जब 1962 के बाद भारत को कमजोर समझ बैठा था पाकिस्तान…जानिये क्या है 1965 के विध्वंस की पूरी कहानी
1965 India Pakistan War: 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध की पूरी कहानी जानिए। ऑपरेशन जिब्राल्टर, ग्रैंड स्लैम, खेमकरण की लड़ाई और 22 दिन चले युद्ध की अहम घटनाओं को समझें।
India Pakistan War 1965 (Image Credit-Social Media)
India Pakistan War 1965: आज से ठीक 61 साल पहले जब पाकिस्तान की एक गलतफहमी ने उसे भारी नुकसान पहुंचाया था। 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के कारण पाकिस्तान को लगने लगा कि भारतीय सेना की स्थिति अब कमजोर हो गई है। उसके बाद पाकिस्तान ने कश्मीरियों को भारत के खिलाफ कर नई रणनीति बनानी शुरू की, जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति पैदा की और 22 दिन तक भीषण विध्वंस का दौर चला। जिसके बाद आज वह दिन इतिहास के पन्नो में दर्ज हो चुका है। आइये जानते हैं भारत पाकिस्तान युद्ध की पूरी जानकारी-
भारत पाकिस्तान के बीच तनाव का कारण
दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य कारण 1947 के विभाजन से जुड़ा हुआ है। जहां एक तरफ ऐतिहासिक कड़वाहट और कश्मीर मुद्दा तनाव बढ़ाता है वहीं दूसरी तरफ सीमा पार आतंकवाद ने रिश्ते को अधिक जटिल और संवेदनशील बना दिया है। पाकिस्तान कश्मीर को अपना हिस्सा मानता है जो इस तनाव को अधिक बढ़ता है।
धर्म के आधार पर हुए इस बटवारे ने दोनों तरफ लाखों- करोड़ों लोगों की जान ली साथ ही करोड़ों लोग विस्थापित हुए। इसके अलावा सीमा पार आतंकवाद, नियंत्रण रेखा पर संघर्ष, सिन्धु जल संधि को लेकर मतभेद और 1947, 1965, 1971, तथा 1999 के युद्ध ने दोनों देशों के रिश्तों में अविश्वास और कड़वाहट को अधिक गहरा कर दिया।
'ऑपरेशन जिब्राल्टर' जिससे सेना हुई सतर्क
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगस्त 1965 में पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' के तहत हजारों हथियारबंद घुसपैठियों को गुप्त रूप से कश्मीर में भेजा। पाकिस्तान का मकसद स्थानीय कश्मीरी जनता को भारत के खिलाफ भड़काना और विद्रोह खड़ा करना था। हालांकि, कश्मीरी नागरिकों ने घुसपैठियों का साथ देने से साफ इनकार कर दिया और तुरंत भारतीय सेना को इसकी सूचना दे दी।
22 दिन तक चले युद्ध की पूरी कहानी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1965 का भारत- पाकिस्तान युद्ध 1 सितम्बर से 22 सितम्बर तक लड़ा गया। जब भारत ने पाकिस्तान द्वारा किया गया जम्मू-कश्मीर के अखनूर क्षेत्र पर 'ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम' का करारा जवाब दिया। जिस कारण भारत ने 6 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार करते हुए लाहौर सेक्टर में मोर्चा खोल दिया। इसके बाद लड़ाई जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के कई मोर्चों तक पहुंच गई।
पंजाब के खेमकरण में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई आधुनिक पैटन टैंकों को नष्ट कर बड़ी सफलता हासिल की। वहीं सियालकोट और चाविंडा सेक्टर में भी भीषण टैंक युद्ध हुए। दोनों देशों की सेनाओं को भारी नुकसान हुआ। युद्ध के दौरान भारतीय सैनिक गंभीर परिस्थितियों में भी पीछे नहीं हटे। बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के बाद 22 सितंबर 1965 को युद्धविराम लागू हुआ। आज यह युद्ध सैन्य घटनाओं में महत्वपूर्ण माना जाता है।
युद्ध के बाद भारत को क्या मिला?
युद्ध के बाद भारत ने पाकिस्तान की बनाई रणनीति को पूरी तरह विफल कर दिया। 1962 के चीन युद्ध के बाद हुए इस युद्ध ने भारतीय सैनिकों का मनोबल और अधिक मज़बूत कर दिया। साथ ही तत्काल प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश को एक नारा दिया “जय जवान जय किसान” जिससे देश में एकता और उत्साह की भावना जागी।