बिहार की सियासत में भूचाल! नीतीश ने BJP को बेच डाला? कन्हैया कुमार ने किया सनसनीखेज खुलासा
Bihar Politics: बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, और हर पार्टी अब अपना दांव-पेच बिछा रही है। लेकिन इस चुनावी समर से पहले कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने ऐसा राजनीतिक बम फोड़ा है जिसकी धमक सिर्फ बिहार ही नहीं, दिल्ली तक सुनाई देने लगी है।
Bihar Politics: पटना के सियासी गलियारों में इन दिनों न नींद है, न चैन। विधानसभा चुनाव की आहट के साथ बिहार की राजनीति एक विस्फोटक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। शुक्रवार को एक बयान ने न सिर्फ बीजेपी की रणनीति की पोल खोल दी, बल्कि नीतीश कुमार की कुर्सी पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया। बयान आया कांग्रेस के तेजतर्रार नेता कन्हैया कुमार की तरफ से—और इसने बिहार की राजनीति को उलट-पलट कर रख दिया।
बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, और हर पार्टी अब अपना दांव-पेच बिछा रही है। लेकिन इस चुनावी समर से पहले कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने ऐसा राजनीतिक बम फोड़ा है जिसकी धमक सिर्फ बिहार ही नहीं, दिल्ली तक सुनाई देने लगी है। शुक्रवार को एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि अगर महागठबंधन को बहुमत मिला, तो मुख्यमंत्री सिर्फ और सिर्फ तेजस्वी यादव होंगे। कोई "अगर-मगर" नहीं, कोई समझौता नहीं। कन्हैया ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी जानबूझकर महागठबंधन के सीएम चेहरे का मुद्दा उछाल रही है ताकि असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
तेजस्वी की ताजपोशी तय! कांग्रेस ने RJD को दी खुली छूट
कन्हैया कुमार ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मुख्यमंत्री का पद किसे मिलेगा, यह संख्या बल पर निर्भर करता है और इसमें RJD सबसे आगे है। उन्होंने कहा, "जिसके पास ज्यादा विधायक होंगे, उसी की पार्टी से मुख्यमंत्री बनेगा।" यानी कांग्रेस ने तेजस्वी को लेकर अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। महागठबंधन में नेतृत्व को लेकर किसी भी तरह का झोल नहीं होगा। अब ये बयान आने के बाद यह तय माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव ही महागठबंधन की ओर से सीएम चेहरा होंगे। कांग्रेस ने खुद को ‘सहायक शक्ति’ की भूमिका में सीमित रखते हुए इस चुनाव को पूरी तरह RJD की अगुवाई में लड़ने का मन बना लिया है। यानी बिहार की राजनीति में अगर नीतीश का युग समाप्त होता है, तो अगला पन्ना तेजस्वी के नाम लिखा जाएगा।
नीतीश के खिलाफ बीजेपी की 'हिटलर वाली रणनीति'?
कन्हैया कुमार यहीं नहीं रुके। उन्होंने नीतीश कुमार की कुर्सी पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि जैसे ही बीजेपी को मौका मिलेगा, वह नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा देगी। कन्हैया का कहना है कि बीजेपी की पुरानी रणनीति रही है—"पहले सहयोगी बनो, फिर निगल जाओ"। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बीजेपी ने यह फॉर्मूला पहले ही आजमा लिया है, और अब बिहार भी उसी दिशा में बढ़ता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी में खुद यह स्पष्ट नहीं है कि उनका सीएम चेहरा कौन होगा—नीतीश या कोई और। दूसरी तरफ महागठबंधन पूरी तरह स्पष्ट है कि अगला मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव होंगे। इस तुलना के ज़रिए कन्हैया ने बीजेपी की अंदरूनी खींचतान और सत्ता की भूख को उजागर करने की कोशिश की।
शाह का 'आपदा में अवसर' मॉडल! बिहार को भी बनाया निशाना?
कन्हैया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमित शाह आपदा में अवसर खोजने में माहिर हैं। "जैसा महाराष्ट्र में किया, वैसा ही प्लान बिहार में भी चल रहा है।" उनका इशारा स्पष्ट था—बीजेपी पहले सरकार में साझेदारी करती है, फिर पीठ में छुरा घोंपती है। इतना ही नहीं, उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार पर नौकरशाही के तानाशाही नियंत्रण का आरोप भी लगाया। कन्हैया बोले कि बिहार में इस समय अफसरशाही लोकतंत्र को निगल रही है, और आम आदमी की आवाज़ दबाई जा रही है।
महागठबंधन में 'कार' की मिसाल! सबका रोल अहम
कन्हैया कुमार ने महागठबंधन की तुलना एक कार से करते हुए कहा—"जैसे क्लच, ब्रेक और रियरव्यू मिरर का अपना-अपना रोल होता है, वैसे ही महागठबंधन में हर दल की अपनी अहमियत है।" उन्होंने यह साफ किया कि सीट बंटवारे से ज्यादा प्राथमिकता गठबंधन की एकता और मुद्दों की है। कांग्रेस अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएगी, लेकिन नेतृत्व RJD के हाथ में होगा।
क्या बिहार का 'नीतीश अध्याय' अब इतिहास बनने वाला है?
कन्हैया के इस बयान ने सियासी हलकों में भूचाल ला दिया है। क्या वाकई नीतीश कुमार का अध्याय अब इतिहास बनने वाला है? क्या तेजस्वी यादव के हाथों सत्ता की बागडोर जाना तय है? और क्या बीजेपी बिहार में फिर से वही "गुपचुप सत्ता परिवर्तन" का स्क्रिप्ट दोहराने वाली है? इन सवालों के जवाब तो आने वाले हफ्तों में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति अब आग की लपटों से होकर गुजरेगी। और उस आग को सबसे पहले भड़काया है कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने—जिसे बुझाने में अब पूरी बीजेपी को नानी याद आ सकती है।