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World Famous Spyware Company : स्पाईवेयर का गढ़ है यूरोप, यूके, अमेरिका और इजरायल

World Famous Spyware Company: यूनाइटेड किंगडम में सर्विलांस उपकरण बनाने और एक्सपोर्ट करने वाली 104 कम्पनियाँ हैं और ये सब विदेशी सरकारों और कार्पोरेशंस से डील करती हैं।

Neel Mani Lal

Neel Mani LalWritten By Neel Mani LalShivaniPublished By Shivani

Published on 24 July 2021 12:06 PM GMT

World Famous Spyware Company : स्पाईवेयर का गढ़ है यूरोप, यूके, अमेरिका और इजरायल
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World Famous Spyware Company: स्पाईवेयर बनाने और बेचने में इजरायल (Israel Spyware) के अलावा, यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोप (Europe) के देश आगे हैं। यूनाइटेड किंगडम में ही सर्विलांस उपकरण बनाने और एक्सपोर्ट करने वाली 104 कम्पनियाँ हैं और ये सब विदेशी सरकारों और कार्पोरेशंस से डील करती हैं। 122 कंपनियों के साथ सिर्फ अमेरिका नंबर वन पर है।

Government Communication Headquarter का दफ्तर

चेल्टनहम में यूके की सर्विलांस एजेंसी 'गवर्नमेंट कम्युनिकेशन्स हेडक्वार्टर' (जीसीएचक्यू) का विशालकाय दफ्तर है। बताया जाता है कि ये दुनिया की सबसे आक्रामक खुफिया एजेंसियों में से एक है जो पूरे विश्व की जासूसी करती है। जीसीएचक्यू (GSHQ) की उपस्थिति के चलते चेल्टनहम जैसा छोटा सा कस्बा सर्विलांस और साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security) के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों का हब बन गया है।


जीसीएचक्यू पहले बहुत गोपनीयता से काम करती थी लेकिन 2013 में सीआईए के पूर्व ऑपरेटर एडवर्ड स्नोडेन ने इसकी गतिविधियों का पर्दाफाश कर दिया फिर मजबूरन जीसीएचक्यू को सामने आना पड़ा था। इसका एक नतीजा ये भी हुआ कि जीसीएचक्यू ज्यादा खुलेपन के साथ प्राइवेट कंपनियों के साथ काम करने लग गई।

दुनिया की बड़ी हथियार निर्माता कम्पनियों के दफ्तर

चेल्टनहम में आज विश्व की दिग्गज हथियार निर्माता कंपनियों के भी दफ्तर हैं। द इंटरसेप्ट वेबसाइट के अनुसार ये कंपनियां बेहद गोपनीय तरीके से काम करती हैं और मीडिया को कोई जानकारी नहीं दी जाती है। लेकिन 'एल 3 टीआरएल टेक्नोलॉजी' कम्पनी (L-3 TRL Technology Company) ने कुछ जानकारियां शेयर की हैं। इस कंपनी ने बताया है कि वह इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के उपकरण उपलब्ध कराती है और इनमें संचार सिग्नल जाम करना और खुफिया जानकारी हासिल करने वाले आइटम शामिल हैं। ये कंपनी अपने ग्राहकों के बारे में कुछ नहीं बताती है लेकिन बताया जाता है कि इसके यूएई से ताल्लुक हैं।

सरकारी रिकार्ड्स के अनुसार यूनाइटेड किंगडम ने पिछले एक दशक में यूनाइटेड किंगडम ने 9.9 अरब डालर कीमत के हथियार और अन्य उपकरण यूएई को बेचे हैं और इन उपकरणों में टेलिकॉम जासूसी (Telecom Jasoosi) और फ़ोन व कंप्यूटर को टारगेट करने वाले सॉफ्टवेयर शामिल हैं। यूके की एक अन्य कंपनी है 'कम्सऑडिट' जिसका टॉप प्रोडक्ट 'स्पेक्ट्रा ब्लैक' नामक सर्विलांस सिस्टम है। ये एक पोर्टेबल डिवाइस है जो सेलफोन कॉल और अन्य वायरलेस कम्युनिकेशन को मॉनिटर करता है।


2013 में एक ग्लोबल समझौता हुआ था जिसके तहत सर्विलांस और हैकिंग टेक्नोलॉजी की बिक्री को कंट्रोल करने की बात कही गयी थी। इस समझौते को 'वास्सेनर अरेंजमेंट' नाम दिया गया था और इस पर 43 देशों ने हस्ताक्षर किये थे। इन देशों में अमेरिका के अलावा यूरोप के अधिकांश देश शामिल थे। इस समझौते का उद्देश्य था कि दमनकारी और तानाशाही सरकारों को जासूसी उपकरण की बिक्री पर रोक लगे ताकि ऐसी ताकतें मानवाधिकारों का उल्लंघन न करने पायें। इस समझौते का कोई फायदा नहीं होना था क्योंकि ये कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, और यही हुआ, यूनाइटेड किंगडम ही मानवाधिकार हनन के आरोपित देशों की सरकारों को जासूसी वाले उपकरण बेच रहा है।

74 देशों ने 18 सॉफ्टवेयर कम्पनियों से स्पाईवेयर खरीदें

ग्लोबल स्पाईवेयर मार्किट इंडेक्स के अनुसार 2015 के बाद से 74 देशों ने 18 कंपनियों से स्पाईवेयर टेक्नोलॉजी खरीदी है या इस्तेमाल की है। यूरोप, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और इजरायल में ऐसे स्पाईवेयर बनाने वाली 78 फीसदी कम्पनियां स्थित हैं।

स्पाईवेयर के ग्राहकों में से 55 फीसदी निरंकुश सरकारें हैं। सिर्फ 7 फीसदी ग्राहक पूर्ण लोकतान्त्रिक सरकारें हैं। ब्रिटिश-जर्मन कंपनी फिनफिशर के पास सबसे ज्यादा 34 ग्राहक हैं। इसके बाद 25 ग्राहकों के साथ सर्कल्स कंपनी है जबकि 23 ग्राहकों के साथ एनएसओ ग्रुप तीसरे स्थान पर है। स्पाईवेयर के जरिये सबसे ज्यादा जासूसी सामाजिक एक्टिविस्टों और राजनीतिक असंतुष्टों की की जाती है। ऐसे करने वाले 25 देश हैं।

Shivani

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