"इस्लाम धर्म में कहीं 'शांति' नहीं..." RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान से छिड़ी नई बहस! UCC पर भी दिया बड़ा संदेश
Mohan Bhagwat statement: भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि समाज को वास्तविक इस्लाम और ईसाई धर्म की शिक्षाओं को समझने और अपनाने की जरूरत है। उनके इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं आना तय माना जा रहा है।
Mohan Bhagwat statement (PHOTO: SOCIAL MEDIA)
Mohan Bhagwat statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को मुंबई में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपनी राय बताई। समान नागरिक संहिता (UCC), इस्लाम और ईसाई धर्म पर टिप्पणी, राम मंदिर, भाजपा और संघ के संबंध, वामपंथ की स्थिति और सावरकर को भारत रत्न देने की मांग जैसे विषयों पर उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में तगड़ी बहस छेड़ दी है।
इस्लाम और ईसाई धर्म पर टिप्पणी
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा, "इस्लाम को शांति का धर्म कहा जाता है, लेकिन 'शांति' दिखाई नहीं देती। यदि धर्म में आध्यात्मिकता न हो तो वह प्रभुत्वशाली और आक्रामक हो जाता है।" उन्होंने आगे कहा कि आज इस्लाम और ईसाई धर्म में जो कुछ देखने को मिल रहा है, वह ईसा मसीह और पैगंबर मोहम्मद की मूल शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि समाज को वास्तविक इस्लाम और ईसाई धर्म की शिक्षाओं को समझने और अपनाने की जरूरत है। उनके इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं आना तय माना जा रहा है।
UCC पर संतुलित रुख
समान नागरिक संहिता को लेकर संघ प्रमुख ने साफ कहा कि इसका निर्माण सभी को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "UCC से मतभेद पैदा नहीं होने चाहिए। यह ऐसा कानून होना चाहिए जो समाज को जोड़ने का काम करे।" उन्होंने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां UCC लागू करने से पहले 3 लाख से ज्यादा सुझाव प्राप्त किए गए और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद अधिनियम पारित किया गया। भागवत ने संकेत दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसी प्रकार संवाद और सहमति के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
BJP और संघ के संबंध पर बयान
एक सवाल के जवाब में कि क्या भाजपा के सत्ता में आने के बाद संघ के 'अच्छे दिन' आए, भागवत ने कहा कि मामला इसके विपरीत है। उन्होंने कहा, "RSS के लिए अच्छे दिन बीजेपी के कारण से नहीं आए, बल्कि जिन्होंने हमारा समर्थन किया, उन्हें लाभ मिला।"
उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि संघ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहा और यह वर्षों की वैचारिक साधना और स्वयंसेवकों की मेहनत का नतीजा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के नेताओं के गलत कार्यों का दोष संघ पर इसलिए लगाया जाता है क्योंकि वे संघ की पृष्ठभूमि से आए हैं।
वामपंथ और युवा संगठन की बात
जब उनसे पूछा गया कि 100 सालों में वामपंथियों का जनाधार क्यों नहीं बढ़ा, तो उन्होंने कहा कि अगर वे चाहें तो संघ मार्गदर्शन देने को तैयार है। भागवत ने यह भी बताया कि RSS एक युवा संगठन है, जिसके कार्यकर्ताओं की औसत आयु 28 वर्ष है। उन्होंने कहा, "हम इसे कम करके 25 साल करना चाहते हैं।" इससे संघ के युवा आधार को मजबूत करने की रणनीति का संकेत मिलता है।
सावरकर को भारत रत्न पर प्रतिक्रिया
वीडी सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर भागवत ने कहा कि अगर उन्हें यह सम्मान दिया जाता है तो इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। यह बयान ऐसे वक़्त आया है जब सावरकर को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
"कोई बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक नहीं"
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि समाज को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। "हम सब एक ही समाज हैं," उन्होंने कहा।
बता दे, मोहन भागवत के इन बयानों ने एक बार फिर देश की राजनीति और वैचारिक विमर्श को केंद्र में ला दिया है। अब आगामी कुछ ही दिनों में इन टिप्पणियों पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।