Monsoon News India: बारिश में देरी से शहरों में पानी की किल्लत बढ़ी, किसान भी चिंतित

Monsoon News India: भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार देश में जून माह में अब तक 42% बारिश की कमी दर्ज की गई है। देर से पहुंचे मानसून का असर खेती, जलाशयों और शहरों की जलापूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है।

Update:2026-06-28 18:13 IST

Monsoon News India: भारत में मानसून के देर से पहुंचने और सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण देश के कई हिस्सों में जल संकट गहराता जा रहा है। पहले से गर्मी की मार झेल रहे लोगों को पानी की कमी से होने वाली समस्याओं का भी डर सता रहा है। साथ ही महानगरों में पेयजल आपूर्ति पर भी संकट खड़ा हो सकता है। मानसून में देरी का असर किसानों की खरीफ फसलों की बुवाई पर देखने को मिल रहा है। आईएमडी के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एल नीनो (El Niño) और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभाव से इस वर्ष मानसून कमजोर और असमान रहने की आशंका है।

मुंबई के जलाशयों में लगभग 40 दिनों का पानी ही शेष

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मानसून सामान्य समय से लगभग दो सप्ताह की देरी से पहुंचा। हालांकि हाल में हुई बारिश से कुछ राहत मिली है, लेकिन जलाशयों का जलस्तर अभी भी चिंताजनक बना हुआ है। हाल ही में स्थानीय प्रशासन ने जल संकट को देखते हुए नगर निगम के पानी का उपयोग निर्माण स्थलों और स्विमिंग पूलों के लिए बंद करने का आदेश जारी किया था। ताकि उपलब्ध पानी का उपयोग घरेलू और जरूरी कार्यों के लिए किया जा सके। स्थानीय सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के जलाशयों में लगभग 40 दिनों का पानी ही शेष बचा है। इसके चलते सार्वजनिक जल वितरण केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई की घरेलू कामगार आयशा खान ने बताया कि उन्हें केवल 10 लीटर पानी भरने के लिए करीब दो घंटे तक लाइन में इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनके दैनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा है।

उत्तर भारत में बढ़ी किसानों की चिंता



उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य कृषि क्षेत्रों में किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। समय पर वर्षा नहीं होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बाजरा किसान सुरेश कुमार का कहना है कि बिना बारिश के बीज बोना संभव नहीं है और हर दिन की देरी आर्थिक नुकसान बढ़ा रही है। मध्य प्रदेश के किसान केदार सिरोही ने कहा कि अब उनके पास अच्छी बारिश का इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। विशेषज्ञों के अनुसार जून और जुलाई खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण महीने होते हैं। यदि इस अवधि में पर्याप्त वर्षा नहीं होती, तो उत्पादन और किसानों की आय दोनों प्रभावित हो सकते हैं। बेंगलुरु स्थित वेल लैब्स (WELL Labs) के भूजल वैज्ञानिक विवेक ग्रेवाल का कहना है कि जिन किसानों के पास भूजल उपलब्ध है, वे कमजोर मानसून के बावजूद कुछ हद तक अपनी फसल बचा सकते हैं, लेकिन पूरी तरह वर्षा पर निर्भर किसान सबसे अधिक प्रभावित होंगे।


देशभर में 42% वर्षा की कमी दर्ज: IMD

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, एल नीनो की स्थिति और उत्तर-पश्चिम भारत से आने वाली शुष्क हवाओं के कारण मानसून की प्रगति धीमी हुई है। आईएमडी के मुताबिक देश में अब तक जून में 42 प्रतिशत वर्षा की कमी (Rainfall Deficit) दर्ज की गई है। विभाग ने जून से सितंबर के मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना भी जताई है।

क्यों बदल रहा है भारतीय मानसून?

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अक्षय देओरस का कहना है कि वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण भारतीय मानसून पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। उनके अनुसार अब लगातार कई दिनों तक सामान्य बारिश होने के बजाय कम समय में अत्यधिक वर्षा और उसके बाद लंबे सूखे की स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दिनों की अच्छी बारिश से मौजूदा वर्षा की कमी पूरी होना मुश्किल है।

जलवायु परिवर्तन बना बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल और गैस) के बढ़ते उपयोग से वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ी है। इससे हवा अधिक नमी धारण करने लगी है और बारिश कम दिनों में अत्यधिक मात्रा में होने लगी है। इस कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ और लंबे सूखे का चक्र लगातार बढ़ रहा है।


 


 

भारत में भूजल पर बढ़ती निर्भरता

संयुक्त राष्ट्र (UN) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया में सबसे अधिक भूजल निकालने वाला देश है। भारत अकेले अमेरिका और चीन से भी अधिक भूजल का दोहन करता है। देश के वहीं केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार, देश में उपयोग होने वाले लगभग 70 प्रतिशत पानी की आपूर्ति भूजल से होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कमजोर मानसून भूजल भंडार पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।

समाधान क्या है?

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC India) के जलवायु एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभियंत तिवारी का कहना है कि केवल अच्छी बारिश पर निर्भर रहने के बजाय जल संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने वर्षा जल संचयन, शहरी जलाशयों के पुनर्जीवन, गांवों के तालाबों की सुरक्षा और बेहतर जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। 

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। यदि जल संरक्षण, भूजल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की दिशा में समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और कृषि क्षेत्र दोनों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

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