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Plane Hijack Incidents: जानिए इतिहास के सबसे खौफनाक विमान अपहरण मामलों के बारे में
Plane Hijack Incidents: विमान अपहरण एक गंभीर सुरक्षा समस्या है जिसने कई निर्दोष लोगों की जान ली है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव को बढ़ाया है।
Plane Hijacking Cases In World (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
History of Aircraft Hijack Incidents: विमान अपहरण इतिहास के कुछ सबसे नाटकीय और भयावह घटनाक्रमों में से एक रहा है, जिसने न केवल यात्रियों की सुरक्षा को संकट में डाला, बल्कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्थाओं को भी चुनौती दी। कभी ये घटनाएँ आतंकवादियों की साजिश का हिस्सा रही हैं, तो कभी राजनीतिक विद्रोह का माध्यम बनी हैं। कुछ मामलों में, फिरौती और व्यक्तिगत लाभ के लिए भी विमानों का अपहरण किया गया। डी.बी. कूपर अपहरण (1971) से लेकर फ्लाइट 648 (1985) जैसी घटनाएँ विमान अपहरण के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज हैं। इन घटनाओं ने न केवल हवाई यात्रा की सुरक्षा को हिला कर रख दिया, बल्कि सरकारों को कठोर सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए भी मजबूर किया।
विमान अपहरण केवल यात्रियों के जीवन को खतरे में नहीं डालता, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, कूटनीति और सुरक्षा रणनीतियों की भी कड़ी परीक्षा लेता है। इस लेख में, हम कुछ प्रमुख विमान अपहरण घटनाओं का विश्लेषण करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे कि इन घटनाओं ने एविएशन इंडस्ट्री की सुरक्षा नीतियों को किस प्रकार प्रभावित किया।
प्रमुख विमान अपहरण घटनाएँ (Major Plane Hijacking Incidents In World)
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
1. डी.बी. कूपर अपहरण (D.B. Cooper Hijacking- 1971)
24 नवंबर 1971 को, एक अज्ञात व्यक्ति, जिसने खुद को "डैन कूपर" बताया (बाद में मीडिया में "डी.बी. कूपर" के नाम से प्रसिद्ध हुआ), ने नॉर्थवेस्ट ओरिएंट एयरलाइंस की फ़्लाइट 305 को अपहरण कर लिया। पोर्टलैंड से सिएटल जाने वाली इस उड़ान में, कूपर ने फ्लाइट अटेंडेंट को बताया कि उसके पास बम है और उसने $200,000 नकद और चार पैराशूट की मांग की। सिएटल में विमान उतरने के बाद, फिरौती की रकम और पैराशूट उसे सौंप दिए गए, और कूपर ने सभी यात्रियों को रिहा कर दिया लेकिन चालक दल के कुछ सदस्यों को अपने साथ रखा। फिर उसने विमान को 10,000 फीट की ऊंचाई पर और धीमी गति से उड़ाने का निर्देश दिया।
उड़ान के दौरान, वाशिंगटन राज्य और ओरेगन के बीच, उसने विमान के पिछले दरवाजे से पैराशूट के साथ छलांग लगा दी और फिर कभी नहीं मिला। एफबीआई ने इस मामले की गहन जांच की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। 1980 में, कोलंबिया नदी के किनारे फिरौती की रकम का कुछ हिस्सा बरामद हुआ, लेकिन कूपर का कोई निशान नहीं मिला। 2016 में, एफबीआई ने आधिकारिक रूप से जांच बंद कर दी, और यह मामला इतिहास के सबसे रहस्यमय अनसुलझे अपराधों में से एक बन गया।
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
2. इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट 814 (Indian Airlines Flight 814- 1999)
24 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट 814 (IC 814), जो काठमांडू, नेपाल से दिल्ली, भारत की उड़ान पर थी, को पांच हथियारबंद आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया। विमान में 178 यात्री और 11 क्रू सदस्य सवार थे। अपहरणकर्ता, जो पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन से जुड़े थे, विमान को पहले अमृतसर, फिर लाहौर, दुबई और अंततः अफगानिस्तान के कंधार ले गए, जो उस समय तालिबान के नियंत्रण में था। अमृतसर हवाई अड्डे पर भारतीय सुरक्षा बल समय पर कार्रवाई नहीं कर सके, जिससे विमान लाहौर के लिए रवाना हो गया।
दुबई में अपहरणकर्ताओं ने कुछ यात्रियों को रिहा किया, लेकिन एक भारतीय यात्री, रूपिन कट्याल, की हत्या कर दी गई। कंधार में, भारतीय सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आतंकवादियों की मांगों को मान लिया और तीन कुख्यात आतंकियों – मौलाना मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख, और मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा किया गया। इसके बदले में यात्रियों को मुक्त कर दिया गया, और अपहरणकर्ता भाग निकले। इस घटना ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और आतंकवाद से निपटने के तरीकों पर गंभीर प्रभाव डाला और मौलाना मसूद अजहर बाद में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद संगठन का संस्थापक बना, जो भारत में कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार रहा।
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
3. पैन एम फ्लाइट 73 (Pan Am Flight 73- 1986)
