पाक की नापाक हरकत जारीः नाबालिग हिंदू लड़की की जबरन कराई शादी

पाकिस्तान के तमाम दावों के बावजूद वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का सिलसिला नहीं खत्म हो रहा है। पाकिस्तान में हुई एक और दिल दहलाने वाली घटना से पता चलता है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का उसका दावा कितना थोथा है।

नई दिल्ली: पाकिस्तान के तमाम दावों के बावजूद वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का सिलसिला नहीं खत्म हो रहा है। पाकिस्तान में हुई एक और दिल दहलाने वाली घटना से पता चलता है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का उसका दावा कितना थोथा है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण कर लिया। बाद में इस लड़की का जबरन धर्मांतरण करवा कर अपहर्ता से ही उसकी शादी करा दी गई।

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अपहरण के बाद जबरन धर्मांतरण

नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण की यह घटना सिंध प्रांत के जकोबाबाद में हुई है। यहां रहने वाली रेशमा नामक लड़की का पहले अपहरण किया गया और बाद में जबरन उसका धर्म बदलवा कर उसकी शादी अपहर्ता वजीर हुसैन से करवा दी गई। इस घटना के बारे में मिली जानकारी के अनुसार लड़की पर दबाव डालकर उससे अपहर्ता के पक्ष में हलफनामा भी दाखिल करवाया गया है। इस हलफनामे में लड़की की ओर से कहा गया है कि वह 19 साल की है और उसने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल करके वजीर हुसैन से शादी की है। इस्लाम कबूल करने के बाद रेशमा का नया मुस्लिम नाम बशीरन कर दिया गया है।

शिकायतों पर नहीं होती कोई कार्रवाई

पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और उनका जबरन धर्मांतरण करवा कर मुस्लिमों से उनकी शादी की घटनाएं आम हैं। पिछले महीने भी दो नाबालिग हिंदू लड़कियों का अपहरण करके उनकी जबरन शादी कराई गई थी। इस बाबत शिकायत दर्ज कराने के बावजूद सक्षम अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती। पुलिस भी मामले में दर्ज कराई गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं करती। सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि सिख व ईसाई समाज की नाबालिग लड़कियों के साथ भी जोर जबर्दस्ती की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। पाकिस्तान सरकार समय-समय पर अल्पसंख्यकों की पूरी सुरक्षा करने का दावा करती है मगर यह घटना इमरान सरकार के दावों की पूरी तरह पोल खोलने वाली हैं।

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मानवाधिकार आयोग ने खोली पोल

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में भी अल्पसंख्यकों पर किए जाने वाले जुल्मों का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में हर साल अल्पसंख्यकों की कम से कम 1000 नाबालिग लड़कियों को जबरन मुस्लमान बनाया जाता है। इन लड़कियों को इस्लाम कबूल करवाने के बाद जबरन मुस्लिमों से उनकी शादी कर दी जाती है।
जबरन धर्म बदलने की घटनाओं के खिलाफ दो बार विधेयक भी पेश किया गया मगर उसे मंजूरी नहीं मिल सकी। सिंध के पूर्व राज्यपाल सईदुज्जमा सिद्दीकी ने 2016 में विधेयक को खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि जब हजरत अली नौ साल की उम्र में इस्लाम कुबूल कर सकते हैं तो हिंदू लड़कियां क्यों नहीं। हिंदू लड़कियों पर किए जाने वाले जुल्म के खिलाफ समय-समय पर पाकिस्तान में आवाज उठती रही है मगर इन आवाजों पर कोई सुनवाई नहीं की जाती।

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