असम में NRC लिस्ट के दो साल बाद भी लाखों लोग परेशान, तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं बन सका आधार कार्ड

Aadhar Card News Today Hindi : असम में काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो आधार कार्ड बनवाने के लिए काफी दिनों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं मगर उनकी समस्या का समाधान होता नहीं दिख रहा है।

Written By :  Anshuman Tiwari
Published By :  Shivani
Update: 2021-08-30 09:15 GMT

कार्यालय के बाहर खड़े लोग (Photo Social Media)

Aadhar Card News Today Hindi : असम में एनआरसी की फाइनल लिस्ट निकालने के दो साल बाद (2 Years Of Assam NRC)  भी लाखों लोग आधार कार्ड बनवाने के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं। केंद्र सरकार की ओर से असम में 2019 में 31 अगस्त को एनआरसी की फाइनल लिस्ट निकाली गई थी। इस लिस्ट के जरिए यह तय किया गया था कि असम में रहने वाले लोगों में कौन भारत का नागरिक है और कौन नहीं। इस लिस्ट को लेकर विवाद भी पैदा हुआ था।

इस लिस्ट में करीब आठ लाख लोगों का नाम शामिल किया गया था मगर इन दो साल का समय बीत जाने के बाद भी आज तक इन लोगों का आधार कार्ड नहीं बन सकता है। आधार कार्ड न बन पाने के कारण ये लोग तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं। इन लोगों को सरकारी कॉलेजों में दाखिला, ट्रेन व फ्लाइट की बुकिंग और राशन कार्ड आदि बनवाने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर बेहाल

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, असम में काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो आधार कार्ड बनवाने के लिए काफी दिनों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं मगर उनकी समस्या का समाधान होता नहीं दिख रहा है। आईआईटी बॉम्बे से पीएचडी की पढ़ाई करने वाले भानु उपाध्याय का कहना है कि वे करीब डेढ़ साल से आधार कार्ड बनवाने के लिए इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं मगर अभी तक उनकी समस्या नहीं सुलझाने सकी है। उन्होंने कई बार आधार आवेदन केंद्रों के चक्कर काटे हैं।


इसके साथ ही टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के अलावा कई ईमेल भी किए हैं मगर अभी तक उनका आधार कार्ड नहीं बन सका है। मूल रूप से नेपाल के रहने वाले भानु मौजूदा समय में असम में रहते हैं। उनका कहना है कि आधार कार्ड न बनने से वे काफी परेशान है क्योंकि उन्हें अब नौकरियों के लिए विभिन्न संस्थानों में आवेदन करना है। आधार कार्ड न बन पाने की वजह से उनका आवेदन रद्द कर दिया जाएगा।

इस समस्या का सामना करने वाले वे अकेले शख्स नहीं हैं। ऐसे लोगों की काफी ज्यादा संख्या है जो राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की लिस्ट में शामिल होने के बावजूद आधार कार्ड बनवाने के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं।

सरकारी स्तर पर हो रही लापरवाही

इस बाबत जानकार सूत्रों का कहना है कि एनआरसी की लिस्ट में शामिल होने के लिए करीब 27 लाख लोगों ने बायोमेट्रिक्स रजिस्ट्रेशन कराया था। बाद में जारी की गई एनआरसी की लिस्ट में 19 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं था जबकि करीब 8 लाख लोगों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है। राज्य सरकार के अधिकारी भी इस मामले में सरकारी स्तर पर लापरवाही की बात स्वीकार करते हैं।


उनका मानना है कि एनआरसी की प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी है जिसके कारण तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से इस बाबत रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को चिट्ठी भी लिखी गई है मगर अभी तक इस समस्या के समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

दो साल बाद भी नहीं उठाया कदम

सुप्रीम कोर्ट की ओर से 2018 में कहा गया था कि जिन लोगों के नाम एनआरसी की लिस्ट में शामिल नहीं किए गए हैं, उन्हें दोबारा बायोमेट्रिक देना होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 31अगस्त, 2019 से पहले इस काम को भी पूरा कर लिया गया था। सरकार की ओर से तय किए गए नियमों के मुताबिक लिस्ट में शामिल किए गए सभी लोगों का आधार कार्ड बनाया जाना था मगर दो साल का समय व्यतीत बीत जाने के बावजूद इस दिशा में अभी तक कामयाबी नहीं मिल सकी है।

राज्य सरकार की ओर से यूआईडीएआई को 27 लाख से अधिक लोगों की बायोमेट्रिक विवरण भी दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया है। एनआरसी की लिस्ट में शामिल लोगों की मांग है कि सरकार को जल्द से जल्द इस दिशा में कदम उठाना चाहिए ताकि उनकी समस्याओं का निवारण हो सके।

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