TMC Internal Rift: अपनों के दिल से निकल गईं ‘ममता’, चुनावी हार के बाद अब TMC में दरार
TMC Internal Rift: हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी को मिली करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
Mamata Banerjee
TMC Internal Rift: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक समय अजेय मानी जाने वाली ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांगे्रस (टीएमसी) इस समय सियासी संकट से जूझ रही है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी को मिली करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से पहले ही दबाव झेल रही टीएमसी में अब आंतरिक कलह नई चुनौती बनती जा रही है।
टीएमसी में सबकुछ ठीक नहीं
कोलकाता में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में इन दिनों जो घटनाएं हो रही हैं। उससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। टीएमसी ने विधानसभा परिसर में स्थित अंबेडकर प्रतिमा के पास बीजेपी सरकार के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। बंगाल में पोस्ट-पोल हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई और फेरीवालों पर दबाव बनाने जैसे कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। लेकिन प्रदर्शन के दौरान टीएमसी के अधिकांश एमएलए नदारद रहे।
बताया जा रहा है कि टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से केवल 36 ही धरना प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शन से विधायकों की दूरी ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल अनुपस्थिति नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर के अंतर्कलह और नेतृत्व से दूरी का भी संकेत है। हालांकि टीएमसी के वरिष्ठ नेता सोवंदेब चट्टोपाध्याय ने पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि कई विधायक अपने जनपदों में पोस्ट-पोल हिंसा से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यस्त थे, इसलिए वह प्रदर्शन में सम्मिलित नहीं हो सके।
कई विधायकों ने नेतृत्व की रणनीति पर उठाए सवाल
धरने में टीएमसी के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे, जिनमें सोवंदेब चट्टोपाध्याय, फिरहाद हाकिम, कुणाल घोष, नयना बनर्जी, संदीपन घोष और ऋतब्रत बनर्जी शामिल थे। इसके बावजूद प्रदर्शन अपेक्षित राजनीतिक संदेश देने में असफल रहा। सूत्रों के मुताबिक, कालीघाट में हुई पार्टी की आंतरिक बैठक में कई विधायकों ने नेतृत्व की रणनीति पर सवाल उठाए। कुछ नेताओं ने कहा कि बंद कमरों में बैठकों से जनता का विश्वास वापस नहीं आएगा। पार्टी को फिर से लोगों के बीच जाकर और उनकी समस्याओं को लेकर जमीन पर उतरना पड़ेगा।
संगठन मजबूत नहीं हुआ तो स्थिति और भी होगी खराब
नेताओं का मानना है कि यदि संगठन को मजबूत नहीं किया गया, तो स्थिति और कमजोर हो सकती है। इसी बीच उत्तर 24 परगना जिले से आई खबरों ने टीएमसी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कांचरापाड़ा और हलिशहर नगर पालिकाओं में बड़ी संख्या में पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। कांचरापाड़ा में 24 में से 15 पार्षदों ने इस्तीफा सौंपा, जबकि हलिशहर में 23 में से 16 पार्षदों ने पार्टी से दूरी बना ली।सूत्रों का कहना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद से ही नगरपालिका स्तर पर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा था। स्थानीय नेताओं पर निष्क्रियता और नागरिक सुविधाओं की अनदेखी के आरोप लग रहे थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा विधायक सुदीप्त दास के साथ बैठकों के बाद इन इस्तीफों का फैसला लिया गया। इससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि कुछ पार्षद जल्द भाजपा का दामन थाम सकते हैं। फिलहाल टीएमसी नेतृत्व ने इन घटनाओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह स्थिति पार्टी के लिए गंभीर चेतावनी है। अगर जल्द संगठनात्मक बदलाव और जमीनी स्तर पर सक्रियता नहीं बढ़ाई गई, तो पार्टी में असंतोष और तेज हो सकता है।