दतिया उपचुनाव रिजल्ट से पहले कांग्रेस का बड़ा एक्शन, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पार्टी से सस्पेंड

दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी से निलंबित कर दिया। जानिए क्या है पूरा मामला, भारती ने किस पर लगाए गंभीर आरोप और क्यों हुआ था उपचुनाव।

Update:2026-08-03 08:05 IST

Rajendra Bharti News: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए अपने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। कांग्रेस की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, रविवार (2 अगस्त) देर रात यह कार्रवाई की गई। ऐसे समय में यह फैसला आया है, जब सोमवार को दतिया उपचुनाव के नतीजे घोषित होने हैं।

राजेंद्र भारती ने लगाए गंभीर आरोप

निलंबन के बाद राजेंद्र भारती ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस कार्रवाई से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की साजिश का हिस्सा है।

भारती ने दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने नरोत्तम मिश्रा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह वर्ष 2028 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेंगे।

क्यों हुआ दतिया में उपचुनाव?

दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया गया क्योंकि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा को करीब 7,700 वोटों से हराया था।

हालांकि, अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और सीट रिक्त घोषित कर दी गई, जिसके चलते उपचुनाव कराना पड़ा।

भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला

दतिया उपचुनाव में भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है। इस चुनाव में कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट बना था चर्चा का विषय

उपचुनाव के दौरान भाजपा में टिकट वितरण को लेकर भी विवाद देखने को मिला था। नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प तक हुई थी। हालांकि बाद में मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का समर्थन किया और पार्टी की जीत के लिए प्रचार भी किया।

क्या हैं राजनीतिक मायने?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया उपचुनाव का परिणाम राज्य सरकार की स्थिरता पर असर नहीं डालेगा, लेकिन यह 2028 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अहम राजनीतिक संकेत देगा। हाल के छात्र आंदोलनों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह उपचुनाव दोनों दलों की राजनीतिक स्थिति को परखने वाला माना जा रहा है।

Tags:    

Similar News