अबू धाबी से रिश्ते होंगे और गहरे, भारत ने ख़रीदा तेल क्षेत्र का 10% हिस्सा

Published by aman Published: February 12, 2018 | 8:21 am
Modified: February 12, 2018 | 11:15 am
अबू धाबी से रिश्ते होंगे और गहरे, भारत ने ख़रीदा तेल क्षेत्र का 10% हिस्सा

अबू धाबी: पीएम नरेंद्र मोदी के संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दूसरे दौरे से भारतीय कंसोर्टियम को पहली बार अबू धाबी के बड़े तेल संसाधन में हिस्सेदारी मिल गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल उत्पादक कंपनी ओएनजीसी (विदेश), भारत पेट्रो रिसोर्सेज, इंडियन ऑयल की कंसोर्टियम और अबू धावी के नेशनल ऑयल कंपनी (एडएनओसी) के बीच इसके ऑफशोर लोअर जाकुी कंसेशन में 10 फीसदी भागीदारी अधिग्रहण को लेकर समझौता हुआ।

अबू धाबी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का हिस्सा है जो गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) का सदस्य है। यूएई भारत को सबसे ज्यादा तेल की आपूर्ति करता है और यह भारत का दसवां सबसे बड़ा निवेशक भी है।

करार की अवधि 40 साल
ओएनजीसी (विदेश) की अगुवाई वाली कंसोर्टियम ने हिस्सेदारी शुल्क के रूप में अरब अमीरात की मुद्रा में 2.2 अरब दिरहम यानी 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया। यह समझौता नौ मार्च 2018 से लागू हो जाएगा और इस करार की अवधि 40 साल है।

तेल का उत्पादन 4.5 लाख बैरल करने का लक्ष्य
ओएनजीसी विदेश की ओर से जारी बयान के मुताबिक, लोअर जाकुम तेल क्षेत्र से रोजाना 4 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता है, जबकि आगे 2025 तक इसे 4.5 लाख बैरल करने का है। इस तेल क्षेत्र से उत्पादित कुल तेल का 10 फीसदी हिस्सा भारतीय तेल उत्पादक ओएनजीसी विदेश का हक होगा।

आईएएनएस

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