NEET Re-Exam में नागपुर के छात्र का सेंटर अबू धाबी कैसे? अब NTA ने बताया पूरा सच

NEET Re-exam Center Controversy: NEET री-एग्जाम में नागपुर के छात्र को अबू धाबी सेंटर मिलने पर विवाद खड़ा हुआ। NTA ने सफाई देते हुए लॉगिन रिकॉर्ड और सेंटर बदलाव की पूरी कहानी बताई। जानिए पूरा मामला।

Update:2026-06-20 17:30 IST

NEET Re-exam Center Controversy: देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट (NEET-UG) को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. 21 जून 2026 को इस परीक्षा का दोबारा आयोजन होने जा रहा है, जिसमें देश भर के 22 लाख से अधिक छात्र एक बार फिर डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी किस्मत आजमाने मैदान में उतर रहे हैं. लेकिन इस महा-परीक्षा से ठीक पहले महाराष्ट्र के नागपुर के रहने वाले एक छात्र अब्दुल्ला मोहम्मद के साथ हुई एक बेहद अजीबोगरीब घटना ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को एक बार फिर से गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.

दरअसल, नागपुर के इस छात्र को नीट के री-एग्जाम के लिए देश के भीतर नहीं, बल्कि सीधे सात समंदर पार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया गया. इस खबर के सामने आते ही पूरे देश के छात्र और अभिभावक सन्न रह गए. हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद एनटीए ने अपनी इस गलती को सुधारा और छात्र का केंद्र बदला, लेकिन इसके साथ ही एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पूरे मामले के पीछे का एक ऐसा चौंकाने वाला सच उजागर किया है जिसने कहानी में नया मोड़ ला दिया है.

बिना पासपोर्ट के विदेश में परीक्षा?

जब यह नया एडमिट कार्ड जारी हुआ, तो छात्र अब्दुल्ला मोहम्मद और उसके पूरे परिवार की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गईं. परिवार के सामने सबसे बड़ी मुसीबत यह थी कि छात्र के पास अभी तक अपना पासपोर्ट भी नहीं बना था. ऐसे में बिना किसी वैध दस्तावेज के और परीक्षा के लिए महज कुछ घंटे बचे होने पर अचानक विदेश यात्रा की तैयारी करना किसी के लिए भी नामुमकिन था.

छात्र के परेशान पिता मोहम्मद तालिब ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से अपना दुखड़ा रोते हुए कहा था, "हम एक बेहद साधारण परिवार से हैं और अपने बच्चे को सिर्फ एक परीक्षा दिलाने के लिए इतनी जल्दी विदेश भेजने की आर्थिक और मानसिक स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि उसके पास पासपोर्ट तक नहीं है, तो वह कल फ्लाइट कैसे पकड़ेगा? हमारे पास यात्रा की व्यवस्था करने का कोई समय ही नहीं बचा था."

3 मई को नागपुर में था सेंटर

आपको बता दें कि इससे पहले जब 3 मई को नीट की मुख्य परीक्षा आयोजित की गई थी, तब जारी हुए एडमिट कार्ड में अब्दुल्ला को उसके अपने ही शहर नागपुर के सरस्वती विद्यालय में परीक्षा केंद्र मिला था. लेकिन बाद में देश भर में हुए पेपर लीक और अन्य गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के चलते सरकार को यह परीक्षा पूरी तरह रद्द करनी पड़ी थी. इसके बाद जब दोबारा परीक्षा की तारीख आई और छात्र ने नया एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो वह दंग रह गया. नागपुर के सरस्वती विद्यालय की जगह अब उसके पते पर 'अबू धाबी इंडियन स्कूल' का नाम लिखा हुआ था.

फॉर्म में नागपुर था पहली पसंद

छात्र के पिता ने बताया कि जब उन्होंने मुख्य आवेदन फॉर्म भरा था, तब उन्होंने परीक्षा केंद्र के लिए अपनी पहली प्राथमिकता नागपुर शहर को दी थी. इसके बाद दूसरी और तीसरी पसंद के रूप में वर्धा और भंडारा जैसे नजदीकी शहरों का चुनाव किया था. ऐसे में अचानक लिस्ट में विदेश का नाम देखकर वे पूरी तरह हैरान रह गए. घबराए परिवार ने तुरंत एनटीए की आपातकालीन हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज कराई. मामला मीडिया में आने के बाद एनटीए हरकत में आया और महानिदेशक अभिषेक सिंह ने पुष्टि की कि छात्र की समस्या का समाधान करते हुए उसे नागपुर में ही नया संशोधित एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया है.

NTA का सबसे बड़ा पलटवार

इस पूरे विवाद पर जब हंगामा बढ़ा तो एनटीए के एक बेहद सीनियर अधिकारी ने परदे के पीछे का पूरा सच मीडिया के सामने रख दिया. अधिकारी ने एक बेहद सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि परीक्षा केंद्र में यह बदलाव एजेंसी की तरफ से नहीं हुआ था, बल्कि खुद उम्मीदवार के अकाउंट से पोर्टल पर लॉग-इन करके परीक्षा नगरी (Exam City) की प्राथमिकताओं को बदला गया था. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह बदलाव उसी कंप्यूटर या मोबाइल के आईपी (IP) एड्रेस से किया गया था, जिसका इस्तेमाल छात्र ने पहले 3 मई की परीक्षा का एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए किया था.

रिकॉर्ड रूम से सामने आया लॉगिन का पूरा कच्चा चिट्ठा

एनटीए के पास मौजूद आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड के अनुसार, 21 मई को छात्र के अकाउंट से नीट पोर्टल पर लॉगिन किया गया था. उस दौरान परीक्षा केंद्रों की लिस्ट को अपडेट करते हुए पहली पसंद के रूप में 'अबू धाबी' और दूसरी पसंद के रूप में 'दुबई' का चयन किया गया था. एनटीए अधिकारी ने पूरे सबूत पेश करते हुए बताया कि नागपुर के इसी सिंगल आईपी एड्रेस का इस्तेमाल 24 मई को पैसे रिफंड के लिए बैंक डिटेल्स अपडेट करने, 10 जून को सिटी इंटिमेशन स्लिप देखने और फिर 16 जून को फाइनल एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए भी किया गया था.

मीडिया के पास जाने पर उठे सवाल

अधिकारी ने छात्र के परिवार की नीयत पर भी सवाल उठाते हुए कहा, "हमारे सिस्टम में छात्र की हर एक एक्टिविटी का पूरा डिजिटल टाइमस्टैम्प मौजूद है. जब 16 जून को ही एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिया गया था और उसमें अबू धाबी लिखा था, तो पूरे 4 दिनों तक छात्र या उसके परिवार ने एनटीए को कोई ई-मेल या शिकायत क्यों नहीं भेजी? परीक्षा से ठीक 1 दिन पहले यानी 20 जून को सीधे मीडिया के पास जाने के पीछे क्या मंशा थी?" फिलहाल छात्र को नागपुर में परीक्षा देने की अनुमति दे दी गई है, लेकिन एनटीए की स्पेशल साइबर टीम अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह बदलाव छात्र ने खुद अनजाने में किया था या फिर किसी हैकर या बाहरी व्यक्ति ने उसके अकाउंट में सेंध लगाकर यह शरारत की थी.

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