आरक्षण-UGC नियमों पर दिल्ली में महासंग्राम! जंतर-मंतर पर उमड़ा हजारों का जनसैलाब, केंद्र को दी खुली चेतावनी

Jantar Mantar Reservation Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण नीति और UGC इक्विटी नियमों के खिलाफ हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक आधार पर आरक्षण, क्रीमी लेयर और SC/ST कानून में बदलाव की मांग करते हुए केंद्र को चेतावनी दी।

Update:2026-08-21 20:46 IST

Jantar Mantar Reservation Protest: देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर शुक्रवार को एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बन गया। कॉकरोच जनता पार्टी के 45 दिनों तक चले लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद अब हजारों की संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया। हाथों में लहराते भगवा झंडे, सरकार विरोधी बैनर और गगनभेदी नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण नीति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी नियमों के खिलाफ जमकर आवाज उठाई। पूरे इलाके में दिनभर भारी गहमागहमी और तनाव का माहौल देखने को मिला।

जाति के बजाय आर्थिक आधार पर मिले लाभ

आंदोलनकारियों ने मौजूदा जातिगत आरक्षण ढांचे में आमूलचूल बदलाव की पुरजोर पैरवी की। उनका स्पष्ट रूप से कहना था कि सरकारी सहायता का हकदार वही होना चाहिए जो हकीकत में तंगहाली में जी रहा है। प्रदर्शन में शामिल अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के युवा सचिव दीपराज रावल ने जोर देकर कहा कि सहायता किसी की जाति देखकर नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिति को नापकर दी जानी चाहिए। उन्होंने मांग उठाई कि गरीब चाहे किसी भी समुदाय से हो, उसे पढ़ाई, कोचिंग और बाकी सुविधाएं मिलनी ही चाहिए।

SC/ST कानून का गलत इस्तेमाल रोकने की मांग

प्रदर्शन के दौरान SC/ST कानून के कड़े प्रावधानों को लेकर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। लोगों ने मांग की कि इस कानून के बेजा इस्तेमाल को फौरन रोका जाए और इसमें जरूरी सुधार किए जाएं। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि किसी भी कानून का हथियार की तरह बेकसूरों पर इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, प्रदर्शन में शामिल यूएस राणा और नितिन चौहान जैसे नेताओं ने मांग की कि आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का दायरा पूरी तरह लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि दशकों पुरानी इस व्यवस्था की आज की परिस्थितियों के हिसाब से समीक्षा होना बेहद जरूरी है।

UGC के नए नियमों पर भड़के छात्र और किसान नेता

प्रदर्शन का दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा UGC के विवादित इक्विटी नियम रहे, जिन्हें फिलहाल टाल दिया गया है। भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय सचिव सुधीर चौहान ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये नियम विद्यार्थियों के बीच आपसी कटुता और भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। इसलिए सरकार को इन्हें हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर छात्रों के हितों से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ तो यह लड़ाई हर गली-मोहल्ले तक जाएगी।

हनुमान चालीसा का पाठ और जय श्रीराम के उद्घोष

जंतर-मंतर पर इस विरोध प्रदर्शन का नजारा तब बेहद आध्यात्मिक हो गया, जब सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक साथ जमीन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरा माहौल 'सियावर रामचंद्र की जय' और धार्मिक जयकारों से गूंज उठा। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल शांतिपूर्वक ढंग से सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है और वे किसी भी प्रकार के उपद्रव के सख्त खिलाफ हैं।

अनुमति पर फंसा सस्पेंस, छावनी में तब्दील हुई दिल्ली

इस विशाल प्रदर्शन को लेकर सुबह से ही अनुमति पर भारी संशय बना हुआ था। दिल्ली पुलिस ने पहले नोटिस जारी कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ताकीद की थी, हालांकि बाद में शर्तों के साथ जंतर-मंतर पर जुटने की इजाजत दे दी गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया था। जगह-जगह लोहे के भारी बैरिकेड लगाए गए थे और दिल्ली पुलिस के साथ-साथ RAF और ITBP के हथियारों से लैस जवानों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात रखा गया था।

नागपुर से जयपुर तक सुलग रही आंदोलन की आग

यह विरोध प्रदर्शन अचानक खड़ा नहीं हुआ है, बल्कि पिछले कई हफ्तों से नागपुर, लखनऊ, विशाखापत्तनम और जयपुर में इसकी चिनगारियां सुलग रही थीं। राजस्थान में तो श्री राजपूत करणी सेना ने UGC नियमों के विरोध में 24 दिनों के भीतर करीब 800 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा निकाली थी, जहां जयपुर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प भी हो चुकी है। शुक्रवार को जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों ने सरकार को साफ शब्दों में अल्टीमेटम दिया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस फैसला नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन पूरे देश को ठप करने का दम रखता है।

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