5 सितंबर 1986 को, पैन अमेरिकन वर्ल्ड एयरवेज (पैन एम) की फ़्लाइट 73, जो मुंबई से न्यूयॉर्क के लिए कराची और फ्रैंकफर्ट होते हुए उड़ान भर रही थी, को कराची, पाकिस्तान के जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर चार हथियारबंद आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया। ये आतंकवादी अबू निदाल संगठन से जुड़े थे, जो उस समय लीबिया समर्थित एक चरमपंथी समूह था। विमान में 360 यात्री और 19 क्रू सदस्य सवार थे।
अपहरणकर्ता विमान को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाना चाहते थे, लेकिन चालक दल ने विमान को उड़ान भरने से रोकने के लिए चालाकी से इमरजेंसी पावर बंद कर दी। जब आतंकवादियों को अहसास हुआ कि उनकी योजना विफल हो रही है, उन्होंने यात्रियों को बंधक बना लिया और भारतीय नागरिक नीरजा भनोट, जो कि विमान की मुख्य फ्लाइट अटेंडेंट थीं, ने बहादुरी से कई यात्रियों की जान बचाई। आतंकियों ने कुछ अमेरिकी यात्रियों को गोली मार दी और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिससे 20 यात्रियों की मौत हो गई और 120 से अधिक घायल हो गए।
नीरजा भनोट ने दरवाजे खोलकर यात्रियों को भागने में मदद की, लेकिन आतंकवादियों की गोलीबारी में खुद शहीद हो गईं। उनके इस अद्भुत साहस के लिए मरणोपरांत उन्हें भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र दिया गया। इस हमले के पीछे की साजिश रचने वाले आतंकियों को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन यह घटना अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी बन गई।
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
4. 9/11 अपहरण (9/11 Hijacking 2001)
11 सितंबर 2001 को, आतंकवादी संगठन अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार अमेरिकी यात्री विमानों को अपहरण कर आत्मघाती हमलों के लिए इस्तेमाल किया, जिससे अमेरिका के इतिहास में सबसे भयावह आतंकी हमला हुआ। इस हमले में लगभग 2,977 लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। पहला विमान, अमेरिकन एयरलाइंस फ़्लाइट 11, को बोस्टन से अपहरण कर सुबह 8:46 बजे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टावर से टकरा दिया गया। दूसरा विमान, यूनाइटेड एयरलाइंस फ़्लाइट 175, सुबह 9:03 बजे साउथ टावर से टकराया।
तीसरा विमान, अमेरिकन एयरलाइंस फ़्लाइट 77, सुबह 9:37 बजे वर्जीनिया में पेंटागन से टकराया। चौथा विमान, यूनाइटेड एयरलाइंस फ़्लाइट 93, जिसे न्यू जर्सी से अपहरण किया गया था, लेकिन यात्रियों के संघर्ष के कारण यह सुबह 10:03 बजे पेंसिल्वेनिया के शैंक्सविले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे व्हाइट हाउस या कैपिटल बिल्डिंग पर हमला विफल हो गया। इस हमले के बाद अमेरिका ने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और 2011 में हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को मार गिराया। 9/11 ने वैश्विक सुरक्षा नीतियों और आतंकवाद के खिलाफ उपायों को पूरी तरह बदल दिया।
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
5. एथेंस से काइरो जा रही फ्लाइट 648 (Flight 648 from Athens to Cairo- 1985)
23 नवंबर 1985 को, इजिप्टएयर फ़्लाइट 648, जो एथेंस, ग्रीस से काइरो, मिस्र के लिए उड़ान भर रही थी, को अबू निदाल संगठन से जुड़े तीन आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया। विमान में 89 यात्री और 6 क्रू सदस्य सवार थे। अपहरणकर्ता चाहते थे कि विमान लीबिया की ओर मोड़ा जाए, लेकिन पायलट ने कम ईंधन का बहाना बनाकर विमान को माल्टा के लुका हवाई अड्डे पर उतार दिया।
माल्टा में, मिस्र की कमांडो फोर्स ने विमान को मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान चलाया, लेकिन ऑपरेशन विफल रहा और 56 यात्रियों की मौत हो गई। अपहरणकर्ताओं ने कुछ यात्रियों को गोली मार दी, जिनमें अमेरिकी और इजरायली नागरिक शामिल थे। इस हमले में सबसे कुख्यात अपहरणकर्ता ओमर रेगान था, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
यह घटना विमान अपहरण इतिहास की सबसे खतरनाक घटनाओं में से एक मानी जाती है, जिसने अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाला।
विमान अपहरण के कारण और प्रभाव (Causes And Effects Of Plane Hijacking)
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
राजनीतिक उद्देश्य - अक्सर विमान अपहरण राजनीतिक या आतंकवादी संगठनों द्वारा अपने उद्देश्य पूरे करने के लिए किया जाता है। वे सरकारों पर दबाव डालने, कैदियों को छुड़वाने या प्रचार प्राप्त करने के लिए इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।
आर्थिक उद्देश्य - कुछ मामलों में, अपहरणकर्ता केवल फिरौती की मांग करते हैं। वे विमान और यात्रियों को छोड़ने के बदले बड़ी रकम की मांग करते हैं। डी.बी. कूपर का मामला इसी श्रेणी में आता है।
मानसिक अस्थिरता - कुछ अपहरणकर्ताओं का उद्देश्य कोई ठोस राजनीतिक या आर्थिक लाभ नहीं होता, बल्कि वे मानसिक रूप से अस्थिर होते हैं और उनका मकसद केवल अराजकता फैलाना होता है।
आतंकवाद और धार्मिक कट्टरवाद - 9/11 की घटना इस बात का उदाहरण है कि कैसे आतंकवादी संगठन धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा देने के लिए विमान अपहरण को हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।