खूंखार आतंकवादी बगदादी खत्म, पर जंग जारी

Published by seema Published: November 1, 2019 | 3:17 pm

खूंखार आतंकवादी बगदादी खत्म, पर जंग जारी

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दीपावली वाले दिन घोषणा की कि पश्चिोत्तर सीरिया में एक सैन्य कार्रवाई के दौरान खूंखार आतंकवादी अल बगदादी मारा गया। सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन ने अल बगदादी के मारे जाने का स्वागत किया है और इसके लिए अमेरिका की कोशिशों को सराहा है। इन देशों का यह भी कहना है कि वे अपने सहयोगी अमेरिका के साथ मिल कर आतंकवाद के खिलाफ युद्ध जारी रखेंगे। अल बगदादी के मारे जाने से आईएस का खतरा खत्म नहीं हुआ है भले ही ट्रंप ऐसा मानते हों। दरअसल २००६ और २०१० में इराक में आईएस के अलग-अलग स्वरूपों के मुखिया ढेर किए गए लेकिन आतंकवाद खत्म नहीं हुआ, बस चेहरे बदल गए।

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बगदादी कैसे बना आतंक का सबसे बड़ा चेहरा
अबू बक्र अल-बगदादी आईएस का मुखिया और स्व-घोषित खलीफा था। उसके नेतृत्व में आईएस ने इराक और सीरिया में एक बड़े इलाके को अपने कब्जे में ले लिया। इस इलाके में आईएस ने कट्टरपंथी इस्लाम को बड़ी क्रूरता से लागू किया और इस्लामिक कानून (शरिया) से चलने वाली सरकार की स्थापना की। धीरे धीरे कई देशों के भटके हुए नौजवान आईएस की तरफ खिंचे चले आए और उससे जुड़ गए. दुनिया में पनप रहे कई आतंकवादी संगठन भी आईएस से जुड़ गए और उन्होंने बगदादी के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया। इसके बाद बगदादी के नेतृत्व में आईएस ने इराक और सीरिया के अलावा दुनिया में कई हिस्सों में आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया और बगदादी पूरी दुनिया के लिए आतंक का सबसे डरावना चेहरा बन गया। अमेरिका और उसके साथी देशों ने आईएस के खिलाफ जंग छेड़ दी लेकिन सालों तक वे उस समूह पर काबू नहीं पा पाए। लगभग पांच साल की लड़ाई के बाद मार्च 2019 में सीरिया में आईएस के नियंत्रण में रहे आखिरी इलाके को मुक्त कराया गया लेकिन आईएस के लड़ाके आज भी कई जगहों पर फैले हुए हैं और दुनिया के लिए एक चुनौती बने हुए हैं। आईएस के टॉप ४२ नेताओं में से ३४ मार डाले गए फिर भी आईएस पस्त नहीं हुआ।

व्यक्तिगत जीवन
माना जाता है कि बगदादी का असली नाम इब्राहिम अव्वाद इब्राहिम अल-बद्री था और उसका जन्म मध्य इराक के शहर समाराई में एक सुन्नी अरब परिवार में हुआ था। कुछ जानकारों का मानना है कि बगदादी बचपन से मस्जिदों में बहुत समय बिताता था और बहुत जल्दी कुरान और शरिया का जानकार बन गया था। स्कूल खत्म होने की बाद भी उसने इस्लामी तालीम ही हासिल की और बगदाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट भी की। फिर कुछ वर्षों तक उसने एक इमाम के तौर पर काम किया। आतंकवाद के रास्ते वह कैसे आया, इस बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जिहाद की तरफ उसका झुकाव छात्र जीवन में ही हो गया था। संभवत: इसी दौरान उसने सलाफी पंथ के साथ जाने का फैसला किया। 2003 में जब अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर हमला हुआ और इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन का तख्ता पलट किया गया, उसके बाद बगदादी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर एक छोटे से बागी समूह की स्थापना की। इस समूह ने अमेरिकी और अन्य देशों के सैनिकों पर हमला करना शुरू किया। 2004 में अमेरिकी सैनिकों ने उसे हिरासत में भी लिया और दक्षिणी इराक में कैंप बक्का में रखा। लेकिन उसे छोटे स्तर का खतरा समझ कर 10 महीनों में रिहा कर दिया गया। इसके बाद वो अल-कायदा की इराकी यूनिट (एक्यूआई) के संपर्क में आया और 2006 में एक्यूआई के संगठन मुजाहिद शूरा कॉउंसिल से जुड़ गया। उसी साल यही संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक में तब्दील हो गया और बगदादी उसकी सलाहकार शूरा कॉउंसिल का हिस्सा बन गया। 2010 में इस संगठन के नेता अबू उमर अल-बगदादी और उसके एक करीबी सहयोगी की एक अमेरिकी हमले में मौत हो गई और तब बगदादी को इसका प्रमुख बनाया गया। माना जाता है कि बगदादी इस संगठन को हार के कगार से वापस ले कर आया, उसने इसे फिर से खड़ा किया और एक घातक समूह में तब्दील किया। 2013 में इस संगठन ने सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-अस्साद के खिलाफ विद्रोह से खुद को जोड़ लिया और सीरिया में भी लड़ाके भेजकर वहां अल-नुस्रा नामक संगठन की स्थापना की। उसी साल अप्रैल में बगदादी इराक और सीरिया में काम रहे अपने लड़ाकों को एक बैनर के तले ले आया और उसने आईएस की स्थापना की। अगले एक साल तक उसके लड़ाकों ने एक के बाद एक कई इराकी शहरों को अपने कब्जे में ले लिया और जून 2014 में आईएस ने तथाकथित खिलाफत यानी खलीफा के शासन की स्थापना की घोषणा की। बगदादी अब खुद को खलीफा कहता था।

