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Boeing डूबती नईया लगेगी पार? अहमदाबाद क्रैश से हिल गयी बोइंग के CEO की कुर्सी! करोड़ो में मिलती है सैलरी, जानें कौन है ऑर्टबर्ग और अब कैसे बचाएंगे कंपनी
Robert Kelly Ortberg Boeing CEO: Collins Aerospace और RTX जैसी दिग्गज कंपनियों में बतौर CEO अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के बाद उन्होंने बोइंग जैसी कंपनी की डूबती नैया को पार लगाने का बीड़ा उठाया।
Robert Kelly Ortberg Boeing CEO: ये हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं था, ये था दुनिया की सबसे बड़ी विमान निर्माता कंपनी बोइंग पर भरोसे का भीषण हमला। वो भरोसा, जिसने करोड़ों यात्रियों को आसमान में उड़ते वक्त हमेशा एक सुरक्षा कवच दिया। लेकिन अहमदाबाद से लंदन जा रहे 787 ड्रीमलाइनर की दुर्घटना ने एक बार फिर बोइंग के उस इतिहास को कुरेद दिया, जिसे कंपनी सालों से दबाने की कोशिश कर रही थी। 241 जिंदगियां, सपनों की उड़ान पर निकली थीं, लेकिन वो उड़ान मौत की गहराइयों में समा गई। और इस हादसे ने सीधे-सीधे बोइंग के नए CEO रॉबर्ट केली ऑर्टबर्ग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अगस्त 2024 में बोइंग ने पूरी दुनिया को चौंकाते हुए रॉबर्ट केली ऑर्टबर्ग को अपना नया CEO नियुक्त किया था। एक ऐसा नाम जो एविएशन इंडस्ट्री में अपनी पकड़ और अनुभव के लिए जाना जाता था। लेकिन शायद बोइंग को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही महीनों में उनके नए कप्तान को ऐसी आंधी का सामना करना पड़ेगा, जो कंपनी की साख को मिट्टी में मिलाने की धमकी दे रही है।
इंजीनियर से CEO तक का सफर और बोइंग की डूबती नैया
रॉबर्ट केली ऑर्टबर्ग का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। अमेरिका के आयोवा यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई करने वाला ये लड़का कभी सपनों में भी नहीं सोच सकता था कि एक दिन वो दुनिया की सबसे बड़ी विमान निर्माता कंपनी का मुखिया बनेगा। लेकिन मेहनत, लगन और किस्मत का खेल देखिए, वो रॉकवेल कॉलिन्स जैसी कंपनियों में अपनी काबिलियत दिखाते हुए एविएशन इंडस्ट्री के चमकते सितारे बन गए। Collins Aerospace और RTX जैसी दिग्गज कंपनियों में बतौर CEO अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के बाद उन्होंने बोइंग जैसी कंपनी की डूबती नैया को पार लगाने का बीड़ा उठाया। बोइंग ने ऑर्टबर्ग से जो उम्मीदें लगाई थीं, वो छोटी नहीं थीं। पिछले कुछ सालों से कंपनी लगातार विवादों में घिरी रही है—737 MAX हादसे, सेफ्टी ऑपरेशन्स में लापरवाही, सप्लाई चेन की गड़बड़ियां और अमेरिकी बाजार में घटती पकड़। ऑर्टबर्ग को CEO इसलिए बनाया गया क्योंकि वो एक ऐसे संकटमोचक माने जाते हैं, जो डूबते जहाज को किनारे तक ले आ सकते हैं। लेकिन किस्मत ने उनके सामने वो चुनौती खड़ी कर दी जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
787 ड्रीमलाइनर क्रैश: क्यों टूटा भरोसा
अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट का अचानक क्रैश हो जाना सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए एक सदमा था। 241 निर्दोष लोग जिनके चेहरे पर मुस्कान थी, अब उनकी याद में सिर्फ मातम बाकी रह गया। सबसे बड़ी बात ये थी कि ये हादसा बोइंग के उस विमान मॉडल का था जिसे कंपनी ने ‘फ्यूचर ऑफ एविएशन’ कहा था—787 ड्रीमलाइनर। वही ड्रीमलाइनर, जिसकी टेक्नोलॉजी पर बोइंग ने अपनी आधी से ज्यादा प्रतिष्ठा लगा रखी थी। हादसे की खबर सामने आते ही बोइंग के शेयर 5 फीसदी तक धड़ाम हो गए। एविएशन इंडस्ट्री में सनसनी फैल गई। सभी की निगाहें ऑर्टबर्ग पर टिक गईं। वो व्यक्ति जो संकटों से कंपनियों को निकालने के लिए मशहूर था, अब खुद संकट में फंस चुका था। दुनिया जानना चाहती थी—क्या अब भी बोइंग पर भरोसा किया जा सकता है?
