Mahatma Gandhi Manuscript: महात्मा गांधी की हस्तलिखित पांडुलिपि ₹16.2 करोड़ में बिकी, नीलामी में बना विश्व रिकॉर्ड

Mahatma Gandhi Manuscript: महात्मा गांधी की हस्तलिखित ‘A Thought for the Day’ पांडुलिपि सैफरनआर्ट नीलामी में ₹16.2 करोड़ में बिकी। इसमें 23 महीनों में लिखे 688 विचार शामिल हैं।

Update:2026-08-21 19:15 IST

Gandhi Manuscript (Image Credit-Social Media)

नई दिल्ली/मुंबई: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा अपने हाथों से लिखी गई दैनिक विचारों की ऐतिहासिक पांडुलिपि ने नीलामी बाजार में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सैफरनआर्ट (Saffronart) द्वारा आयोजित नीलामी में महात्मा गांधी की हस्तलिखित डायरी 'अ थॉट फॉर द डे' (A Thought for the Day) रिकॉर्ड ₹16.2 करोड़ (लगभग 1.7 मिलियन डॉलर) में बिकी। किसी भी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए नीलामी में चुकाई गई यह अब तक की सबसे अधिक कीमत है, जिसने एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

नीलामी में 'लॉट 80' के रूप में पेश किए गए इस दुर्लभ दस्तावेज को एक भारतीय बोलीदाता ने खरीदा, जो पूरी नीलामी का सबसे मूल्यवान कार्य साबित हुआ।

23 महीनों में लिखी गईं 688 प्रेरक प्रविष्टियां

यह ऐतिहासिक पांडुलिपि बापू ने लगभग 23 महीनों की अवधि में अपने करीबी सहयोगी, शिष्य और प्रकाशक आनंद टी. हिंगोरानी के लिए लिखी थी। हिंगोरानी अपनी पत्नी विद्या के असामयिक निधन के बाद गहरे शोक में थे, और उन्हें मानसिक संबल देने के लिए गांधीजी प्रतिदिन एक तारीखवार प्रेरक विचार लिखते थे।

दो दशकों से अधिक समय में तैयार हिंगोरानी के इस निजी संग्रह में गांधीजी के साथ पत्राचार, हस्तलिखित डायरी, दुर्लभ तस्वीरें और एक 'पेटी चरखा' शामिल है, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण पलों के साथ-साथ दोनों के आत्मीय संबंधों को भी दर्शाता है।

भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के प्रति बढ़ता वैश्विक व घरेलू रुझान

सैफरनआर्ट के सह-संस्थापक दिनेश वजीरानी के अनुसार, इस ऐतिहासिक दस्तावेज को मिली रिकॉर्ड कीमत यह दर्शाती है कि भारतीय अब अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने के प्रति अधिक जागरूक और गंभीर हो रहे हैं। यह दस्तावेज पारंपरिक कलाकृति न होकर भी अपने ऐतिहासिक और वैचारिक महत्व के चलते असाधारण मांग में रहा।

लेखक और इतिहासकार साज़ अग्रवाल के अनुसार, आनंद टी. हिंगोरानी महज 13 वर्ष की आयु से ही गांधीजी के विचारों से अत्यधिक प्रभावित होकर उनके अनन्य अनुयायी बन गए थे और उन्होंने आजीवन केवल खादी पहनने का संकल्प लिया था।

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