अब चीन कर रहा है ये काम, नाप रहा है एवरेस्ट की ऊंचाई, जानें क्यों

कुछ एक्स्पर्ट्स का कहना है कि 2015 में नेपाल में आए 7.8 स्केल के भूकंप से एवरेस्ट की ऊंचाए एक इंच घट गई होगी। क्या वास्तविक स्थिति है यही पता लगाने के लिए चीन ने सर्वेयरों का दल भेजा है। 2018 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन के कुल ग्लेशियर का पाँचवाँ हिस्सा खत्म हो चुका है।

नई दिल्ली। माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई फिर एक बार नापी जा रही है। 12 चीनी सर्वेयरों का दल विश्व की सबसे ऊंची चोटी को नापने गया हुआ है। इस टीम की रिसर्च का डेटा इस साल के अंत तक सार्वजनिक होने की संभावना है। एवरेस्ट की ऊंचाई के साथ साथ वहाँ की बर्फ, ईको-सिस्टम और ग्लेशियर कवरेज के बारे में आंकड़े जुटाये जाएँगे। इन सबसे पता चलेगा कि जलवायु परिवर्तन का एवरेस्ट पर असर पड़ा है।

1949 से अभी तक चीन ने 6 बार एवरेस्ट नापने का अभियान चलाया है। वैसे तो एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर मानी जाती है लेकिन इसके बारे में सन 50 के दशक से ही विवाद चल रहा है।

एवरेस्ट की ऊंचाई सबसे पहले सर्वे ऑफ इंडिया ने 1850 के दशक में नापी थी। इसके बाद 1854 के सर्वे ऑफ इंडिया के अभियान से माउंट एवरेस्ट की सटीक ऊंचाई को तय किया गया जो आज तक मान्य है। 2005 में चीन के एक अभियान दल ने एवरेस्ट की नई ऊंचाई 8844.43 मीटर का ऐलान किया। इस ऊंचाई में चोटी पर जमा बर्फ को नहीं नापा गया था।

एवरेस्ट की ऊंचाई घटाने पर नेपाल का एतराज

नेपाल ने इस ऐलान पर ऐतराज जताया और कहा कि ऊंचाई नापने में चोटी पर जमा बर्फ को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। नेपाल ने ऊंचाई नापने का अपना स्वयं का प्रोजेक्ट शुरू किया जिसके तहत डेटा एकत्र करने का काम पिछले साल ही पूरा हुआ है। इसकी फाइनल रिपोर्ट आना बाकी है।

अक्तूबर 2019 में जब चीनी प्रेसिडेंट शी जिन्पिंग नेपाल गए थे तब वहाँ घोषणा की गई थी कि नेपाल और चीन संयुक्त रूप से नई ऊंचाई और वैज्ञानिक रिसर्च के नतीजों की घोषणा करेंगे।

एवरेस्ट दुनिया के सर्वाधिक सक्रिय टेक्टोनिक ज़ोन यानी भूकंप वाली क्षेत्र में स्थित है। यहाँ भारतीय और यूरेशियन प्लेट्स एक दूसरे से मिलती हैं। ये प्लेट्स लगातार चलायमान हैं और एक दूसरे से टकराती रहती हैं। इस कारण एवरेस्ट की ऊंचाई के बदल जाने का अनुमान लगाया जाता रहा है।

कुछ एक्स्पर्ट्स का कहना है कि 2015 में नेपाल में आए 7.8 स्केल के भूकंप से एवरेस्ट की ऊंचाए एक इंच घट गई होगी। क्या वास्तविक स्थिति है यही पता लगाने के लिए चीन ने सर्वेयरों का दल भेजा है। 2018 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन के कुल ग्लेशियर का पाँचवाँ हिस्सा खत्म हो चुका है। इससे एशिया के 1.8 बिलियन लोगों को पानी की आपूर्ति पर खतरा पैदा हो चुका है।

नीलमणिलाल की रिपोर्ट