कहां चूक गया बोइंग?
अभी तक हादसे की असली वजह सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियां अलग-अलग थ्योरी पर काम कर रही हैं—बर्ड स्ट्राइक, इंजन फेल्योर, खराब मेंटेनेंस, या पायलट की गलती। लेकिन सबसे डरावनी बात ये है कि ड्रीमलाइनर के शुरुआती दिनों में कंपनी ने सप्लायर्स पर बहुत अधिक निर्भरता दिखाई थी, ताकि लागत कम की जा सके। ये वही शुरुआती मॉडल था, जिसके लिए बोइंग ने दुनिया भर में अपने कंपोनेंट्स बनवाए थे और बाद में भारी रीवर्क करना पड़ा था। क्या ये उसी मॉडल का असर था? हालांकि शुरुआती जांच में ऐसा कोई बड़ा संकेत नहीं मिला कि विमान के डिजाइन या निर्माण में कोई मूलभूत खामी रही हो, लेकिन सवाल उठना लाजिमी था। बोइंग पहले भी 737 MAX हादसों के बाद कठघरे में खड़ी हो चुकी थी। अब फिर वही सिलसिला लौटता दिख रहा है।
ऑर्टबर्ग पर बढ़ता दबाव
इस हादसे के तुरंत बाद ऑर्टबर्ग ने पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना जाहिर की और एयर इंडिया को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। लेकिन सिर्फ संवेदनाएं इस बार काम नहीं आने वालीं। बोइंग के लिए ये हादसा उसके कारोबार, उसकी ब्रांड वैल्यू और उसकी बाजार में साख के लिए खतरे की घंटी बन चुका है। ऑर्टबर्ग और बोइंग की कमर्शियल हेड स्टेफनी पोप ने पेरिस एयर शो में अपनी मौजूदगी कैंसिल कर दी। पेरिस एयर शो, जहां से बोइंग को करोड़ों डॉलर के ऑर्डर मिलने वाले थे, वहां से हट जाना बताता है कि कंपनी को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी पड़ रही हैं। अब सवाल नए बिजनेस डील्स का नहीं, बल्कि अपनी साख बचाने का है।
क्या बोइंग फिर से उठ पाएगा?
बोइंग का इतिहास देखेंगे तो ये कंपनी हर बार संकट से निकली है। 737 MAX हादसों के बाद भी कंपनी ने धीरे-धीरे वापसी की थी। हाल ही में कतर एयरवेज और अन्य इंटरनेशनल कंपनियों से मिले बड़े ऑर्डर इस बात का सबूत थे कि बाजार का भरोसा दोबारा बन रहा था। लेकिन इस ताजा हादसे ने उस भरोसे पर फिर से चोट कर दी है। रॉबर्ट केली ऑर्टबर्ग इस वक्त सबसे मुश्किल चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनके पास अनुभव है, क्षमता है और नेतृत्व का जज़्बा भी है, लेकिन क्या वो बोइंग को इस बार संकट से बाहर निकाल पाएंगे? इस सवाल का जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा।
दुनिया के लिए क्या संदेश गया?
ये हादसा सिर्फ बोइंग का संकट नहीं है, ये पूरी एविएशन इंडस्ट्री के लिए चेतावनी है। यात्रियों का भरोसा, एयरलाइंस का निवेश, और टेक्नोलॉजी में सुरक्षा—ये तीनों एक साथ जुड़े होते हैं। अगर इनमें से एक भी कमजोर पड़ा, तो पूरी इंडस्ट्री हिल जाती है। भारत के लिए भी ये हादसा एक चेतावनी है कि विदेशी कंपनियों के भरोसे पूरी तरह से आंख मूंदकर नहीं चल सकते।
अभी तो शुरुआत है…
787 ड्रीमलाइनर हादसे की जांच आगे क्या खुलासे करती है, ये देखना बाकी है। बोइंग को इस बार ज्यादा सतर्क रहना होगा, क्योंकि इस बार सिर्फ शेयरहोल्डर्स नहीं, बल्कि पूरी दुनिया सवाल पूछ रही है। और इस बार जवाब आसान नहीं होंगे। रॉबर्ट केली ऑर्टबर्ग के लिए ये उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा है। या तो वो इतिहास में उस शख्स के तौर पर याद किए जाएंगे जिसने बोइंग को डूबने से बचाया… या फिर उस CEO के तौर पर जिनके कार्यकाल में बोइंग हमेशा के लिए ‘ड्रीमलाइनर’ से ‘नाइटमेयर’ बन गई।


