Karnataka Politics: कर्नाटक में डीके शिवकुमार ने BJP के साथ कर दिया खेला, भाजपा विधायकों से करवाई क्रास वोटिंग, झटकी पांच सीट

Karnataka Politics: कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7 में से 5 सीटें जीत लीं। भाजपा को 2 सीटें मिलीं, जबकि जेडीएस खाता नहीं खोल सकी। भाजपा विधायकों की क्रॉस-वोटिंग और डीके शिवकुमार की रणनीति चुनाव का सबसे बड़ा चर्चा का विषय रही।

Update:2026-06-18 19:38 IST

DK Shivakumar

Karnataka Politics: कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए गुरुवार को संपन्न हुए चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। विधानसभा में अपने संख्या बल के हिसाब से चार सीटों पर जीत की उम्मीद कर रही कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर कब्जा जमा लिया है। पार्टी ने एक अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारा था और सटीक रणनीति के तहत उस पर भी जीत दर्ज की।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खाते में दो सीटें गई हैं। इस चुनाव में विधानसभा के सभी 222 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। विधान सौध में हुए इस चुनाव की मतगणना शाम पांच बजे शुरू हुई थी।

इस चुनाव में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब भाजपा के बागी विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। एस.टी. सोमशेखर और शिवराम हेब्बार ने क्रॉस-वोटिंग करते हुए कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन किया। मतदान के बाद इन दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज और अपने क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।

सोमशेखर ने खुले तौर पर बताया कि न तो भाजपा और न ही जद(एस) ने उनसे समर्थन मांगा था। इसके विपरीत, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें फोन कर रिजॉर्ट में आयोजित बैठक में आमंत्रित किया था, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का साथ देने का फैसला किया। ये दोनों विधायक मतदान से पहले कांग्रेस के रिजॉर्ट में शिवकुमार के साथ देखे भी गए थे।

28 वोटों का गणित और चुनावी मैदान के चेहरे

विधान परिषद पहुंचने के लिए हर उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। विधानसभा में मौजूद आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस आसानी से चार और भाजपा दो सीटें जीत सकती थी। असली मुकाबला सातवीं सीट को लेकर था, जिसके लिए कांग्रेस और जद(एस) दोनों ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, जबकि दोनों के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं था।

चुनाव मैदान में कांग्रेस की ओर से थिप्पन्नप्पा कामकनूर, पी. वी. मोहन, प्रदेश अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद, शिवन्ना बी एस और विनय कार्तिक प्रकाश थे। भाजपा ने लिंगराज पाटिल और रघु आर पर दांव खेला था, जबकि जद(एस) की तरफ से गोविंदराजू मैदान में थे। यह चुनाव इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि 30 जून को सात मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

रिजॉर्ट पॉलिटिक्स और रणनीति से इनकार

क्रॉस-वोटिंग की आशंका को देखते हुए कांग्रेस और जद(एस) दोनों ही पार्टियों ने अपने विधायकों को शहर के बाहरी इलाकों में अलग-अलग रिजॉर्ट में ठहराया था। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने किसी भी तरह की विशेष रणनीति बनाने या विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग की पूर्व जानकारी होने से साफ इनकार किया। उनका कहना था कि पार्टी ने केवल अपने विधायकों को मतदान प्रक्रिया समझाई थी, खासकर उन्हें जो पहली बार वोट डाल रहे थे।

उधर, भाजपा के एक अन्य बागी सदस्य बासनगौड़ा पाटिल यतनाल ने पार्टी के निर्देशानुसार ही वोट दिया और विपक्ष के नेता आर. अशोक से मुलाकात भी की। जद(एस) खेमे में भी उस वक्त राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब पार्टी से दूरी बनाकर चल रहे वरिष्ठ नेता जी.टी. देवेगौड़ा ने अन्य विधायकों से अलग जाकर वोट डाला और कहा कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान किया है।


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