समुद्री रेत को लेकर मलेशिया-सिंगापुर में बढ़ सकता है तनाव

समुद्री रेत को लेकर मलेशिया-सिंगापुर में बढ़ सकता है तनाव

सिंगापुर : अपने क्षेत्र के विस्तार के लिए सिंगापुर समुद्र को पाटता रहा है। सरकारी आंकड़े के अनुसार 2018 में सिंगापुर 2.7 वर्ग किमी बढ़ा जो एक दशक में सर्वाधिक वार्षिक विस्तार है। इस विस्तार के लिए सिंगापुर रेत का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है। समुद्री रेत के लिए सिंगापुर का सबसे बड़ा स्रोत मलेशिया है लेकिन उसने रेत के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस कदम से समुद्र को पाटने की महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरा करने में सिंगापुर को कठिनाईओं का सामना करना पड़ सकता है। उन योजनाओं में ट्यूस मेगा पोर्ट का विकास भी शामिल है, जो दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर टर्मिनल है। 1965 में सिंगापुर ने स्वतंत्रता के बाद से अपने भू-भाग में एक चौथाई की वृद्धि की है। ऐसा तटीय क्षेत्रों को रेत से भर कर किया गया है। पिछले साल सत्ता में आने वाले मलेशियाई प्रधान मंत्री मोहम्मद महाथिर ने 3 अक्टूबर को समुद्री रेत के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। सूत्रों ने कहा कि महाथिर इस बात से परेशान थे कि उनकी जमीन का इस्तेमाल अमीर पड़ोसी देश अपना आकार बढ़ाने के लिए कर रहा है। वह इस बात से भी चिंतित थे कि मलेशियाई अधिकारी इस व्यवसाय से लाभ कमा रहे थे।

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महाथिर के प्रेस सचिव एंडी शेजली अकबर ने पुष्टि की है कि सरकार ने पिछले साल रेत के निर्यात पर रोक लगा दी थी। यह रेत तस्करी पर रोक लगाने के लिए किया गया था। दूसरी ओर सिंगापुर ने प्रतिबंध पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। सिंगापुर और मलेशिया ब्रिटिश शासित मलाया का हिस्सा थे और 1965 में अलग-अलग देश बन गए। देश के परिसीमन और साझेदारी वाले संसाधनों, जैसे पानी पर विवादों के कारण दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव होते रहे हैं।

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रेत का कोई अंतरराष्ट्रीय मूल्य नहीं है, जिससे मलेशिया द्वारा प्रतिबंध के वित्तीय प्रभाव का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। समुद्र की रेत का उपयोग फिर से जमीन रिक्लेम करने के लिए किया जाता है, जबकि नदी की रेत का इस्तेमाल सीमेंट जैसे निर्माण सामग्री के साथ किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सिंगापुर ने 34.70 करोड़ डॉलर की लागत से 2018 में मलेशिया से 590 लाख टन रेत का आयात किया था। यह सिंगापुर के कुल रेत आयात का 97 फीसदी और मलेशिया की वैश्विक रेत बिक्री का 95 फीसदी है। सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि महाथिर ने 1990 के दशक में प्रधानमंत्री रहते हुए इसी तरह समुद्री रेत पर प्रतिबंध लगाया था और अब उन्होंने नदी और मुहाना के बालू निर्यात पर भी शिकंजा कसा है।