UBT Split Story: शिंदे ने कैसे लिखी उद्धव की बर्बादी की पटकथा? प्राइवेट जेट से नोएडा के होटल तक...पूरी इनसाइड स्टोरी
UBT Split Inside Story: उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT में बड़ी टूट की खबरों के बीच सामने आई अंदरूनी कहानी। प्राइवेट जेट, दिल्ली दौरा, नोएडा होटल और शिंदे की रणनीति से कैसे बदला महाराष्ट्र का सियासी खेल?
UBT Split Inside Story: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची भगदड़ के बाद अब महाराष्ट्र की सियासत में उससे भी बड़ा भूचाल आ चुका है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) पूरी तरह बिखरने की कगार पर पहुंच गई है। अंदरूनी सूत्रों से मिली बेहद पक्की जानकारी के मुताबिक, उद्धव खेमे के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने पाला बदलने की पूरी कहानी लिख दी है और अब बस इसकी आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।
बीते कुछ घंटों में देश की राजनीति ने इतनी तेज रफ्तार पकड़ी कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। इन नाराज सांसदों ने आधी रात को गुपचुप तरीके से विशेष विमानों के जरिए देश की राजधानी के लिए उड़ान भरी और सुबह होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने हाजिर हो गए। बागी नेताओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी का वजूद खत्म करके उसे कांग्रेस में मिलाने की बड़ी तैयारी कर रहे हैं।
आधी रात का वो खुफिया ऑपरेशन
इस ऐतिहासिक बगावत की शुरुआत 16 जून की काली रात को ही हो गई थी, जब उद्धव गुट की नींव अंदर ही अंदर हिलने लगी। गुरुवार को अपनी बिखरती सेना को बचाने के लिए उद्धव ठाकरे ने एक बेहद जरूरी बैठक बुलाई थी, जिसमें शामिल होने के लिए बकायदा कड़ा व्हिप भी जारी किया गया था।
लेकिन जब बैठक शुरू हुई, तो मातोश्री के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि वहां 9 में से सिर्फ 3 ही सांसद मौजूद थे। इससे पहले जब बैठक हुई थी, तब संजय राउत ने दावा किया था कि 4 नेता खुद आए थे और 5 इंटरनेट के जरिए जुड़े थे। लेकिन इस बार का सन्नाटा साफ बयां कर रहा था कि 6 सांसद अब उद्धव की पहुंच से बहुत दूर जा चुके हैं। जो नेता इस बैठक से गायब रहे, वे पिछले कई दिनों से पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बना रहे थे, यहां तक कि उन्होंने आदित्य ठाकरे के जन्मदिन के जलसे में भी शिरकत नहीं की थी।
अलग-अलग शहरों से उड़ान
इस पूरे खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सांसदों ने बहुत ही फिल्मी तरीका अपनाया। सबसे पहले नागेश अष्टिकर नांदेड़ से रात के करीब 1:30 बजे प्राइवेट जेट के जरिए दिल्ली उतरे। इसके तुरंत बाद संजय देशमुख और संजय जाधव भी राजधानी पहुंच गए। उधर, भाऊसाहेब वाकचौरे ने हैदराबाद से विशेष विमान पकड़ा, जबकि संजय दीना पाटिल महाराष्ट्र के एक रसूखदार मंत्री प्रताप सरनाइक के साथ देर रात दिल्ली की सीमा में दाखिल हुए।
दूसरी तरफ, सूबे के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खुद मुंबई से सीधे दिल्ली आने के बजाय वाया जयपुर होते हुए रात 3 बजे दिल्ली पहुंचे, और उनके पीछे-पीछे तड़के सुबह उनके सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे भी वहां आ गए। इन सभी बागी नेताओं को नोएडा के एक बेहद सुरक्षित और आलीशान होटल में ठहराया गया था, जहां उपमुख्यमंत्री शिंदे के साथ इनकी गुप्त मंत्रणा हुई।
स्पीकर से मुलाकात
अगली सुबह इस पूरे मिशन को अंजाम तक पहुंचाया गया। श्रीकांत शिंदे और ओमराजे निंबालकर ने सुबह सात बजे ही लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर ली। इसके बाद करीब सवा दस बजे बाकी के पांचों सांसद भी ओम बिरला के सामने पेश हुए और उन्हें अपना आधिकारिक पत्र सौंप दिया। इस चिट्ठी में साफ लिखा था कि उद्धव गुट की कमान संभाल रहे नेता अब अपनी पुरानी विचारधारा को छोड़ चुके हैं और वे पार्टी को पूरी तरह कांग्रेस में विलय करने की योजना बना रहे हैं।
सांसदों ने मांग की कि संसद में अब उनके बैठने की जगह एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ तय की जाए। चूंकि बागी होने वाले सांसदों की संख्या कुल नौ में से छह है, जो कि कानूनी तौर पर दो-तिहाई बैठती है, इसलिए इन पर दल-बदल विरोधी कानून का कोई असर नहीं होगा। स्पीकर से मिलने के बाद सभी सांसद अलग-अलग धार्मिक यात्राओं पर निकल गए, जिसमें कोई तिरुपति बालाजी के दर्शन करने पहुंचा तो कोई अयोध्या और वाराणसी में आशीर्वाद लेने निकल गया।