पारा चढ़ा तो एसी-कूलर ने खींची रिकॉर्ड बिजली, देश के कई हिस्सों में झुलसाने वाली गर्मी

Power Demand India 2025: भीषण लू और एसी-कूलर के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली मांग 255.85 GW पर पहुंची। मई-जून में 270 GW पार होने का अनुमान। जानें पूरा हाल।

Update:2026-04-30 18:37 IST

Power Demand India 2025 (Image Credit-Social Media)

Heat Wave Alert: देश का बिजली संकट अब सिर्फ सप्लाई की कमी नहीं, बल्कि भीषण गर्मी के बीच बढ़ती मांग की एक बड़ी चुनौती बन गया है। उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में पड़ रही लू और चिलचिलाती धूप ने 27 अप्रैल को बिजली की मांग को एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। लगातार दूसरे दिन बिजली की खपत ने इतिहास रच दिया, जिससे साफ हो गया है कि इस साल गर्मी इंसानों के साथ-साथ बिजली व्यवस्था की भी सख्त परीक्षा लेगी।

केंद्रीय बिजली मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 27 अप्रैल को देश की चरम बिजली मांग 255.85 गीगावॉट के स्तर पर पहुंच गई। यह आंकड़ा एक दिन पहले 25 अप्रैल को बने सर्वकालिक रिकॉर्ड 256.11 गीगावॉट से मात्र 0.26 गीगावॉट कम है। यानी महज एक फीसदी के अंतर से देश ने लगातार दो दिन 255 गीगावॉट से अधिक बिजली की खपत कर डाली। हैरान करने वाली बात यह है कि अप्रैल महीने के आखिरी सप्ताह में ही यह मांग इतनी तेजी से बढ़ी है। 24 अप्रैल को मांग 252.07 गीगावाट थी, जो अगले ही दिन 256.11 गीगावॉट के शिखर पर जा पहुंची। यह उछाल साफ बताता है कि पारा जैसे ही 40 डिग्री के पार गया, लाखों एसी, कूलर और पंखों ने एक साथ गति पकड़ ली।


हालांकि, रविवार (26 अप्रैल) को गर्मी से थोड़ी राहत मिलने के साथ ही बिजली की मांग में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। रविवार को दिन की अधिकतम मांग 238.15 गीगावॉट रह गई, जो शनिवार के रिकॉर्ड से काफी कम थी। इस गिरावट की दो मुख्य वजहें थीं। पहली, सप्ताहांत होने के कारण कारखानों और कार्यालयों में औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियां कम रहीं। दूसरी, देश के कई इलाकों में आए धूल भरे तूफान और बिखरी बारिश ने तापमान पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया, जिससे एसी के इस्तेमाल में हल्की कमी आई।

डिमांड से कहीं कम है सप्लाई

लेकिन चिंता की बात यह है कि रविवार को भी बिजली की आपूर्ति मांग से पीछे रही। मंत्रालय के अनुसार रविवार को उपलब्ध कराई गई सबसे अधिक बिजली 237.21 गीगावॉट थी, जबकि मांग 238.15 गीगावॉट थी। इस तरह से करीब 0.93 गीगावॉट (लगभग 930 मेगावॉट) का अंतर बना रहा, जो कई जिलों में बिजली कटौती और वोल्टेज गिरने की वजह बना। हालांकि स्केल में यह अंतर भले ही छोटा लगे, लेकिन इसका मतलब है कि लू चरम पर होने पर व्यवस्था पर दबाव अचानक बढ़ सकता है।

हर साल टूट रहे हैं रिकॉर्ड

यह उछाल अचानक नहीं आया है। आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले तीन सालों से भारत में बिजली की चरम मांग हर गर्मी में नया रिकॉर्ड बना रही है। पिछले साल (2025) की गर्मियों में जून महीने में देश की सबसे अधिक बिजली मांग 242.77 गीगावॉट दर्ज की गई थी। यह उस वर्ष के लिए सरकार के 277 गीगावॉट के अनुमान से काफी कम थी, लेकिन फिर भी 2024 के आंकड़ों से ऊपर थी। इससे पहले, 2024 में मई महीने में बिजली की मांग 250 गीगावॉट के पार पहुंच गई थी, जो उस समय एक ऐतिहासिक उच्च स्तर था। 2023 में सितंबर में यह आंकड़ा 243.27 गीगावॉट था। यानी महज दो सालों में देश की बिजली मांग में करीब 13 गीगावॉट का इजाफा हुआ है, जो लगभग दिल्ली की कुल बिजली खपत के बराबर है।


विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार की बढ़ोतरी सिर्फ गर्मी से नहीं बल्कि बिजली से चलने वाले उपकरणों के बढ़ते प्रसार से भी हुई है। पिछले तीन वर्षों में गांवों और छोटे शहरों में एसी, कूलर और पानी के मोटरों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। जहां पहले केवल शहर ही ठंडक के लिए बिजली पर निर्भर थे, अब अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्र भी तेजी से इस नेटवर्क में जुड़ रहे हैं।

अभी तो मई-जून में और बढ़ेगी मुश्किल

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही इस वर्ष सामान्य से अधिक लू वाले दिन रहने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और तेलंगाना सहित कई राज्यों में तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री अधिक रहने की संभावना है। मई और जून के महीने सबसे कठिन हो सकते हैं, जब कुछ स्थानों पर तापमान 47 से 48 डिग्री सेल्सियस के कगार पर पहुंच सकता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हीट स्ट्रोक (लू लगने) से निपटने के लिए पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है। यह एक गंभीर स्थिति का संकेत है, क्योंकि लू लगने से पिछले कुछ वर्षों में देश में सैकड़ों मौतें हुई हैं और हर साल यह संख्या बढ़ रही है।

270 गीगावॉट के पार जा सकती है मांग, कोयले की कमी बड़ी चुनौती

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में यह मांग और तेजी से बढ़ेगी, खासकर मई और जून के महीनों में। गर्मी के चरम पर जब उत्तर भारत में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंचेगा, तब बिजली की खपत सरकार के अनुमानित 270 गीगावॉट के स्तर के आसपास जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 270 गीगावॉट से भी मांग ऊपर निकल सकती है, क्योंकि अप्रैल में ही यह 256 गीगावॉट के पार चली गई है।


फिलहाल, थर्मल पावर प्लांट्स (कोयले से चलने वाले बिजलीघर) पर निर्भरता 70% से अधिक है। कोयले की कमी का पुराना संकट इस बार भी बना हुआ है। कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक औसत से कम चल रहा है। अप्रैल में ही कई बिजली कंपनियों को इंपोर्टेड कोयले पर स्विच करना पड़ा, जिससे बिजली लागत बढ़ गई। अगर मई-जून में मांग और बढ़ी और कोयले की आपूर्ति ठीक नहीं रही तो देश को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कि 2022 में देखा गया था।

अब तक देश का बड़ा हिस्सा सिर्फ प्री-समर में है। मई और जून के पीक महीनों में यह 270 गीगावॉट के स्तर को पार कर सकता है, जो कि जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों की कुल बिजली खपत से भी अधिक है।

चीन और अमेरिका से तुलना

तुलना के लिए देखा जाए तो अमेरिका में एयर कंडीशनिंग पर सबसे अधिक बिजली खर्च होती है। लेकिन भारत तेजी से उस रिकॉर्ड को तोड़ने की ओर बढ़ रहा है। सोमवार को देश ने जो 255.85 गीगावॉट बिजली खपत की, वह चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा दैनिक बिजली उपभोग का आंकड़ा है। अंतर सिर्फ इतना है कि चीन की अधिकतम खपत 300 गीगावॉट से अधिक है, लेकिन वहां की औसत प्रति व्यक्ति खपत भारत से तीन गुना है। यानी भारत में बिजली की खपत कम संसाधनों में अधिक दबाव बना रही है।


इस बढ़ती मांग के पीछे चार मुख्य वजहें हैं - पहला, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और लू की आवृत्ति। दूसरा, मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों में एसी, कूलर और फ्रिज का तेजी से बढ़ता उपयोग। तीसरा, बिजली से चलने वाले वाहनों का प्रसार और चौथा, खेती में इलेक्ट्रिक मोटरों और पंप सेटों पर निर्भरता।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सरकार के सामने दोहरी चुनौती होगी - एक तो बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना, दूसरी लू से लोगों की जान बचाना। हीट वेव एक साइलेंट किलर है। बिजली कटौती के समय जब एसी या कूलर काम करना बंद कर देते हैं, तो बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ने इस बार पहले से अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश जारी किए हैं।

लंबी अवधि में विशेषज्ञ सोलर एनर्जी (सौर ऊर्जा) को बड़ा विकल्प बता रहे हैं। क्योंकि गर्मी के दिनों में जब सूरज सबसे तेज चमकता है, तब सोलर प्लांट्स से सबसे अधिक बिजली बनती है। पिछले साल की तुलना में इस साल देश में सोलर कैपेसिटी में 20% का इजाफा हुआ है। साथ ही, सरकार रात के समय बिजली की कमी को पूरा करने के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर भी काम कर रही है। हालांकि, ये सब प्रोजेक्ट अभी अपने शुरुआती चरण में हैं। फिलहाल, आने वाला एक महीना यह तय करेगा कि भारत इतनी भीषण गर्मी और बिजली की इतनी अधिक मांग को संभालने के लिए कितना तैयार है।

Tags:    

Similar News