचंद और लक्ष्मीचंद नाम के दो पुत्र भी उन्हें हुए। 1507 में वे अपने परिवार का भार अपने श्वसुर पर छोड़कर यात्रा के लिए निकल पड़े।

1521 तक उन्होंने भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के प्रमुख स्थानों का भ्रमण किया। कहते हैं कि उन्होंने चारों दिशाओं में भ्रमण किया था। लगभग पूरे विश्व में भ्रमण के दौरान नानक देव के साथ अनेक रोचक घटनाएं घटित हुईं। 1539 में उन्होंने देह त्याग दी।

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