Modi Trump Meeting: पीएम मोदी-ट्रंप मुलाकात से भारत को क्या हासिल हुआ? पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने किया खुलासा
Modi Trump Meeting: प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने प्रतिक्रिया दी। जानिए इस बैठक का असली मकसद
Modi Trump Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इस मुलाकात से भारत को क्या फायदा मिला, क्या अमेरिका भारत की स्थिति और उसकी जरूरतों को समझ पाया, और इस बातचीत को किस नजरिए से देखा जाना चाहिएइन सभी सवालों पर पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने अपनी राय दी है।
मुलाकात का असली मकसद क्या था?
निरुपमा राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका रिश्तों को पूरी तरह से नया बनाना या उन्हें फिर से शुरू करना नहीं था। न ही इसका मकसद सिर्फ दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल या “केमिस्ट्री” दिखाना था। उनके अनुसार, यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब दुनिया और खासकर भारत के आसपास का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। ऐसे माहौल में दोनों देशों के रिश्तों को संभालना और उन्हें संतुलित रखना ज्यादा जरूरी था।
सबसे अहम बात क्या रही?
पूर्व विदेश सचिव के मुताबिक, इस मुलाकात में सबसे महत्वपूर्ण बात ट्रंप की तारीफें या प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दिए गए बयान नहीं थे। असली मुद्दा यह था कि प्रधानमंत्री मोदी ने जी-7 सम्मेलन में भरोसे और स्थिरता (स्टेबिलिटी) की जो बात कही थी, वह ज्यादा अहम थी। आज की दुनिया में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तेजी से बदल रही है और कई बार अस्थिर भी हो जाती है। ऐसे में भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वैश्विक व्यवस्था में कुछ स्थिरता बनी रहे।
भारत और अमेरिका की सोच में फर्क
निरुपमा राव ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका की सोच में अंतर है। अमेरिका अक्सर अपने हितों और दबाव बनाने की रणनीति (लेवरेज) की भाषा में बात करता है, जबकि भारत स्थिरता और संतुलन पर जोर देता है। यह अंतर सिर्फ बातचीत का नहीं, बल्कि सोच और नीति का है। इसी वजह से किसी भी मुलाकात को सिर्फ नेताओं की तारीफ या मुलाकात के भावनात्मक पहलू से नहीं देखा जाना चाहिए।
ट्रंप का अंदाज और बयानबाजी
उन्होंने यह भी बताया कि डोनाल्ड ट्रंप का अंदाज हमेशा से ही अलग रहा है। वे अक्सर बड़े-बड़े बयान देते हैं और खुद की तारीफ भी करते हैं। ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को “किलर” या “टफ नेगोशिएटर” कहना भी उनके पुराने राजनीतिक तरीके का हिस्सा है। वे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल अक्सर अपनी छवि बनाने और बातचीत को प्रभावित करने के लिए करते हैं।
असली सवाल क्या है?
निरुपमा राव ने साफ कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि ट्रंप ने क्या कहा या क्या तारीफ की। असली सवाल यह है कि इस मुलाकात से भारत को वास्तव में क्या हासिल हुआ। किसी भी अंतरराष्ट्रीय बैठक का मूल्यांकन सिर्फ बयानों से नहीं, बल्कि उसके नतीजों से होना चाहिए।
भारत को क्या सीख मिलती है?
उन्होंने यह भी समझाया कि भारत जैसे बड़े और मजबूत देश को अपनी कूटनीतिक सफलता को किसी विदेशी नेता की तारीफ से नहीं आंकना चाहिए। भारत को यह समझने की जरूरत है कि उसकी वैश्विक स्थिति किसी एक बयान या मुलाकात पर निर्भर नहीं करती। भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति है और उसे अपनी पहचान साबित करने के लिए किसी अन्य देश की पुष्टि की जरूरत नहीं है।