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Sheikh Hasina: कौन हैं शेख हसीना, जिन्हें छात्र नेताओं की वजह से देना पड़ा था प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा
Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की सरकार छात्र नेताओं की वजह से गिर गई। जिसकी वजह से उन्हें देश छोड़कर भारत आना पड़ा था। जानें इनके बारे में पूरी जानकारी।
Sheikh Hasina
Sheikh Hasina: पड़ोसी देश बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। क्योंकि इनकी सरकार गिराने वाले छात्र नेताओं ने बांग्लादेश में नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। जिसके बाद से ऐसा कहा जा रहा है कि क्या शेख हसीना फिर कभी बांग्लादेश की सत्ता में वापसी कर पाएंगी या नहीं। जानकारी के लिए बता दें कि शेख हसीना बांग्लादेश एक संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हैं। जो बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति थे।
शेख हसीना की बात करें तो वह बांग्लादेश में अब तक के इतिहास में सबसे लम्बे समय तक सेवा में रहने वाली पहली प्रधानमंत्री थी। वहीँ दुनिया में सबसे लम्बे समय तक सेवा में काम करने वाली पहली महिला थीं। इनकी सरकार साल 2024 में छात्र नेताओं के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद गिर गई थी। जिसके बाद शेख हसीना इस्तीफ़ा देकर भारत आ गई थीं।
कौन हैं शेख हसीना
शेख हसीना का जन्म 28 सितंबर 1947 को पूर्वी बंगाल के तुंगीपारा के एक बंगाली मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके पिता बंगाली राष्ट्रवादी नेता शेख मुजीबुर रहमान थे और उनकी माँ बेगम फाजिलतुन्नेस मुजीब थीं। शेख हसीना का बचपन तुंगीपारा में उनकी मां और दादी की देखरेख में हुआ था। बाद में इनका पूरा परिवार ढाका चला गया था। जहाँ 1954 में जब इनके पिता सरकार में मंत्री बने तो ये 3 मिंटो रोड पर रहते थे। राजनीति के अलावा इनके पिता ने कुछ कंपनियों में भी काम किया है। अपने कई इंटरव्यू और भाषणों में शेख हसीना ने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पिता पाकिस्तानी सरकार द्वारा राजनीतिक कैदी के रूप में भी रखे जा सकते हैं।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “उदाहरण के लिए, 1954 में संयुक्त मोर्चा मंत्रालय के चुने जाने के बाद, और हम नंबर 3 मिंटो रोड में रह रहे थे, एक दिन, मेरी माँ ने हमें बताया कि पिताजी को पिछली रात गिरफ़्तार कर लिया गया था। तब हम उनसे जेल में मिलने जाते थे और हमें हमेशा एहसास होता था कि उन्हें इतनी बार जेल में इसलिए रखा गया क्योंकि वे लोगों से प्यार करते थे।" कई जगह इस बात का भी जिक्र हुआ है कि शेख हसीना और उनके भाई बहन अपने पिता के साथ कम वक्त बिता पाए हैं क्योंकि वो ज्यादातर राजनीति में व्यस्त रहते थे।
शेख हसीना की शिक्षा और वैवाहिक जीवन
शेख हसीना की शुरूआती पढ़ाई तुंगीपारा गाँव के एक प्राथमिक विद्यालय में ही हुआ है। लेकिन जब उनका परिवार ढाका चला गया तो इन्होने अजीमपुर गर्ल्स स्कूल और बेगम बदरुन्नसा गर्ल्स कॉलेज से पढ़ाई की। ईडन कॉलेज से इन्होने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की है। इसी कॉलेज से साल 1966 और 1967 में ये छात्र संघ की उपाध्यक्ष चुनी गई थीं। अगर इनके वैवाहिक जीवन की बात करें तो शेख हसीना ने 1967 में एम.ए. वाजेद मिया शादी की थी। जोकि डरहम से भौतिकी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त एक बंगाली परमाणु वैज्ञानिक थे। शेख हसीना ने ढाका विश्वविद्यालय से बंगाली साहित्य से भी ग्रेजुएशन किया है।
शेख हसीना के परिवार की हत्या
15 अगस्त 1975 को बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान समेत उनके पूरे परिवार की हत्या कर दी गई। केवल हसीना, उनके पति एम.ए. वाजेद मिया, उनकी बहन शेख रेहाना और उनके बच्चे बच गए, क्योंकि वे उस समय यूरोप की यात्रा पर थे। हत्या के बाद, हसीना और उनका परिवार पश्चिम जर्मनी में बांग्लादेशी राजदूत के घर में शरण लेने को मजबूर हो गया। बाद में, भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा दी गई राजनीतिक शरण स्वीकार कर वे भारत आ गए और छह साल तक नई दिल्ली में निर्वासन में रहे।
उस दौरान बांग्लादेश में तत्कालीन सैन्य शासक जियाउर रहमान ने हसीना की वापसी पर रोक लगा दी थी। हालांकि, 16 फरवरी 1981 को शेख हसीना को बांग्लादेश अवामी लीग का अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद 17 मई 1981 को वे बांग्लादेश लौटीं, जहां हज़ारों अवामी लीग समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया। अपनी वापसी के साथ ही उन्होंने अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने और लोकतंत्र बहाल करने का संकल्प लिया। हसीना बाद में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं और देश के विकास व स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।