शौर्य और इतिहास का संगम, आईआरसीटीसी ला रहा है छत्रपति शिवाजी महाराज सर्किट, 9 जून से चलेगी खास हेरिटेज ट्रेन!
Chhatrapati Shivaji Maharaj Circuit:आईआरसीटीसी 9 जून से 'छत्रपति शिवाजी महाराज सर्किट' ट्रेन शुरू कर रहा है, जो मराठा विरासत से जुड़ी ऐतिहासिक जगहों की यादगार सैर कराएगी।
Chhatrapati Maharaj Heritage Train
Chhatrapati Shivaji Maharaj Circuit:भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने 9 जून 2025 से एक खास पर्यटक ट्रेन सेवा शुरू करने की घोषणा की है, जिसका नाम छत्रपति शिवाजी महाराज सर्किट रखा गया है। यह ट्रेन भारत गौरव पर्यटक ट्रेन योजना के तहत चलाई जा रही है। बता दे भारत गौरव पर्यटक ट्रेन योजना, भारतीय रेलवे की एक पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को बढ़ावा देना है। यह योजना विशेष थीम-आधारित ट्रेनों के माध्यम से यात्रियों को विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराती है। आईआरसीटीसी द्वारा संचालित इन ट्रेनों में, यात्रा के दौरान भोजन, आवास और परिवहन की व्यवस्था की जाती है। छह दिनों की यह विशेष यात्रा मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से शुरू होकर वहीं समाप्त होगी। इस यात्रा का उद्देश्य महान मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और विरासत से जुड़ी ऐतिहासिक जगहों को देखने और समझने का अवसर देना है।
ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेंगे।
इस यात्रा के दौरान उन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों की सैर करेंगे जो छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और मराठा साम्राज्य के इतिहास से गहराई से जुड़े हुए हैं। रायगढ़ किला वह स्थान है जिसे शिवाजी महाराज ने अपनी राजधानी बनाया था, और यहीं से मराठा साम्राज्य का संचालन हुआ। शिवनेरी किला शिवाजी महाराज का जन्मस्थान है और यह मराठा साम्राज्य की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पुणे का लाल महल शिवाजी के प्रशासनिक कार्यों का केंद्र था और यह मराठा शासन व्यवस्था का प्रतीक है। वहीं, शिवसृष्टि एक विशेष थीम पार्क है जो मराठा संस्कृति, इतिहास और विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। भीमाशंकर मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक रूप से भी शिवाजी के लिए महत्वपूर्ण स्थल था। प्रतापगढ़ किला एक ऐतिहासिक विजय का प्रतीक है, क्योंकि यहीं पर शिवाजी ने अफ़ज़ल खान को पराजित किया था। कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर शिवाजी की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र था और पन्हाला किला उनकी सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा था, जिसे साम्राज्य की सीमा पर स्थित एक रणनीतिक किले के रूप में जाना जाता है। ये सभी स्थल इस यात्रा को ऐतिहासिक, धार्मिक और भावनात्मक रूप से बेहद खास बना देते हैं। ट्रेन दादर और ठाणे जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भी रुकेगी, जिससे यात्री इन स्टेशनों से चढ़ और उतर सकें। यह पूरी यात्रा पांच रातों और छह दिनों की होगी।
छत्रपति शिवाजी महाराज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को लोगों तक पहुंचना
इस ट्रेन यात्रा के लिए आईआरसीटीसी ने तीन श्रेणियों के पैकेज बनाए हैं, इकोनॉमी (स्लीपर क्लास किराया ) ₹13,155/- , कम्फर्ट (3एसी किराया ) ₹19,840/- और सुपीरियर (2एसी किराया ) ₹27,365/-। इन पैकेजों में होटल में ठहरने की सुविधा, ट्रेन और ट्रेन से बाहर शुद्ध शाकाहारी भोजन, स्थानीय यातायात की सुविधा, टूर गाइड, दर्शनीय स्थलों के प्रवेश टिकट, यात्रा बीमा और सुरक्षा जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इस पहल को महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम का सहयोग प्राप्त है, और इसका मुख्य उद्देश्य छत्रपति शिवाजी महाराज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को लोगों तक पहुंचना और पर्यटन को बढ़ावा देना है।
मराठा विरासत को देखने का मौका न चूकने की अपील - डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार
घोषणा के समय संभागीय आयुक्त डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार ने लोगों से इस खास यात्रा के जरिए महाराष्ट्र की गौरवशाली मराठा विरासत को देखने का मौका न चूकने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक टूर पैकेज नहीं है, बल्कि यह यात्रा छत्रपति शिवाजी महाराज की बहादुरी, सोच और उनके मूल्यों को करीब से समझने और उनसे जुड़ने का एक शानदार अवसर है।
रायगढ़ और प्रतापगढ़ जैसे किलों और शिवसृष्टि व भीमाशंकर जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की यात्रा के साथ, यह ट्रेन सफर इतिहास, आस्था और ज्ञान का एक अच्छा मेल पेश करती है। यह यात्रा सिर्फ आरामदायक नहीं है, बल्कि इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि लोग मराठा विरासत से भावनात्मक और ऐतिहासिक रूप से जुड़ सकें।