इसके बाद आईएस और अमेरिका की अगुवाई वाले गठबंधन की सेनाओं के बीच जंग और वीभत्स हो गई। हजारों लोग मारे गए, लाखों बेघर हो गए, शहर के शहर तबाह हो गए और इस इलाके में स्थित कई इमारतें, जो ऐतिहासिक धरोहर थीं, नष्ट हो गईं। सभी शहरों को आईएस से मुक्त कराने में गठबंधन सेनाओं को पांच साल लग गए। हालांकि आईएस के पास अब वैसा इलाका नहीं है जैसा कभी था लेकिन उसके लड़ाके आज भी खतरा बने हुए हैं। अमेरिकी सरकार ने बगदादी के सिर पर ढाई करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा था और इस लंबी जंग के दौरान कई बार उसके मारे जाने की खबर आई। जून 2017 में रूस ने कहा कि संभव है कि बगदादी उसके हवाई हमले में मारा गया हो लेकिन तीन महीने बाद बगदादी का एक संदेश सामने आया और उसकी मौत की खबर पर संदेह बन गया।

आईएस तो जिंदा है
मैनपावर और पैसे की ताकत: आईएस के खिलाफ लड़ रहे गठबंधन के अनुसार आईएस के करीब १४ हजार सक्रिय लड़के सीरिया और इराक में हैं। असलियत में आईएस के लोगों की सही संख्या किसी को पता नहीं है और सब आंकड़े अनुमान पर आधारित हैं। लड़ाकों के अलावा इस संगठन के पास जासूस, मुखबिर, ट्रांसपोर्टर, व्यापारी आदि तरह तरह के काम करने वाले सदस्य हैं। इस संगठन के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। तेल के तमाम कुओं पर इसका कब्जा रहा है, अपने नियंत्रण वाले इलाकों में जनता से खूब वसूली की गई है, ड्रग्स की तस्करी से मोटी कमाई है, इसके अलावा कई अन्य बिजनेस भी इसके नियंत्रण में हैं। सो पैसे और मानव संख्या के बल पर ये संगठन कोई भी गुल खिला सकता है। नए कमांडर : आईएस में कई लेवल के कमांडर हैं और लगातार नए जिहादियों की भर्ती भी होती रहती है। आईएस के कब्जे वाले इलाकों के बच्चों और कम उम्र के युवाओं ने आईएस के अलावा कोई और जिंदगी देखी ही नहीं है सो उनका पूरी तरह ब्रेनवाश हो चुका है और यही लोग पैदल सेना और कमांडरों की कमी को पूरा करेंगे। अल बगदादी और उसके खास गुर्गे अबू अल हसन अल मुहाजिर के मारे जाने के बाद संगठन की कमान अब्दुल्ला करदश के हाथों में जाएगी जो १५ साल से बगदादी का करीबी रहा है।