BJP ने बचा ही ली उपेंद्र कुशवाहा के बेटे की कुर्सी, दीपक प्रकाश बने MLC, विधान परिषद में हुई एंट्री

Deepak Prakash Oath Ceremony: उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने बिहार विधान परिषद सदस्य (MLC) के रूप में शपथ ले ली है। भाजपा के प्रयासों से उनकी मंत्री पद की कुर्सी पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट टल गया। सुप्रीम कोर्ट के सवालों के बाद सरकार ने राज्यपाल कोटे की खाली सीट पर दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाकर बड़ी राहत दी।

Update:2026-08-06 19:19 IST

Deepak Prakash Oath Ceremony: बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री और आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने गुरुवार को विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के रूप में शपथ ग्रहण कर ली। पटना स्थित बिहार विधानमंडल परिसर में आयोजित सादे समारोह में विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। पहली बार किसी उच्च सदन के सदस्य बने दीपक प्रकाश जब शपथ लेने पहुंचे, तो उनके साथ पिता उपेंद्र कुशवाहा भी मौजूद थे। इस मौके पर डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और मंत्री लेशी सिंह समेत एनडीए गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

शपथ के बाद बोले दीपक

विधान परिषद की सदस्यता ग्रहण करने के तुरंत बाद मीडिया कर्मियों से मुखातिब होते हुए दीपक प्रकाश बेहद उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि अब वे दोगुनी ऊर्जा और नए संकल्प के साथ बिहार तथा देश की प्रगति के लिए निरंतर कार्य करेंगे। उन्होंने अपनी इस नई राजनीतिक पारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा एनडीए के तमाम वरिष्ठ नेताओं का हृदय से आभार प्रकट किया। शपथ ग्रहण के बाद एनडीए खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई है।

देवेश कुमार ने खाली की थी राज्यपाल कोटे की सीट

दीपक प्रकाश के लिए बिहार विधान परिषद की राह भाजपा नेता देवेश कुमार के अचानक दिए गए त्यागपत्र से साफ हुई थी। देवेश कुमार राज्यपाल द्वारा मनोनीत कोटे से एमएलसी थे और उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक शेष था। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर उन्होंने कार्यकाल समाप्त होने से लगभग 8 महीने पहले ही अपना पद छोड़ दिया था। देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी कैबिनेट ने इस खाली सीट पर दीपक प्रकाश के मनोनयन की सिफारिश राज्यपाल सैयद अता हसनैन से की, जिस पर राजभवन ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।

SC के कड़े तेवरों के बाद सरकार ने उठाया कदम

बिना किसी सदन का सदस्य बने दीपक प्रकाश को मंत्री पद दिए जाने को लेकर देश की शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। हाल ही में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सख्त लहजे में सवाल पूछा था कि आखिर बिना विधायक या एमएलसी बने कोई व्यक्ति इतने लंबे समय से कैबिनेट मंत्री के पद पर कैसे बना हुआ है? अदालत ने इस मामले पर 27 अगस्त की तारीख मुकर्रर की थी। शीर्ष अदालत के इस कड़े रुख के बाद सरकार ने समय रहते दीपक को विधान परिषद भेजकर उनकी कुर्सी पर मंडरा रहे कानूनी खतरे को टाल दिया।

जानिए क्या कहता है भारतीय संविधान का नियम?

भारतीय संविधान के अनुच्छेदों और कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति जो किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य नहीं है, वह अधिकतम 6 महीने की अवधि तक ही मंत्री पद पर बना रह सकता है। दीपक प्रकाश को सबसे पहले नवंबर 2025 में तत्कालीन सरकार में मंत्री बनाया गया था। इसके बाद राज्य में सत्ता के फेरबदल के बाद 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने दोबारा शपथ ली। दोनों ही मौकों पर वह सदन के सदस्य नहीं थे, जिससे कानूनी पेच फंसा हुआ था।

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