करोड़ों के निवेश फर्जीवाड़े में वांछित विशाखा राठौड़ यूएई से डिपोर्ट, CBI भारत लेकर आई
Investment Fraud Case: सीबीआई ने करोड़ों रुपये के निवेश फर्जीवाड़े की आरोपी विशाखा राठौड़ को यूएई से डिपोर्ट कर भारत वापस लाया है। इंटरपोल रेड नोटिस के बाद हुई कार्रवाई में महाराष्ट्र पुलिस ने उसे हिरासत में लिया।
Vishakha Rathod
Investment Fraud Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बड़े निवेश फर्जीवाड़े (इन्वेस्टमेंट फ्रॉड) के मामले में लंबे समय से फरार चल रही मुख्य आरोपी विशाखा राठौड़ को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से डिपोर्ट कराकर भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। सीबीआई के अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ कूटनीतिक समन्वय के जरिए आरोपी को भारत लाया गया, जहां पहुंचते ही महाराष्ट्र पुलिस की टीम ने उसे तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया।
आकर्षक रिटर्न का लालच देकर करोड़ों की ठगी
सीबीआई जांच के अनुसार, विशाखा राठौड़ एक बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क में वांछित थी। उस पर आरोप है कि उसने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सीधे-सादे निवेशकों को लुभाने के लिए कई तरह की फर्जी निवेश योजनाएं चलाईं। आरोपी ने लोगों को हर महीने एक निश्चित और बेहद आकर्षक रिटर्न देने का झूठा वादा किया, जिसके झांसे में आकर सैकड़ों निवेशकों ने करोड़ों रुपये लगा दिए। बाद में आरोपी पूरी रकम डकार कर फरार हो गई।
पैसों की हेराफेरी और इंटरपोल का रेड नोटिस
एजेंसी की तफ्तीश में सामने आया कि ठगी के जरिए जुटाए गए करोड़ों रुपये को छिपाने के लिए एक जटिल नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। आरोपी ने इस रकम को कई फर्जी बैंक खातों और डीमैट खातों के माध्यम से इधर-उधर ट्रांसफर किया, ताकि अवैध संपत्ति के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके (मनी लॉन्ड्रिंग की जा सके)। आरोपी के विदेश भाग जाने के बाद सीबीआई की सिफारिश पर इंटरपोल ने उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'रेड नोटिस' जारी किया था। अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के सहयोग के बाद आखिरकार आरोपी को यूएई में ट्रैक कर भारत डिपोर्ट कर दिया गया।